
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 09 जनवरी 2026
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌦️ मास – माघ मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार माघ माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि पूर्ण रात्रि तक
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 01:40 PM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है, नक्षत्र देवता आर्यमन (सूर्यदेव का ही एक रूप) है।
🔱 योग – शोभन योग 04:55 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
⚡ प्रथम करण विष्टि 07:39 PM तक, बाद
✨ द्वितीय करण : बव पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:54:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 03:24:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या – 05:54 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:07 पी एम से 12:49 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:13 पी एम से 02:54 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:39 पी एम से 06:06 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या – 05:41 पी एम से 07:03 पी एम
❄️ रवि योग – 07:15 ए एम से 01:40 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:01 ए एम से 12:55 ए एम, जनवरी 10
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ रवि योग/ आडल योग/ स्वामी विवेकानन्द जयन्ती/ सीरियल ‘रामायण’ में लक्ष्मण की भुमिका अदा करने वाले सुनील लहरी जयन्ती, नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. हरगोविंद खुराना जन्म दिवस, वृंदावन लाल वर्मा, प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा जन्म दिवस, प्रसिद्ध पार्श्व गायक महेंद्र कपूर की जयन्ती, स्वाधीनता स्वतंत्रता सेनानी सर छोटूराम स्मृति दिवस, क़मर जलालाबादी पुण्य तिथि, बिहार के मुख्यमंत्री राम सुंदर दास जन्म दिवस, अभिनेता कल्याण कुमार गांगुली जन्म दिवस, अभिनेता अनूप कुमार जन्म दिवस, पूर्व विदेश मंत्री माधव सिंह सोलंकी स्मृति दिवस, राष्ट्रीय खुबानी दिवस, राष्ट्रीय रविवार भोज दिवस, राष्ट्रीय गुब्बारा उदगम दिवस, राष्ट्रीय स्थैतिक बिजली दिवस, राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन प्रशंसा दिवसभारतीय प्रवासी दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
माघ माह में घर लाएं ये चीजें
तिल- माघ महीने में तिल का सेवन और दान करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। इसके अलावा माघ में आने वाले व्रत-त्यौहार में भी तिल का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। ऐसे में माघ माह में तिल खरीदकर घर लाना बहुत ही शुभकारी होता है। माघ महीने में पूजा पाठ में तिल का उपयोग करने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है।
श्री यंत्र माघ महीने में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। ऐसे में इस माह में श्रीयंत्र घर लाना बहुत ही शुभ होता है। माघ में श्री यंत्र खरीदकर घर लाएं और विधिपूर्वक पूजा करें। ऐसा करने से लक्ष्मी नारायण प्रसन्न होते हैं और धन-धान्य में बरकत आती है। श्री यंत्र घर में रखने से जीवन में कभी भी आर्थिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।
गर्म कपड़े माघ माह में गर्म कपड़े और कंबल का दान अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसे में माघ मास में कंबल सहित गर्म कपड़ों को खरीदकर घर लाएं और इसे गरीब, जरूरतमंदों में दान करें। माघ माह मे ठंड अधिक रहती है ऐसे में जरूरतमंदों को गर्म कपड़ों का दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
सरसों का तेल आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, माघ माह में सरसों का तेल खरीदकर घर लाना भी शुभ माना गया है। इसके अलावा माघ महीने के शनिवार के दिन शाम के समय पीपल पेड़ के नीचे तिल का तेल का दीया जलाने से शनि दोष से छुटकारा मिलता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तुलसी के बीज का हिमजीरा दानेदार शक्कर व दूध के साथ लेने से मूत्र पिंड में फंसी पथरी निकल जाती है।
एक मूली को खोखला करने के बाद उसमे बीस-बीस ग्राम गाजर शलगम के बीज भर दें, उसके बाद मूली को भून लें,उसके बाद मूली से बीज निकाल कर सिल पर पीस लें। सुबह पांच या छ: ग्राम पानी के साथ एक माह तक पीते रहे,पथरी और पेशाब वाली बीमारियों में फायदा मिलेगा।
*जीरे को मिश्री की चाशनी बनाकर उसमें या शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।
*यदि मूत्र पिंड में पथरी हो और पेशाब रुक रुक कर आना चालू हो गया है तो एक गाजर को नित्य खाना चालू कर देना चाहिये,इससे मूत्रावरोध दूर होगा,और पेशाब खुलकर साफ होगा,पेशाब के साथ ही पथरी घुल कर निकल जायेगी। 🩺 आरोग्य संजीवनी 🩻
हिचकी जब आप बहुत तेज़ी से खाते हैं, हवा निगल लेते हैं, या तनाव में होते हैं, तो ये आपके ‘डायफ्राम’ के लिए एक इमरजेंसी ब्रेक की तरह काम करती हैं। आपका शरीर कह रहा होता है: “धीरे हो जाओ, तुम मुझ पर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव डाल रहे हो।”
*उबासी लेना यह आलस्य नहीं है। जब आप थके हुए, तनावग्रस्त या बोर होते हैं, तो उबासी दिमाग को ठंडा करने और ऑक्सीजन बढ़ाने में मदद करती है।
*बिना किसी स्पष्ट कारण के अंगड़ाई लेना यह आपके शरीर का कहने का तरीका है: “मुझे हलचल की ज़रूरत है।” यह रक्त संचार को बढ़ाता है, मांसपेशियों को सक्रिय करता है और एकाग्रता में सुधार करता है। *छींकना एक इन-बिल्ट रक्षा प्रणाली। यह आपकी नाक से धूल, कीटाणु, पराग और अन्य अवांछित कणों को साफ करती है।
*रोंगटे खड़े होना ठंड या डर से उत्पन्न होने वाली एक प्राचीन उत्तरजीविता प्रतिक्रिया छोटे बाल गर्मी को रोकने में मदद करने के लिए खड़े हो जाते हैं—ठीक वैसे ही जैसे जानवरों में होता है। *पलक झपकना या फड़कना इसमें कुछ भी रहस्यमयी नहीं है। यह आमतौर पर थकान, तनाव, बहुत अधिक कैफीन या निर्जलीकरण का संकेत है।
*पानी में उंगलियों का सिकुड़ना एक क्रमिक विकास की तरकीब गीली सतहों पर पकड़ सुधारने के लिए आपकी त्वचा सिकुड़ जाती है—जैसे सड़क पर टायर के निशान ग्रिप बनाते हैं। *“बिना वजह” आँसू आना ये आपकी आँखों को नम और साफ़ रखते हैं और तीव्र भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
गृहस्थों के लिए इस दौरान शास्त्रोक्त नियम निम्नलिखित हैं:
*धार्मिक और आध्यात्मिक नियम पूजा-पाठ वर्जित: सूतक के दौरान घर के मंदिर में मूर्ति स्पर्श, धूप-दीप करना या किसी भी प्रकार का कर्मकांड (हवन, अभिषेक) वर्जित होता है। *मंत्र जाप: आप मानसिक रूप से भगवान का नाम जप सकते हैं, लेकिन माला का उपयोग नहीं करना चाहिए।
*मंदिर प्रवेश: सूतक की अवधि पूरी होने तक मंदिर जाना या किसी भी सार्वजनिक धार्मिक उत्सव में भाग लेना वर्जित है। *अखंड जोत: यदि घर में पहले से कोई अखंड जोत जल रही है, तो उसे घर का कोई सदस्य नहीं बल्कि कोई बाहरी व्यक्ति या पड़ोसी तेल/घी डाल सकता है।
*खान-पान और रसोई के नियम बाहरी लोगों को भोजन: सूतक वाले घर का भोजन बाहरी लोगों या ब्राह्मणों को नहीं करना चाहिए। *छुआछूत का ध्यान: वैज्ञानिक दृष्टि से यह संक्रमण से बचने का समय होता है। इसलिए जच्चा (माता) और बच्चा को एक निश्चित कक्ष में मर्यादित रखा जाता है और रसोई के कार्यों से दूर रखा जाता है।
*दान और सामाजिक नियम शुभ कार्य वर्जित: सूतक के दौरान सगाई, विवाह, गृह-प्रवेश या कोई भी नया काम शुरू नहीं किया जाता। *दान: इस दौरान किसी को दान नहीं देना चाहिए और न ही किसी से दान स्वीकार करना चाहिए।
सूतक की अवधि (कितने दिनों का होता है?)* अलग-अलग वर्णों और मान्यताओं में इसकी अवधि अलग हो सकती है, लेकिन सामान्यतः गृहस्थों के लिए: *_10 दिन: माता और पिता के लिए 10 दिनों का सूतक मुख्य माना जाता है। *शुद्धिकरण: 10वें दिन घर की साफ-सफाई, गंगाजल छिड़कना और स्नान के बाद पूजा-पाठ फिर से शुरू किया जा सकता है।
*हवन: कई परिवारों में 11वें या 12वें दिन ‘नामकरण’ संस्कार के साथ छोटा सा हवन करके घर को पूरी तरह शुद्ध किया जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियाँ :- यात्रा में जन्म: यदि यात्रा के दौरान या अस्पताल में जन्म हुआ है, तो सूतक तभी शुरू होता है जब जच्चा-बच्चा घर प्रवेश करते हैं (क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार)। *सूतक में त्योहार: यदि सूतक के बीच कोई बड़ा त्योहार (जैसे दीपावली या होली) आए, तो केवल मानसिक रूप से त्योहार मनाया जाता है, दीप प्रज्वलन या विशेष पूजा नहीं की जाती।
*गौ सूतक: यदि घर की गाय बछड़े को जन्म देती है, तो उसका सूतक 15 दिन (दूध के संदर्भ में) माना जाता है। *वैज्ञानिक आधार: सूतक का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशु और माता को बाहरी संक्रमण से बचाना और उन्हें पूर्ण विश्राम (Rest) देना होता है।
*_विशेष टिप: 2026 में अपने पारिवारिक कुल पुरोहित से एक बार परामर्श अवश्य लें, क्योंकि कुछ कुल-परंपराओं में इन नियमों में थोड़े बदलाव हो सकते हैं। क्या आप सूतक के बाद किए जाने वाले ‘नामकरण संस्कार’ या ‘शुद्धिकरण पूजा’ की विधि के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे?
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।



