पुलिया निर्माण में गुणवत्ता दरकिनार सरपंच पति खुद बने ठेकेदार, अधिकारियों को मतलब नहीं
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत हरदी में सरपंच पति की दंबगई से जहां गांव की जनता त्रस्त है और दूसरी ओर उसके द्वारा पंचायत के निर्माण कार्यों में ठेकेदार की भूमिका में लिप्त होकर गुणवत्ताविहिन काम करवाया जा रहा है।
स्मरण रहे कि 2 लाख 60 हजार रूपये की लागत से पुलिया निर्माण का कार्य मंदिर के पास करवाया जा रहा है जिसकी निर्माण एजेंसी तो पंचायत है लेकिन यह मात्र कागज तक सीमित है। वास्तव में उक्त पुलिया का निर्माण कार्य करने का ठेका सरपंच पति मनोज दीक्षित द्वारा लिया गया है जहां पर उसके द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से घटिया पुलिया निर्माण का काम करवाया जा रहा है और यदि ग्रामवासियों द्वारा उक्त संबंध में आवाज उठाई जाती है तो उनको धमकाकर शांत करा दिया जाता है।
सचिव और रोजगार सहायक को मतलब नहीं
उल्लेखनय है कि हरदी पंचायत में सचिव राजेश पार्ते एवं रोजगार सहायक सुरेन्द्र कुमार है लेकिन ये दोनों कर्मी मात्र अपने पदों तक ही सीमिति है। सरपंच पति की दंबगई के आगे दोनों कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वाहन तक सही तरीके से नहीं कर पा रहे है और न ही इनके द्वारा पंचायत द्वारा कराये जा रहे निर्माण कार्र्यो की मानिटरिंग की जा रही है जबकि सचिव और रोजगार सहायक का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह पंचायत के द्वारा करवाये जा रहे निर्माण कार्य पर सतत् नजर बनाकर रखे। लिहाजा सचिव और रोजगार सहायक सरपंच पति की दंबगई के कारण कई-कई दिनों तक पंचायत नहीं जाते है और मजबूरी में जैसा सरपंच पति कहते है वैसा ही सचिव और रोजगार सहायक द्वारा किया जा रहा है।
पंचायत में लटका रहता है ताला
आमजन को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिये प्रत्येक दिन पंचायत खोलने का फरमान शासन द्वारा जारी किया गया है लेकिन हरदी पंचायत की कार्यप्रणाली को देखकर ऐसा लगता है कि यह आदेश हरदी पंचायत में लागू नहीं होता है। क्योंकि अधिकांश समय में पंचायत में ताला लटका रहता है। सरपंच को मतलब नहीं, वहीं सचिव के द्वारा भी मनमाने तरीके से नौकरी की जाती है। जब मन हो गया तब आ गये नहीं तो झंडा चौक में बैठकर ही इनकी डयूटी पूरी हो जाती है। वहीं अधिकांश समय पंचायत बंद रहने से ग्रामवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।



