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शारदीय नवरात्र 3 अक्टूबर से, नोट कर लें पूजा-विधि, कलश स्थापना मुहूर्त और पूजन सामग्री की लिस्ट

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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👣 शारदीय नवरात्र 3 अक्टूबर से, नोट कर लें पूजा-विधि, कलश स्थापना मुहूर्त और पूजन सामग्री की लिस्ट
🔘 HIGHLIGHTS
♦️ गुरुवार, 03 अक्टूबर से हो रही है नवरात्र की शुरुआत।
♦️ नौ दिनों तक की जाती है मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा।
♦️ देवी मां की कृपा से जीवन में बनी रहती है सुख-समृद्धि।
💁🏻 हिंदू धर्म में देवी-देवताओं और त्योहारों का विशेष महत्व है, और नवरात्रि इन्हीं खास त्योहारों में से एक है। नवरात्रि में नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। बहुत से लोग नहीं जानते कि चैत्र (वासंती नवरात्रि) और शारदीय नवरात्रि (अश्विन नवरात्रि) के अलावा, दो गुप्त नवरात्रि (माघ और आषाढ़) भी होती हैं। इनमें सबसे ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्रि का है, जो अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक माँ दुर्गा की पूजा, उपवास और आखिरी दिन कन्या पूजन करते हैं। इन दिनों में माँ दुर्गा भक्तों की प्रार्थना सुनती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं।
⏱️ कलश स्थापना का समय 1 घंटा 6 मिनट रहेगा
आचार्य श्री गोपी राम ने बताया कि इस बार कलश स्थापना का समय सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस तरह कलश स्थापना का समय कुल 1 घंटा 6 मिनट रहेगा। इसके अलावा कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त में भी की जा सकती है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। यानि 47 मिनट का समय मिलेगा।
🍱 शारदीय नवरात्रि पूजा और कलश स्थापना विधि
▪️ सबसे पहले सुबह उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें।
▪️ पूरे घर को शुद्ध करने के बाद मुख्य द्वार की चौखट पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं।_
▪️ पूजा के स्थान को साफ करें और गंगाजल से पवित्र कर लें।
▪️ अब वहां चौकी लगाएं और माता की प्रतिमा स्थापित करें।
▪️ दुर्गा मां और गणेश जी का नाम लें।
▪️ इसके बाद उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में कलश की स्थापना करें।_
▪️ कलश स्थापना के लिए पहले एक मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं। फिर एक तांबे के कलश में पानी और गंगाजल डालें।
▪️ कलश पर कलावा बांधें और आम के पत्तों के साथ उसे सजाएं। इसके बाद उसमें दूब, अक्षत और सुपारी डालें।
▪️ उसी कलश पर चुनरी और मौली बांध कर एक नारियल रख दें।
▪️ सामग्री का उपयोग करते हुए विधि- विधान से मां दुर्गा का पूजन करें।
▪️ दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
▪️ अंत में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
📅 शारदीय नवरात्रि तिथियां
🔔 3 अक्टूबर 2024, गुरुवार मां शैलपुत्री (पहला दिन) प्रतिपदा तिथि
🔔 4 अक्टूबर 2024, शुक्रवार मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) द्वितीया तिथि
🔔 5 अक्टूबर 2024, शनिवार मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन) तृतीया तिथि
🔔 6 अक्टूबर 2024, रविवार मां कुष्मांडा (चौथा दिन) चतुर्थी तिथि* 🔔 7 अक्टूबर 2024, सोमवार मां स्कंदमाता (पांचवा दिन) पंचमी तिथि*
🔔 8 अक्टूबर 2024, मंगलवार मां कात्यायनी (छठा दिन) षष्ठी तिथि
🔔 9 अक्टूबर 2024, बुधवार मां कालरात्रि (सातवां दिन) सप्तमी तिथि
🔔 10 अक्टूबर 2024, गुरुवार मां महागौरी (आठवां दिन) दुर्गा अष्टमी
🔔 11 अक्टूबर 2024, शुक्रवार महानवमी, (नौवां दिन) शरद नवरात्र व्रत पारण
🔔 12 अक्टूबर 2024, शनिवार मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, दशमी तिथि (दशहरा)
🪅 मां दुर्गा की सवारी क्या रहेगी?
इस बार मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आएंगी. ज्योतिष के अनुसार, मां दुर्गा का डोली पर सवार होना अशुभ संकेत दे रहा है. यह प्राकृतिक आपदा, महामारी और देश में अस्थिरता का संकेत भी है.
📚 शारदीय नवरात्रि पूजन विधि

नवरात्रि के पहले दिन व्रती द्वारा व्रत का संकल्प लिया जाता है. इस दिन लोग अपने सामर्थ्य अनुसार 2, 3 या पूरे 9 दिन का उपवास रखने का संकल्प लेते हैं. संकल्प लेने के बाद मिट्टी की वेदी में जौ बोया जाता है और इस वेदी को कलश पर स्थापित किया जाता है. हिन्दू धर्म में किसी भी मांगलिक काम से पहले भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया है और कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है इसलिए इस परंपरा का निर्वाह किया जाता है. कलश को गंगाजल से साफ की गई जगह पर रख दें.
इसके बाद देवी-देवताओं का आवाहन करें. कलश में सात तरह के अनाज, कुछ सिक्के और मिट्टी भी रखकर कलश को पांच तरह के पत्तों से सजा लें. इस कलश पर कुल देवी की तस्वीर स्थापित करें. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें इस दौरान अखंड ज्योति अवश्य प्रज्वलित करें. अंत में देवी मां की आरती करें और प्रसाद को सभी लोगों में बाट दें।

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