उज्जवला के सिलेंडर से गायब हुई गैस ! प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की हकीकत
1050 रू. की गैस टंकी भराने की क्षमता नहीं, गरीब बोले लेकर रख ली भराएं कैसे?
सिलवानी। एक मई 2016 से शुरू प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से भले लाखों हितग्राहियों को घर-घर गैस सिलेंडर और चूल्हा उपलब्ध कराने का दावा किया गया हो, लेकिन उज्जवला के सिलेंडरों से इन दिनों गैस गायब हो गई है। तहसील में हजारों हितग्राही है जिनमें से 20 फीसदी भी ऐसे नहीं हैं जो कि नियमित रीफिलिंग करवा रहे हों। दरअसल, महंगाई के इस दौर में एक हजार रूपए का गैस सिलेंडर रिफिल करवा पाना जरूरमंद और गरीब वर्ग के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। रोजाना कमाकर खाने वाले गरीब वर्ग के लोगों को पात्रता अनुसार शासन ने कनेक्शन और सिलेंडर, चूल्हे तो दे दिए, लेकिन उनमें गैस नहीं है। इसके पीछे कारण है महंगाई। ऐसे में गांवों में फिर से कंडे और लकड़ी वाले चूल्हे शुरु हो गए हैं। उन पर ही घर का खाना बनता है और लोग पकाते भी हैं। योजना की जमीनी हकीकत यही है कि कागजों में भले ही दावा किया जा रहा हो कि हमने चूल्हों में फूंक मारने की झंझट और लकड़ह वाले चूल्हों से निजात दिला दी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उन हितग्राहियों को अब महंगा सिलेंडर भरवाने के रूपए नहीं मिल पा रहे हैं। बतों दें कि योजना के शुरूआत में मुफ्त कनेक्शन और पहली टंकी फ्री दी जाती है। फिर आम उपभोक्ताओं की तरह अन्य टंकी में सब्सिडी भी नहीं दी जाती। ऐसे में यह योजना सिर्फ नाम मात्र की बनकर रह गई है।



