Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 29 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 26 दिसम्बर 2025
*ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥ 🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
*शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें । *शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
*शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌦️ मास – पौष मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार पौष माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 01:43 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 09:00 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है, और इसके देवता वरुण देव हैं, जो जल और बुद्धि के देवता माने जाते हैं
⚜️ योग – सिद्धि योग 02:00 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 01:43 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 01:31 ए एम, दिसम्बर 27 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:49:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:23 ए एम से 06:17 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:50 ए एम से 07:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:01 पी एम से 12:42 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:05 पी एम से 02:46 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:29 पी एम से 05:56 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:32 पी एम से 06:54 पी एम
💧 अमृत काल : 01:06 ए एम, दिसम्बर 27 से 02:43 ए एम, दिसम्बर 27
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:55 पी एम से 12:49 ए एम, दिसम्बर 27
❄️ रवि योग : 07:12 ए एम से 09:00 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ जौर मेला (पंजाब) प्रारम्भ/ पंचक जारी/ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह स्मृति दिवस, भारत के स्वतंत्रता सेनानी उधम सिंह जयन्ती, प्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन जन्म दिवस, मोबाइल फोन के आविष्कारक मार्टिन कूपर जन्म दिवस, राष्ट्रीय धन्यवाद दिवस, वीर बाल दिवस, श्री गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह जी स्मृति दिवस, बाबा फतेह सिंह जी शहादत स्मृति दिवस, राष्ट्रीय कैंडी केन दिवस, सिख धर्म गुरु गोविन्द सिंह जयन्ती, प्रसिद्ध संत विद्यानंद जी महाराज जन्म दिवस, मुग़ल सम्राट बाबर स्मृति दिवस, पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री गोपी चन्द भार्गव स्मृति दिवस, भारतीय राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा स्मृति दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
कूड़ेदान और वास्तु शास्त्र का संबंध
*वास्तु में कूड़ेदान को नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना गया है, क्योंकि इसमें घर की गंदगी और बेकार चीजें रखी जाती हैं। अगर इसे सही स्थान पर न रखा जाए, तो यह घर में नकारात्मकता बढ़ा सकता है। मान्यता है कि गलत दिशा में कूड़ेदान रखने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं, जिससे घर में रुपये-पैसों की कमी और परेशानियां बढ़ने लगती हैं।
*उत्तर-पूर्व दिशा में कूड़ेदान रखने के नुकसान *आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा माना जाता है। इस दिशा में कूड़ेदान रखने से घर के सदस्यों का मन अशांत रहता है। मानसिक तनाव बढ़ सकता है और लोग बिना वजह चिड़चिड़े महसूस करने लगते हैं। इसका सबसे अधिक असर घर के मुखिया पर पड़ता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
क्रोध से बचने के उपाय : एकांत में आर्तभाव से व सच्चे ह्रदय से भगवान से प्रार्थना कीजिये कि ‘हे प्रभो ! मुझे क्रोध से बचाइये |’
जिस पर क्रोध आ जाय उससे बड़ी नम्रता से, सच्चाई के साथ क्षमा माँग लीजिये |* *सात्त्विक भोजन करे | लहसुन, लाल मिर्च एवं तली हुई चीजों से दूर रहें | भोजन चबा-चबाकर कम-से-कम 25 मिनट तक करें | क्रोध की अवस्था में या क्रोध के तुरंत बाद भोजन न करें। भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग करने को कहते थे | अपने आश्रमों में भी भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग किया जाता है, साथ ही कुछ पंक्तियों का पाठ और जयघोष भी किया जाता है तो कभी ‘जोगी रे …..’ भजन की कुछ पंक्तियाँ गायी जाती हैं | इस प्रकार रसमय होकर फिर भोजन किया जाता है | इस प्रयोग को करने से क्रोध से सुरक्षा तो सहज में ही हो जाती है और साथ-ही-साथ चित्त भगवद आनंद, माधुर्य से भी भर जाता है
🌷 *आरोग्य संजीवनी* 🌹 वायु की तकलीफ हो तो …
*किसीको वायु की तकलीफ है तो 1-2 काली मिर्च अथवा सफेद मिर्च, 5-7 तुलसी-पत्ते और 1 चम्मच घी खा ले तो कैसी भी वायु हो, नियंत्रित हो जायेगी दोनों हाथों की सबसे छोटी उँगलियों के आखिरी, बाहरी पोर को एक साथ दाँतों से दबा दे तो भी वायु-प्रकोप शांत होता है ह्रदय की कोई तकलीफ होती है अचानक या गैस होती है तो ऐसा करे, नियंत्रित हो जायेगी *किसीको वायु और गैस की तकलीफ ज्यादा है तो उसे आलू, चावल और चने की दाल आदि से परहेज रखना चाहिए | ये वायु करते हैं | वायु का रोगी दूध पिये तो 1-2 काली मिर्च डालकर पियें |
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हिन्दू संस्कृति में बिना तिलक के कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजन आदि पूर्ण नहीं माना जाता है | जन्म से लेकर मृत्युशय्या तक तिलक का प्रयोग किया जाता है | तिलक लगाना सम्मान का सूचक भी माना जाता है | अतिथियों को स्वागत में तथा विदाई के समय तिलक करने कि परम्परा भी है | सफलता हेतु और सुझबुझ प्रकट करने के लिए तिलक लगाने की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है | ब्रह्मवैवर्त पुराण ( ब्रह्म खंड : 26 .76) में कहा गया है :
स्नानं दानं तपो होमो देवता पितृकर्म च |
*तत्सर्व निष्फलं याति ललाटे तिलकं विना || अर्थात स्नान, दान, तप, होम तथा देव व पितृ कर्म करते समय यदि तिलक न लगा हो तो ये सब कार्य निष्फल हो जाते हैं *उल्लेखनीय है कि ललाट पर दोनों भौहों के बीच विचारशक्ति का केंद्र है। योगी इसे आज्ञाचक्र कहते हैं। इसे शिवनेत्र अर्थात कल्याणकारी विचारों का केंद्र भी कहा जाता है। इसके नजदीक दो महत्त्वपूर्ण अंत:स्त्रावी ग्रंथियाँ स्थित हैं : पीनियल ग्रंथि और पीयूष ग्रंथि | दोनों भौंहों के बीच चंदन अथवा सिंदूर आदि का तिलक लगाने से उपरोक्त दोनों ग्रंथियों का पोषण होता है और विचारशक्ति एवं आज्ञाशक्ति का विकास होता है
*अधिकांश स्त्रियों का मन स्वाधिष्ठान एवं मणिपुर केंद्र में रहता है | इन केन्द्रों में भय, भाव और कल्पना की अधिकता होती है | हमारी माताएँ – बहनें भावनाओं एवं कल्पनाओं में बह न जायें , उनका शिवनेत्र, विचारशक्ति का केंद्र विकसित हो और उनकी समझ बढ़े- इस उद्देश्य से ऋषियों ने महिलाओं हेतु बिंदी या तिलक लगाने कि परम्परा शुरू की | परंतु आज महिलाएँ इस कल्याणकारी परम्परा के पीछे उद्देश्य को नहीं समझती हैं और ऐसी बिंदियाँ लगाती हैं जो हानिकारक हैं | *“ आजकल माइयों के साथ अन्याय हो रहा है | छठा केंद्र ( आज्ञाचक्र) विकसित हो इसलिए तिलक करते हैं | इससे तेज, शोभा, प्रसन्नता, बल, उत्साह बढ़ता है लेकिन उसकी जगह पर उत्साह, बल, तेज को दबानेवाला, मृत पशुओं के अंगों से बनाया हुआ घोल बिंदी चिपकाने के लिए लगा देते हैं | तेज बढाने कि जगह पर तेज को कुंठित कर देना…… यह कैसा है ! जो प्लास्टिक की बिंदी नहीं लगाने का बचन देती हैं और बाजारू क्रीम नहीं लगाने का वचन देते हैं, वे हाथ ऊपर करें तो मैं समझूंगा कि मेरे को दक्षिणा मिल गयी |”
*कठोपनिषद् के नुसार ह्रदय की नाड़ियाँ में से सुषुम्ना नामक नाड़ी मस्तक के सामनेवाले हिस्से की और निकलती है | इस नाड़ी से ऊर्ध्वगतीय मोक्षमार्ग निकलता है | अन्य सभी नाड़ियाँ चारों दिशाओं में फैली हुई हैं परंतु सुषुम्ना का मार्ग ऊर्ध्व दिशा की ओर ही रहता है | *इस सुषुम्ना नाड़ी को केन्द्रीभूत मानकर अपने-अपने सम्प्रदायों के अनुसार लोग ललाट पर विविध प्रकार के तिलक धारण करते हैं | चंदन का लेप सुषुम्ना पर लगाने से अध्यात्म के लिए अनुकूल विशिष्ट प्रकिया होती है |
*नासिका से प्रवाहित होनेवाली दो नाड़ियाँ में से बायीं नाड़ी इड़ा ‘ऋण’ (negative) और दायी नाड़ी पिंगला ‘धन’ (positive) होती है | धन विद्युत् बहते समय उत्पन्न उष्णता को रोकने के लिए सुषुम्ना पर तिलक लगाना बहुत उपयोगी रहता है स्कंद पुराण में आता है : *अनामिका शान्तिदा प्रोक्ता मध्यमाऽऽयुष्करी भवेत् |
*_अंगुष्ठ: पुष्टिद: प्रोक्तस्तर्जनी मोक्षदायिनी ||
अनामिका से तिलक करने से शांति, मध्यमा से आयु, अँगूठे से स्वास्थ्य और तर्जनी से मोक्ष की प्राप्ति होती है
🤷🏻♀️ ध्यान दें : सोते समय ललाट से तिलक का त्याग करे देना चाहिए
(तिलक – संबंधी विस्तृत जानकारी हेतु पढ़ें आश्रम से प्रकाशित पुस्तक ‘जीवन जीने कि कला’, पृष्ठ 39- 46 )
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।


