
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 06 फरवरी 2026
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
06 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। आज सूर्य देवता चित्र श्रवण नक्षत्र से चलकर (समय रात्रि:- 06.46 ए एम बजे) धनिष्ठा नक्षत्र में चले जाएंगे। आज रवि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “सूर्य देवता के धनिष्ठा नक्षत्र में संक्रांति” की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं एवं अनंत- अनंत बधाइयां।।
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
*शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌦️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 01:18 AM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 12:23 AM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं। तथा नक्षत्र देवता सवितार (सूर्य का रूप) माने जाते हैं।
⚜️ योग – धृति योग 11:36 PM तक, उसके बाद शूल योग
⚡ प्रथम करण : कौलव 12:45 PM तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल 01:19 AM तक, बाद गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:45:00
👸🏻ब्रह्म मुहूर्त : 29:22 पी एम से शाम 30:14 बजे तक
🌆 प्रातः सन्ध्या : 29:48 पी एम से शाम 07:06 बजे तक
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:13 दोपहर से दोपहर 12:57 बजे तक
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 14:25 बजे से शाम 15:09 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 18:02 बजे से 18:28 बजे तक
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 18:04 बजे से शाम 19:22 बजे तक
💧 अमृत काल : शाम 18:02 पी एम से 19:44 पी एम तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर 24:09 पी एम से शाम 25:01 पी एम तक
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पंजाब के भुतपूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों पुण्य तिथि, ‘भारत रत्न’ से सम्मानित पार्श्वगायिका लता मंगेशकर स्मृति दिवस, ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित दीवान रंजीत राय जयन्ती, भारतीय पार्श्वगायक भूपेंद्र सिंह जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता दिवस, स्वतंत्रता सेनानी मोतीलाल नेहरू स्मृति दिवस, प्रसिद्ध गीतकार प्रदीप जन्म दिवस, खान अब्दुल गफ्फार खान जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर एस. श्रीसंत जन्म दिवस, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय रजत जयन्ती, राष्ट्रीय फ्रोजन योगर्ट दिवस, शांतकुमारन नायर श्रीसंत जयन्ती, राष्ट्रीय महिला हृदय दिवस, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, राष्ट्रीय चॉपस्टिक दिवस, जम्मू और कश्मीर दिवस, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🏜️ Vastu tips 🛟
झाड़ू रखते समय ये गलती कभी न करें अक्सर लोग घर में झाड़ू को खड़ा करके रख देते हैं जो कि अशुभ माना जाता है। इसे हमेशा जमीन पर लिटाकर रखना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि झाड़ू पर किसी का पैर न पड़े। दरअसल झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है इसलिए इसका अपमान नहीं करना चाहिए।
*इन जगहों पर कभी न रखें झाड़ू कभी भी घर के मुख्य द्वार के पास नहीं रखनी चाहिए इससे धन हानि होने की संभावना रहती है। इसके अलावा रसोई में भी इसे नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे अन्न का अभाव होता है। पूजा कक्ष के पास भी झाड़ू नहीं होनी चाहिए। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ अलसी के तेल में अल्फा- लिनोलेनिक एसिड होता है। इस एसिड को शार्ट में एएलए कहते हैं। एएलए मानव शरीर के विकास के लिए आवश्यक होता है। शरीर के सम्पूर्ण विकास और समृद्धि के लिए अल्फा-लिनोलेनिक एसिड आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त इसमें ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड होता है जो केवल फिश ऑयल में पाया जाता है। संयुक्त ओमेगा एसिड ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। ये कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और हृदय संबंधी बीमारियों के लिए रामबाण इलाज प्रदान करता है। इसके अलावा अलसी में फाइबर कम पाया जाता है जो पेट संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज और अपच से भी राहत दिलाता है। अलसी बहुत अच्छा एंटीऑक्सीडेंट होता है इसलिए त्वचा की सुरक्षा और वृद्धि के लिए लाभकारी होता है। बाल और नाखूनों की वृद्धि के लिए ओमेगा फैटी एसिड लाभकारी होता है जो अलसी में पाया जाता है। इसमें पाया जाने वाला ओमेगा एसिड बालों को घना, काला, लंबा और सुरक्षित रखता है। 🩸 आरोग्य संजीवनी 🩻
💨 श्वास-खाँसी का शत्रु: टंकण भस्म कफ को पिघलाकर श्वास नलिकाओं को साफ करती है।दमा, पुरानी खाँसी और जकड़न में इसका चूर्ण शहद के साथ लेना अत्यंत लाभकारी है।
🔥 *पाचन सुधारे और पेट के रोग मिटाए: यह अग्नि को प्रदीप्त करती है — यानी भूख बढ़ाती है, गैस, अपच और उदरवृद्धि को दूर करती है।
🦠 *संक्रमण से सुरक्षा: इसके एंटीसेप्टिक गुण घाव, फोड़े-फुंसी, या त्वचा के संक्रमण को जल्दी भरते हैं। 👶 महिलाओं के लिए वरदान: टंकण भस्म मासिक धर्म में अनियमितता, दर्द, और श्वेत प्रदर (Leucorrhoea) में बेहद उपयोगी है। 🦴 जोड़ों का दर्द व वात विकारों में लाभकारी: यह शरीर में जमी ‘आम’ और कफ को निकालकर वात दोष को संतुलित करती है। 🔮 टंकण भस्म के उपयोग
*खाँसी/दमा: 125 mg टंकण भस्म + शहद के साथ दिन में 2 बार। *पाचन हेतु: 125 mg टंकण भस्म + अदरक रस या नींबू रस के साथ भोजन के बाद।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
अगर आप अपनी इच्छा से कुछ समय के लिए बोलना छोड़ दें, मौन धारण कर लें तो इससे आपको क्या फायदे हो सकते हैं-
👉🏼 *मौन के लाभ मौन की शुरुआत जुबान के चुप होने से होती है। धीरे-धीरे जुबान के बाद आपका मन भी चुप हो जाता है। मन में चुप्पी जब गहराएगी तो आंखें, चेहरा और पूरा शरीर चुप और शांत होने लगेगा। तब आप इस संसार को नए सिरे से देखना शुरू कर पाएंगे। बिल्कुल उस तरह से जैसे कोई नवजात शिशु संसार को देखता है। जरूरी है कि मौन रहने के दौरान सिर्फ श्वांसों के आवागमन को ही महसूस करते हुए उसका आनंद लें। मौन से मन की शक्ति बढ़ती है। शक्तिशाली मन में किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, चिंता और व्यग्रता नहीं रहती। मौन का अभ्यास करने से सभी प्रकार के मानसिक विकार समाप्त हो जाते हैं। आइये जानते हैं मौन के सात महत्वपूर्ण फायदों के बारे में। 👉 *संतुष्टि कुछ न बोलना, यानि अपनी एक सुविधा से मुंह मोड़ना। जी हां, बोलना आपके लिए एक बहुत बड़ी सुविधा ही होती है। जो आपके मन में चल रहा होता है उसे आप तुरंत बोल देते हैं। लेकिन, मौन रहने से चीजें बिल्कुल बदल जाती हैं। मौन अभाव में भी खुश रहना सिखाता है।
👉 *अभिव्यक्ति जब आप सिर्फ लिखकर बात कर सकते हैं तो आप सिर्फ वही लिखेंगे जो बहुत जरूरी होगा। कई बार आप बहुत बातें करके भी कम कह पाते हो। लेकिन ऐसे में आप सिर्फ कहते हो, बात नहीं करते। इस तरह से आप अपने आपको अच्छी तरह से व्यक्त कर सकते हैं। 👉 *प्रशंसा हमारे बोल पाने की वजह से हमारा जीवन आसान हो जाता है, लेकिन जब आप मौन धारण करेंगे तब आपको ये अहसास होगा कि आप दूसरो पर कितना निर्भर हैं। मौन रहने से आप दूसरों को ध्यान से सुनते हैं। अपने परिवार, अपने दोस्तों को ध्यान से सुनना, उनकी प्रशंसा करना ही है।
👉 *ध्यान देना जब आप बोल पाते हैं तो आपका फोन आपका ध्यान भटकाने का काम करता है। मौन आपको ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर करता है। इससे किसी एक चीज या बात पर ध्यान लगाना आसान हो जाता है। 👉 विचार शोर से विचारों का आकार बिगड़ सकता है। बाहर के शोर के लिए तो शायद हम कुछ नहीं कर सकते, लेकिन अपने द्वारा उत्पन्न शोर को मौन जरूर कर सकते हैं। मौन विचारों को आकार देने में हमारी मदद करता है। हर रोज अपने विचारों को बेहतर आकार देने के लिए मौन रहें। 👉 *प्रकृति जब आप हर मौसम में मौन धारण करना शुरू कर देंगे तो आप जान पाएंगे कि बसंत में चलने वाली हवा और सर्दियों में चलने वाली हवा की आवाज भी अलग-अलग होती है। मौन हमें प्रकृति के करीब लाता है। मौन होकर बाहर टहलें। आप पाएंगे कि प्रकृति के पास आपको देने के लिए काफी कुछ है।
👉 *शरीर मौन आपको आपके शरीर पर ध्यान देना सिखाता है। अपनी आंखें बंद करें और अपने आप से पूछें, “मुझे अपने हाथ में क्या महसूस हो रहा है?” अपने शरीर को महसूस करने से आपका अशांत मन भी शांत हो जाता है। शांत मन स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। *हमे सप्ताह मे एक बार नही तो कम से कम माह मे एक बार मौन वर्त अवश्य रखना चाहिए, मौन का अर्थ केवल शब्द बन्द कर लेना नही है, मन से भी किसी विष्य की चिन्ता नही करनी चाहिए, अन्त प्रयास करें उस दिन मन भी मौन हो जाए।
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।



