धार्मिक

श्री राम जन्म की कथा का प्रसंग सुनाया : संत रामानुजम दास महाराज

रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । ग्राम आमखेडा में हरिहर आश्रम परिसर में संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन गुरुवार को श्री राम जन्मोत्सव के प्रसंग से मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु, भक्तों ने लगाये जय श्री राम के नारे सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा प्रारंभ से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यास पीठ एवं व्यास का विधिवत पूजन किया गया पूजन पश्चात हरिद्वार से पधारे कथा वाचक संत श्री रामानुजम दास महाराज जी का स्वागत किया गया. स्वागत के पश्चात कथा व्यास संत श्री रामानुजम दास महाराज जी ने श्रीराम कथा के चौथे दिन भगवान श्री राम के जन्म की कथा का वर्णन किया. राम के जन्म होते ही पूरे पांडाल में प्रभु श्रीराम के जयकारों की जयघोष रही. संत श्री ने बताया कि भगवान का जन्म असुरों और पापियों का नाश करने के लिए हुआ था. बाल्यावस्था से ही असुरों का नाश किया. श्री राम की कथा सुन भक्त भावविभोर हो गए. उन्होंने बताया भये प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी. मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन चरित्र अनंत सदियों तक चलता रहेगा. भगवान राम जन्म होते ही लोगों ने मीठी-मीठी तालियां बजाकर भगवान का नाम लिया. कथावाचक संत श्री ने बताया जन्म होते ही अयोध्या में अयोध्या वासी हर्षित हो गए. राजा दशरथ द्वार पुत्रों के जन्म होते ही नगरी मे खुशी की लहर दौड़ी इस तरह से महाराज दशरथ के यहां महारानी कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को पुत्र योग का संयोग बना. भगवान राम के जन्म के बाद अयोध्या में हर तरफ खुशियां मनाई गई हैं. भगवान श्रीराम के जन्म पर राजा दशरथ संपूर्ण नगर में बधाइयों का वितरण कर मिठाई बंटवाते हैं. नगर में हर घर में बधाई गीत का गायन किया गया. इस अवसर पर पूरा पंडाल भय प्रकट कृपाला, दीनदयालाल के महाआरती से गुंजायमान हो गया। पांडाल में उपस्थित श्रोताओं ने भक्ति भाव से भगवान की कथा का रसपान किया. प्रभु श्री राम की कथा सुन भक्त भावविभोर हो गए. राम के जन्म होते ही पुष्प वर्षा होने लगी।

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