5.46 करोड़ की लागत, महाविद्यालय में खेल को तरस रहे विद्यार्थी
उमरियापान महाविद्यालय का मामला, निर्माण एजेंसी झाड़ रही पल्ला
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । 5.46 करोड़ की लागत और खेलने को तरस रहे विद्यार्थी उपरोक्त समाचार का शीर्षक पढ़कर चौकिये मत। ये पूरा मामला ढीमरखेड़ा तहसील के उमरियापान महाविद्यालय का है जहां पर निर्माण एजेंसी द्वारा शासन से पैसा तो पूरा लिया गया है लेकिन उनके द्वारा क्या काम करवाया गया है यह स्पष्ट देखा जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि उमरियापान के समीपी ग्राम पकरिया में महाविद्यालय के आसपास खाईनुमा खड्ढें हैं जिन्हें निर्माण एजेंसी द्वारा समतलीकरण करवाकर उसे मैदान का रूप देना था इसके बाद भी निर्माण एजेंसी द्वारा लगातार अनियमित्ता बरतते हुये उन खाईनुमा गड्ढों को भरा नहीं गया है । स्मरण रहे कि इस संबंध में निर्माण एजेंसी को अवगत कराया जा चुका है और यह भी बताया था कि महाविद्यालय में मैदान न होने के कारण कॉलेज में अध्यनरत विद्यार्थी को खेल की सुविधा नहीं मिल पा रहा है और बच्चे खेल गतिविधियों से प्रभावित हो रहे है इसके बाद भी निर्माण एजेंसी ठेकेदार के कांनों में जूं तक नहीं रेंगी और उसके द्वारा आज दिनांक तक उक्त खाईनुमा गड्ढों को नहीं भरा गया है जिससे किसी भी दिन कोई अप्रिय घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि जैसे ही बारिश होती है उक्त खाईनुमा गड्ढें तालाब में बदल जाते हंै और इससे आंशका बनी रहती है कि कोई घटना-दुर्घटना न हो जाये।
जनप्रतिनिधि भी बैठे हाथ में हाथ रखे
शासन द्वारा स्थानीय बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही अच्छी शिक्षा मिल सके इसके लिये उक्त महाविद्यालय का निर्माण करवाया गया है लेकिन इतनी लम्बी समय अवधि के बाद भी उक्त महाविद्यालय को वह स्वरूप नहीं मिल सका है जो मिलना था। गंभीर बात यह है कि इस संबंध में स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा भी इस पर रूचि नहीं दिखाई जा रही है और निर्माण एजेंसी अपना पल्ला झाड़ रही है जबकि अभी महाविद्यालय में पूरा काम हुआ भी नहीं है। इसके पहले सांसद प्रतिनिधि पद्मेश गौतम के द्वारा महाविद्यालय का निरीक्षण किया गया था और निर्माण एजेंसी को आगाह किया गया था कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी इसके बाद भी निर्माण एजेंसी ठेकेदार के द्वारा अब तक उक्त खाईनुमा खडडो को मैदान में परिवर्तित नही करवाया गया है जो ठेका नियम की शर्त का घोर उल्लंघन माना जाता है और यदि ठेकेदार के द्वारा अपूर्ण कार्य करके छोड़ दिया जाता है तो ऐसी सथिति में उसे ब़लेक लिस्ट करने की कार्यवाही शासन द्वारा की जा सकती है l




