मक्का की फसल पर फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप, बहुत तेजी से फसल को कर रहा चौपट

ब्यूरो चीफ भगवत सिंह लोधी
दमोह । जिले के बटियागढ़ क्षेत्र के किसानों के खेतो में फसलों का सर्वे कर रहे डॉ.द्वारका प्रसाद अठया, कीटविज्ञान विभाग, ज.ने.कृ.वि.वि., जबलपुर एवं रूपेंद्र सिंह ठाकुर के द्वारा देखने पर मक्का के फील्ड में फाल आर्मी वर्म कीट का बहुत अधिक संख्या में पाया जाना इस बात का संकेत है कि यदि इसका प्रबंधन न किया गया तो बहुत बड़ी हानि का सामना करना पड़ सकता है। यह कीट एक बार में 900-1000 अंडे दे सकता है। इस कीट की इल्ली आरंभिक अवस्था में भूमि की सतह के पास की पत्तियों का भक्षण करती है। प्रगत अवस्था में पूरे पौधे (मक्के की पत्तियां, भुट्टे, नर पुष्प) पर आक्रमण कर पौधों में सिर्फ डंठल एवं पत्तियों में मध्य शिरा छोडक़र शेष भाग को गंभीर क्षति पहुंचाती है। स्वभाव से निशाचर होने के कारण इल्लियां दिन में पत्तियों में छुप जाती हैं एवं रात में ज्यादा सक्रिय होकर फसल को क्षति पहुंचाती है। जीवन चक्र 35-40 दिन में एक चक्र पूरा करने वाला यह कीट अनुकूल मौसम में इस कीट की 6-7 पीढिय़ां एक वर्ष में होती है। प्रतिकूल मौसम में यह कीट शंखी अवस्था में भूमि में रहता है एवं मानसून आने पर तेजी से अपनी संख्या में वृद्धि करता है। कीट की वयस्क तितली लंबी उड़ान भरकर अपने जीवनकाल में सैकड़ों किलोमीटर तक उड़ सकती है। अत: अनुकूल मौसम रहने पर यह कीट बड़े भूभाग को अपनी चपेट में ले सकता है।
प्रबंधन: फेरोमोन प्रपंच 8-10 प्रति हेक्टेयर, बी.टी. 1 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर, बिवेरिया बेसियाना 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर, कोराजन 0.4 मिली प्रति लीटर पानी, स्पाईनेटोरम 0.5 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से किसान छिड़क सकते है।



