धार्मिक

सुदामा दरिद्र और भिखारी नहीं है, वे तो प्रशान्तात्मा थे : संतोष शास्त्री

रिपोर्टर : शिवलाल यादव, रायसेन।
रायसेन । तहसील कार्यलय के पीछे वरिष्ठ पत्रकार अनिल सक्सेना के निवास पर श्री मद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। आज कथा का समापन दिवस में श्रोताओं ने बड़ी सख्या मे उपस्थित होकर कथा का आनन्द लिया।
कथा वाचक संतोष शास्त्री ने श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता और मिलन का चरित्र विस्तार से वर्णन किया था सुनकर सभी होता भाभुक हो गये कई लोग सुदामा की दरिद्र भिखारी कहते है। शास्त्री जी ने कहा सुदामा गरीब हो सकता लाचार हो सकता है, परन्तु दरिंद्र औरंभि नहीं है भागवत में वर्णन है सुदामा को प्रसान्तात्मा। प्रसन्तात्मा का अर्थ है जिसे संसार की कोई सम्पत्ती लालाइत जाकर संसार को देखता है. आंखे तो खुली रहती है पर देखता कुछ नहीं उसी तरह सुदामा जी इस संसार को देखते हैं मन में कोई इच्छा ही नहीं है। द्वारिकाधी कृष्ण मित्र हैं। परन्तु उनसे भी कभी नहीं मांगा क्योकि सुदामा की मित्रता स्वार्थ रहित है- मनुष्य रिश्तों को निभाता कम है और आजमाता ज्यादा है। परन्तु द्वारिकाधीश मित्र है ये बात सुदामा ने अपनी पत्नी को नहीं बताई क्यो सम्बन्ध स्थिर बने रहते हैं जिनमें प्रेम कृष्ण से किसी स्वार्थ से नहीं है वह तो मित्रता का आदर्श । जब सुदामा द्वारिका धीश को मिलने द्वारिका गये तो वहाँ साक्षप्त लक्ष्मी, रूकमणी सुदामा जी को पंखा झल रही है।
कथा का विश्राम दिवस आचार्य श्यामसुन्दर शर्मा और शितांश व्यास के द्वारा इस अनुष्ठान में विधिवत हवन सम्पन्न पूर्णाहूति कराई एवं कथा के उपरान्त विशाल भण्डारे का आयोजन हुआ।

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