
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 29 दिसम्बर 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार पौष माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 10:12 AM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रेवती 07:40 AM तक उपरांत अश्विनी 06:04 AM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं, जो वाणी, बुद्धि और संचार के कारक हैं, और इसके अधिष्ठाता देवता पूषा हैं, और राशि स्वामी बृहस्पति हैं।
⚜️ योग – परिघ योग 07:36 AM तक, उसके बाद शिव योग 04:31 AM तक, उसके बाद सिद्ध योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 10:12 ए एम तक
✨ द्वितीय करण: तैतिल – 09:05 पी एम तक गर
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:50:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:15:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:24 ए एम से 06:18 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:03 पी एम से 12:44 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:48 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:31 पी एम से 05:58 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:33 पी एम से 06:55 पी एम
💧 अमृत काल : 11:21 पी एम से 12:50 ए एम, दिसम्बर 30
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:56 पी एम से 12:51 ए एम, दिसम्बर 30
❄️ रवि योग : 07:41 ए एम से 07:13 ए एम, दिसम्बर 30
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ पंचक समाप्ति्/ ख्यातिप्राप्त धारावाहिक ‘रामायण’ निर्माता रामानंद सागर जयन्ती, भारतरत्न चौधरी चरण सिंह जन्म दिवस, सुपर स्टार राजेश खन्ना जन्म दिवस, भारतीय शायर अली सरदार जाफ़री जन्म दिवस, परमवीर चक्र विजेता गुरबचन सिंह सालारिया जयन्ती, वेल्श फुटबॉल कोच रियान गिग्स जन्म दिवस, भारतीय अभिनेत्री नेहा पेंडसे जन्म दिवस, राष्ट्रीय नायक दिवस, जैविक विविधता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, राष्ट्रीय काली मिर्च दिवस, टिक टॉक दिवस, अंतर्राष्ट्रीय सेलो दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
अगर आपके घर में सूखे हुए और मुरझाए हुए पौधे हैं तो इनको भी घर में आपको नहीं रखना चाहिए। इन्हें घर में रखने से घर में नकारात्मकता छा सकती है। इसके कारण घर के लोगों की आर्थिक प्रगति भी रुकती है साथ ही जीवन में आगे आप नहीं बढ़ पाते। इसलिए नया साल शुरू होने से पहले आपको सूखे पौधों को घर से बाहर कर देना चाहिए।
*टूटे कांच के बर्तन या शीशा भी आपको घर में नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार, टूटा कांच घर में हो तो दिक्कतों का सामना आपको करना पड़ सकता है। टूटा कांच घर में होने से आर्थिक परेशानियां तो आती ही हैं साथ ही दुर्घटनाएं होने का खतरा भी रहता है। *झाडू को माता लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए घर में आपको टूटा झाड़ू भी नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आपसे रुठ सकती हैं और धन का अभाव आपको हो सकता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
इनका रखें ध्यान
दोनों हाथो से सिर नहीं खुजलाना चाहिए | जूठे हाथों से सिर को स्पर्श नहीं करना चाहिए | नहीं तो बुद्धि मंद होती है |
*ए जो गलती छुपाता है उसका गिरना चालू रहता है और जो गिरने की बात को भगवान के आगे, गुरु के आगे, अपने नजदीकी सत्संगी, विश्वासपात्र मित्र के आगे बोल के, रोकर पश्चाताप करके रास्ता खोजता है उसको भगवान बचा भी लेते हैं |
🍷 *आरोग्य संजीवनी* 🍶
हड्डियों को जोड़ने के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका हड्डियों को जोड़ने के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका निम्नलिखित है क्योंकि हड़जोड़ हड्डियों को जोड़ने में बहुत लाभकारी होता है। हड्डियों को जोड़ने के लिए 10 से 15 मिली हड़जोड़ रस को घी में मिलाकर पीने से तथा इसमें अलसी का तेल मिलाकर टूटे हुए जगहों पर बांधने से हड्डियां जुड़ती हैं। तथा 2 से 5 ग्राम हड़जोड़ के चूर्ण को दूध के साथ पीलाने से भी हड्डियां जुड़ती हैं।
*मोच का दर्द के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका मोच का दर्द दूर करने के लिए हड़जोड़ का घरेलु उपाय बहुत ही फायदेमंद होता है। मोच का दर्द के लिए हड़जोड़ खाने का तरीका निम्नलिखित है इसके लिए हड़जोड़ के रस में तिल का तेल मिलाकर पका लें फिर उसे छानकर मोच वाली जगह पर लगाने से काफी आराम मिलता है। *रीढ़ की हड्डी के दर्द से राहत पाने के लिए हड़जोड़ रीढ़ की हड्डी के दर्द से राहत पाने के लिए हड़जोड़ के पत्तों को गर्म करके सिकाई करने से रीढ़ की हड्डियों में हो रहे दर्द से काफी राहत मिलती है।
*पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए हड़जोड़ के फायदे पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए हड़जोड़ को एक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए अपने आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करके इसका सेवन कर सकते हैं। *शरीर के दर्द के लिए हड़जोड़ खाने के तरीके शरीर के दर्द के लिए हड़जोड़ खाने के तरीके निम्नलिखित रूप में किये जाते हैं क्योंकि हड़जोड़ में दर्दनिवारक गुण पाए जाने के कारण हड़जोड़ का इस्तेमाल करने से शरीर में हो रहे दर्द से कुछ ही समय में राहत मिल जाती है। इसके लिए काली मिर्च , सोंठ और अस्थिसंहार प्ररोह पेस्ट 1 से 2 ग्राम इस्तेमाल करें।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व कलश-स्थापना की परम्परा है | विवाह आदि शुभ प्रसंगों, उत्सवों तथा पूजा-पाठ, गृह-प्रवेश, यात्रारम्भ आदि अवसरों पर घर में भरे हुए कलश पर आम के पत्ते रखकर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है और कलश की पूजा की जाती है | जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त कलश का उपयोग किसी-न-किसी रूप में होता रहता है | दाह-संस्कार के समय व्यक्ति के जीवन की समाप्ति के सूचकरूप में उसके शव की परिक्रमा करके जल से भरा मटका छेदकर खाली किया जाता है और उसे फोड़ दिया जाता है |
*कलश में सभी देवताओं का वास माना गया है | हमारे शास्त्र में आता है कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिपुटी एवं अन्य सभी देवी-देवता, पृथ्वी माता और उसके सप्तद्वीप, चारों वेदों का ज्ञान एवं इस संसार में जो-जो है वह सब इस कलश-जल में समाया हुआ है | *समुद्र- मंथन के समय अमृत-कलश प्राप्त हुआ था | माना जाता है कि माँ सीताजी का आविर्भाव भी कलश से हुआ था | लंकाविजय के बाद भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तब उनके राज्याभिषेक के समय भी अयोध्यावासियों ने अपने घरों के दरवाजे पर कलश रखे थे |
*भरा हुआ कलश मांगलिकता का प्रतिक है | मनुष्य – शरीर भी मिटटी के कलश अथवा घड़े के जैसा ही है | जिस शरीर में जीवनरूपी जल न हो वह मृर्दा शरीर अशुभ माना जाता है | इसी तरह खाली कलश भी अशुभ माना जाता है | इसी तरह खाली कलश भी अशुभ माना जाता है | शरीर में मात्र श्वास चलते है, वह वास्तविक जीवन नहीं है | परंतु जीवन में प्रभु-प्रेम का सत्संग, श्रद्धा, भगवत्प्रेम, उत्साह, त्याग, उद्धम, उच्च चरित्र, साहस आदि गुण हों तभी कलश भी अगर दूध, पानी अथवा अनाज से भरा हुआ हो तभी वह कल्याणकारी कहलाता है | *कलश का तात्त्विक रहस्य“अपना शरीर, अपना जीवन एक कलश या कुम्भ के जैसा है | कलश के अंदर क्या है ? कलश के अंदर पानी है | और यह गागर का चार घूँट या 2-4 लीटर पानी सागर की खबर दे रहा है ऐसे ही अंत:करण में समाया चैतन्य, विभु चैतन्य की खबर दे रहा है | हे मानव ! तेरा यह शरीररूपी कलश है | कलश में ब्रह्मा, विष्णु और महेश अर्थात सात्त्तिव्क, राजस और तामस गुणों के अधिष्ठाता देवों का निवास है | इसलिए मंदिर के दर्शन के बाद कलश के दर्शन करने होते हैं, ऐसी ही गृह के दर्शन के साथ-साथ अपने शरीररूपी कलश के दर्शन कर और उसके आधार चैतन्य की स्मृति कर !
*कलश का पानी सागर में मिल जाय ऐसे यह जीवात्मा का शरीररूपी कलश यही छूट जाय इससे पहले वह परमात्मा को मिलने की विधि जान ले तो उसका बेड़ा पार हो जाय |” ◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉► ⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।। *आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।



