Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 07 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 80 नवम्बर 2025
08 नवम्बर 2025 दिन शनिवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष कि चतुर्थी तिथि है। आज संकट श्रीगणेश चतुर्थी का पावन व्रत है। आज सनातनी महिलाऐं अपने संतान की कुशलता – संपन्नता – सुख एवं आरोग्य हेतु दिनभर उपवास के उपरांत सायंकाल में श्रीगणेश जी की पूजा के बाद उगते चन्द्रमा को अर्घ्य (समय: वाराणसी 07:45 PM एवं दिल्ली तथा हरियाणा हिसार में 8:29 PM) देकर उपवास खोलती है। आप सभी सनातनियों को “संकट श्रीगणेश चतुर्थी व्रत” की बहुत- बहुत हार्दिक शुभकामनाऐं एवं अनन्त- अनन्त बधाइयां।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 👸🏻 शिवराज शक 352_
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 07:32 AM तक उपरांत चतुर्थी तिथि 04:25 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 10:02 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र के देवता सोम हैं, जो चंद्र देव हैं। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है, लेकिन इसके प्रमुख देवता सोम (चंद्रमा) हैं, जो अमृत और पोषण के प्रतीक हैं।
⚜️ योग – शिव योग 06:31 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 07:32 ए एम तक बव – 05:54 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 04:25 ए एम, नवम्बर 09 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:17:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:15:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:53 ए एम से 05:46 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:20 ए एम से 06:38 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:31 पी एम से 05:57 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:31 पी एम से 06:50 पी एम
💧 अमृत काल : 02:09 पी एम से 03:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 09
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – गणेश संकष्ट चतुर्थी/ सितारा देवी जन्म दिवस, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की जयन्ती, लोचन प्रसाद पांडे स्मृति दिवस, बोम्मिरेड्डी नरसिम्हा रेड्डी पुण्य तिथि, राष्ट्रीय कैपुचीनो दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेडियोलॉजी दिवस, विश्व शहरीकरण दिवस, दिग्गज भारतीय अभिनेत्री शर्मिला टैगोर जन्म दिवस, कनक दास जयन्ती, विश्व रेडियोग्राफी दिवस, राष्ट्रीय स्टेम/स्टीम दिवस, राष्ट्रीय STEM दिवस, अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस दिवस (सप्ताह)
✍🏼 तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗽 Vastu tips ⛲
वास्तु के अनुसार, बिस्तर पर बैठकर भोजन करने से भी राहु नकारात्मक प्रभाव देता है। जिन लोगों के घर में लोग बिस्तर पर बैठकर खाना खाते हैं उनको बार-बार आर्थिक हानि हो सकती है। इसलिए ऐसा करने से आपको बचना चाहिए। अगर आप जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं तो आपको बेहद अच्छे बदलाव अपने जीवन में देखने को मिल सकते हैं।
*_आपके घर के अंदर कभी भी कांटेदार पौधे नहीं रखने चाहिए। इसके कारण भी राहु का प्रभाव बढ़ने लगता है। ऐसा करने से घर के लोगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और करियर के क्षेत्र में भी आपको परेशानियां आ सकती हैं। कांटेदार पौधे अगर रखने ही हैं तो आपको घर से बाहर किसी खुली जगह पर इन्हें रख सकते हैं, लेकिन घर के अंदर इन्हें कभी भी नहीं रखना चाहिए।
🔰 *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
साटा एक रामबाण है जिस व्यक्ति को हॉट की प्रॉब्लम है या हो जाती है तो उसको साटा की पत्तियों की सब्जी हफ्ते में दो बार खिलानी चाहिए ऐसे लगभग 6 महिने तक उपयोग करें। यह दवा एक तरह से रामबन का काम करेगी व्यक्ति 6 महीने में बिल्कुल सही हो जाएगा उसे हार्ट की प्रॉब्लम कभी नहीं होगी इसे कई डॉक्टरों ने सही बताया है। यह जड़ी बूटी बरसात के दिनों में कहीं पर भी मिल जाएगी इसे अपने घर लाकर और पतियों को साफ करके और थोड़ा सा पानी में उबाल के और फिर उसको अपने घर में जिस तरह हम सब्जी बनाते हैं उसी तरह इसको बनाना है। बचा हुआ पानी जो बाल हुआ पानी है उसको इसी में डाल दीजिए। यह दवा एक तरह से रामबन का काम करेगी इसकी जड़ियों को सुख के पाउडर बनाकर आप इसे 6 महीने की पुड़िया बना लीजिए एक महीने की 15 पुडिया1 दिन छोड़कर एक दिन एक पुडि लेनी है। गुनगुने पानी के साथ सुबह-सुबह 6 महीने तक इसे उपयोग में लाइए फिर उसके बाद आपकी यह बीमारी हार्ट की प्रॉब्लम हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
प्रियंगु प्रकृति से तीखा, कड़वा, मधुर, शीत, लघु, रूखा, वातपित्त से आराम दिलाने वाला, चेहरे की त्वचा की रंगत को निखारने में मददगार , घाव को जल्दी ठीक करने में मदद करता है।
यह उल्टी, जलन, पित्त के बढ़ने के कारण बुखार, रक्तदोष, रक्तातिसार, शरीर से बदबू आना, खुजली, मुँहासे, कोठ, रक्तपित्त , विष, आभ्यांतर दाह (जलन), तृष्णा या प्यास, तथा गुल्म या ट्यूमर में लाभप्रद होता है।
प्रियंगु का औषधिकारक गुण का फायदा पाने के लिए समान मात्रा में प्रियंगु, नागरमोथा तथा त्रिफला को पीसकर दांतों पर रगड़ने से शीताद रोग में लाभ मिलता है।
पेट दर्द से परेशान हैं और कोई भी उपचार काम नहीं आ रहा है तो 1-2 ग्राम प्रियङ्गु फूल तथा फल चूर्ण का सेवन करने से अजीर्ण या बदहजमी , अतिसार या दस्त, उदर शूल या पेट दर्द तथा प्रवाहिका या पेचिश में लाभ होता है। इसके अलावा 50 मिग्रा हींग, 1 ग्राम प्रियंगु तथा 1 ग्राम टंकण को गुड़ के साथ पीसकर 125 मिग्रा की गोली बनाकर सुबह शाम खिलाने से पेट दर्द से आराम मिलता है।पेट की समस्या को शांत करने के लिए प्रियंगु चूर्ण का सेवन करने से पाचन संबंधी समस्या, आमाशय शूल में लाभ होता है।अगर खान-पान में असंतुलन होने के कारण दस्त से खून निकल रहा है तो प्रियंगु का इस तरह से इस्तेमाल करने पर जल्दी आराम मिलता है-
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
शास्त्रों के अनुसार देवी- देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अत: प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय घर पर कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएं।
पितृदोष और कालसर्पदोष से मुक्ति हेतु
कपूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि हमें शायद पितृदोष है या काल सर्पदोष है। दरअसल, यह राहु और केतु का प्रभाव मात्र है। इसको दूर करने के लिय प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ कपूर जलाएं। घर के शौचालय और बाथरूप में कपूर की 2-2 टिकियां रख दें। बस इतना उपाय ही काफी है। घर में बरकत होती है।
आकस्मिक घटना या दुर्घटना से बचाव
आकस्मिक घटना या दुर्घटना का कारण राहु, केतु और शनि होते हैं। इसके अलावा हमारी तंद्रा और क्रोध भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। इसके लिए रात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद कपूर जलाएं।
हालांकि प्रतिदिन सुबह और शाम जिस घर में कर्पूर जलता रहता है। उस घर में किसी भी प्रकार की आकस्मिक घटना और दुर्घटना नहीं होती। रात्रि में सोने से पूर्व कपूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है।
सकारात्मक उर्जा और शांति के लिए
घर में यदि सकारात्मक उर्जा और शांति का निर्माण करना है , तो प्रतिदिन सुबह और शाम कपूर को घी में भिगोकर जलाएं और संपूर्ण घर में उसकी खुशबू फैलाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक उर्जा नष्ट हो जाएगी। दु:स्वप्न नहीं आएंगे और घर में अमन शांति बनी रहेगी है। ग्रह कलेश नहीं रहता। बात बात पर लड़ाई झगड़ा नहीं होता।
वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है , तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।
अचानक धन प्राप्ति का उपाय
गुलाब के फूल में कपूर का टुकड़ा रखें। शाम के समय फूल में एक कपूर जला दें और फूल को देवी दुर्गा को चढ़ा दें। इससे आपको अचानक धन मिल सकता है ,रुका या फंसा हुआ धन मिलने का योग बनता है ,कोई प्रॉपर्टी का काम अटका हुआ है तो वो सुलझता है।
यह कार्य आप कभी भी शुरू करके कम से कम 43 दिन तक करेंगे तो लाभ मिलेगा। यह कार्य नवरात्रि के दौरान करेंगे तो और भी ज्यादा असरकारक होगा।
वास्तु दोष मिटाने के लिए
यदि घर के किसी स्थान पर वास्तु दोष निर्मित हो रहा है , तो वहां एक कपूर की 2 टिकियां रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तब दूसरी दो टिकिया रख दें। इस तरह बदलते रहेंगे तो वास्तुदोष निर्मित नहीं होगा।
भाग्य चमकाने के लिए
पानी में कपूर के तेल की कुछ बूंदों को डालकर नहाएं। यह आपको तरोताजा तो रखेगा ही आपके भाग्य को भी चमकाएगा। यदि इस में कुछ बूंदें चमेली के तेल की भी डाल लेंगे तो इससे राहु, केतु और शनि का दोष नहीं रहेगा, लेकिन ऐसे सिर्फ शनिवार को ही करें।
पति-पत्नी के बीच तनाव को दूर करने हेतु
रात को सोते समय पत्नी अपने पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति अपनी पत्नी के तकिये में कपूर की 2 टिकियां रख दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर कही उचित स्थान पर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर शयन कक्ष में जला दें।
यदि ऐसा नहीं करना चाहते हैं तो प्रतिदिन शयनकक्ष में कपूर जलाएं और कपूर की 2 टिकियां शयनकक्ष के किसी कोने में रख दें। जब वह टिकियां गलकर समाप्त हो जाए तो दूसरी रख दें।
धन-धान्य के लिए
रात्रि काल के समय रसोई समेटने के बाद चांदी की कटोरी में लौंग तथा कपूर जला दिया करें। यह कार्य नित्य प्रतिदिन करेंगे तो धन-धान्य से आपका घर भरा रहेगा। धन की कभी कमी नहीं होगी। माता लक्ष्मी का घर में निवास रहेगा।
विवाह बाधा हेतु
विवाह में आ रही बाधा को दूर करना चाहते हैं तो यह उपाय बहुत ही कारगर है। 36 लौंग और 6 कपूर के टुकड़े लें, इसमें हल्दी और चावल मिलाकर इससे मां दुर्गा को आहुति दें। शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
मनचाही भूमि या भवन पाने के लिए
सबसे पहले उस भूमि या भवन लेना चाहते हैं, उस स्थान की थोड़ी-सी मिट्टी लाकर एक कांच की शीशी में उसे डालें। उसमें गंगा जल और कपूर डालकर उसे पूजा में स्थापित कर स्थापित कर दें। हर रोज सूर्यास्त के बाद मन्त्र ‘ऐं हीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे’ का पांच माला जप करें और जौ में रोज गंगा जल डालें। नौ दिन बाद थोड़े से अंकुरित जौ निकाल लें और ले जाकर सुनसान जगह पे डाल दें। कांच की शीशी को छोड़कर शेष सामग्री को नदी में डाल दें। सिद्ध उपाय है।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।

