PM Aavas योजनाओं को लेकर नगरी व ग्रामीण कुटीर निर्माण में यह कैसा पक्षपात

शहरो में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत, ग्रामीणों ने सरकार पर लगाए भेदभाव के आरोप
पक्के घर का सपना संजोए बैठे थे ग्रामीण, नही आए नए लक्ष्य
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को लेकर इन दिनों लोगों में तरह तरह की बातों का बाजार गर्म है एक तरफ देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी वर्ष 2024 तक सभी को पक्के आवास देने की बात करते हैं तो वही जो लिस्ट पूर्व में जारी की गई है उनकी कुटीर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक पूरी तरह से नहीं बन पाई इस सिलसिले में अनेको पात्र हितग्राही ग्रामीण क्षेत्रों में छूट गए हैं जिनके द्वारा पुनः आवेदन भरकर ग्राम पंचायतों में जमा किए जा चुके हैं लेकिन उनकी कुटीरअभी तक नहीं बन पाई हैं और ना ही नवीन सूची में उनके नाम दर्ज किए गए हैं ग्रामीणों ने केंद्र सरकार राज्य सरकार और प्रधानमंत्री आवास योजना के अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों की कुटीर निर्माण की योजना बंद है जबकि शहरी नगरीय क्षेत्रों में नगरपालिका नगर पंचायतो में कुटीरे बाकायदा बन रही हैं और नए प्रकरण स्वीकृत होकर उन्हें कुटीर जारी की जा चुकी हैं इस प्रकार की ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों में दुरंगी नीति और पक्षपातपूर्ण व्यवहार से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है
केन्द्र सरकार की जनोपयोगी व महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से विशेषकर ग्रामीण इलाकों की सूरत बदलकर सबको पक्के मकान देने की बात की जा रही थी लेकिन योजना में पात्र हितग्राहियों के नाम होने के बाद भी नए लक्ष्य ना आने से लोग निराश है और प्रधानमंत्री द्वारा 2024 तक बेघर, कच्चे आवास की जगह पक्के आवास देने के वादे पर प्रश्न चिन्ह लगता दिखाई दे रहा है क्योंकि देखा जाता है ग्रामीण इलाकों में अभी भी बहुसंख्या में कच्चे मकान व झोपड़ी में लोग निवासरत है, विवादो में रही प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की पहली सूची में सैकड़ों पात्र परिवारों के नाम छूट गए थे इसके बाद दूसरे सर्वे में भी खानापूर्ति की गई जिसमें नाम छूट गए, वही आवास योजना की पहली और दूसरी सूची में जिनके नाम शामिल हैं ऐसे हितग्राही योजना की पहली किस्त आने के इंतजार में हैं लेकिन नए लक्ष्य ना आने से निराश हैं वही शहरी क्षेत्रों में नए आवास आने की जानकारी लगने पर निराशा के साथ सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाने से भी नही चूक रहे हैं, लोगो ने हमारे प्रतिनिधि को बताया कि गांव में बसने वाले लोग भी इंसान हैं, ग्रामीणों ने सरकार से नए आवास जल्द स्वीकृत करने की मांग की है।



