
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 22 नवम्बर 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल*
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 05:11 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 04:46 PM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध और देवता इंद्र हैं। जो देवताओं के राजा माने जाते हैं।
⚜️ योग – सुकर्मा योग 11:29 AM तक, उसके बाद धृति योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 05:11 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 06:19 ए एम, नवम्बर 23 तक गर
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:05:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:02 ए एम से 05:56 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:29 ए एम से 06:49 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:46 ए एम से 12:28 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:35 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:25 पी एम से 05:52 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:25 पी एम से 06:46 पी एम
💧 अमृत काल : 06:56 ए एम से 08:43 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:34 ए एम, नवम्बर 23
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – चन्द्रदर्शन/ वीरांगना झलकारी बाई जन्म दिवस, मास्टर तारा सिंह स्मृति दिवस, राम नरेश यादव पुण्य तिथि, विवेकी राय पुण्य तिथि, राष्ट्रीय क्रैनबेरी रेलिश दिवस, राष्ट्रीय दत्तक ग्रहण दिवस, राष्ट्रीय क्रैनबेरी रेलिश दिवस, राष्ट्रीय हिंसा रोको दिवस, राष्ट्रीय आत्महत्या उत्तरजीवी दिवस, महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन जयन्ती, भारतीय कोरियोग्राफर सरोज ख़ान जन्म दिवस, वालचंद हीराचंद जन्म दिवस, शांति घोष जयन्ती, लक्ष्मण नायक जन्म दिवस, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जयन्ती, वरिष्ठ भारतीय स्वतंत्रता सेनानी शहीद लक्ष्मण नायक जयन्ती, राष्ट्रीय औषधि दिवस (सप्ताह) ✍🏼 *तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
🌾 Vastu tips 🌷
घर में कबूतर का घोंसला लगाना आमतौर पर अशुभ समझा जाता है। लोग मानते हैं कि अगर कबूतर ने घर की बालकनी या छत पर घोंसला बना लिया है तो वह अपने साथ दुर्भाग्य लेकर आय़ा है। ऐसे में लोग उसे तुरंत हटा देते हैं क्योंकि उन्हें परेशानी व आर्थिंक तंगी से दो-चार होने का भय होता है।
*इस कई लोगों का मानना है कि कबूतर मां लक्ष्मी की सवारी है तो इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही सौभाग्य भी साथ आता है ऐसे में कबूतर का घोंसला घर से नहीं हटाना चाहिए। *आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक, अगर कबूतर दिन के प्रथम पहर पर बोल दे तो इसका मतलब है कि लाभ मिलेगा। अगर तीसरे पहर पर गुटर गूं कर दे तो विवाह या प्रेम संबंधी लाभ हो सकता है। पर अगर चौथे प्रहर में गुटर गूं करने से कामों में हानि पहुंच सकती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*यदि आप सचमुच स्वास्थ्य चाहते हैं और छोटी-मोटी बीमारियों को लेकर डॉक्टरों के चक्कर लगाना पसंद नहीं करते तो यह आलेख आपके लिए है। अपने स्वस्थ रहने की आदतों में आज से एक और आदत ‘नंगे पैर चलने’ को शामिल कर लीजिए और देखिए कि कुछ देर खाली पैर चलने से जीवन में कितने सकारात्मक बदलावों को आप प्रत्यक्ष महसूस कर पाते हैं! *सुविधा की होड़ में हम देह को अधिक से अधिक आराम देने की तरकीबें ढूंढते हैं। *धूप-हवा-पानी-धूल-पसीना सबसे बचकर तो रहना चाहते ही हैं, चलने से भी बचते हैं। कुछ सौ मीटर की छोटी दूरियां भी बिना टू-व्हीलर या कार के नहीं तय करते और कभी पैदल चलना पड़ भी जाए तो खाली व तो कतई नहीं चलते। आराम की लत में हम भूल गए कि नंगे पैर चलना स्वस्थ जीवन का एक जरूरी हिस्सा है। *ईश्वर ने हमारे पैरों को जूते पहन कर चलने के लिए डिजायन नहीं किया। अन्य जीव जंतुओं की तरह ही प्रकृति ने हमारे शरीर के अंदर भी स्वस्थ रहने की कई ऑटोमैटिक व्यवस्थाएं दे रखी हैं। इंसानी पांव के तलवों में भी ऐसा सिस्टम मौजूद है जो पावों के सामान्य प्रयोग से हमारे शरीर की आरोग्य व्यवस्था की मदद करता है।
🩻 आरोग्य संजीवनी 🩸
👉 कैसे बनाएं अर्जुन की छाल का काढ़ा?
*इसका सेवन करने का सबसे उत्तम तरीका काढ़ा बनाना है। *एक छोटा चम्मच (लगभग 3-5 ग्राम) अर्जुन की छाल का पाउडर या छोटा टुकड़ा लें।
*इसे 2 कप (लगभग 400 मिली) पानी में डालें। (पारंपरिक रूप से इसे दूध-पानी में भी पकाया जाता है – जिसे क्षीरपाक विधि कहते हैं)। *इस मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक कि यह घटकर आधा (1 कप) न रह जाए।
*इसे छान लें और गुनगुना होने पर सुबह खाली पेट पिएं। *चेतावनी: यह एक शक्तिशाली औषधि है। इसका सेवन करने से पहले, विशेषकर यदि आप पहले से हृदय रोगी हैं, तो डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।
💬 अब आपकी बारी!
*क्या आपने या आपके परिवार में किसी ने कभी अर्जुन की छाल का उपयोग किया है? आपका अनुभव कैसा रहा? *दिल को स्वस्थ रखने के लिए आप और कौन-से आयुर्वेदिक उपाय या घरेलू नुस्खे अपनाते हैं?
🤫 इन नुस्खों के पीछे का असली रहस्य जानना चाहते हैं?
*अर्जुन की छाल जैसी औषधियों का सटीक ज्ञान आयुर्वेद के महान ग्रंथों में संचित है। यह जानना कि कौन सी जड़ी-बूटी किस दोष पर काम करती है और उसे कैसे लेना चाहिए, यही असली विज्ञान है। अगर आप इस गहरे ज्ञान को समझना चाहते हैं, तो असली ज्ञान हज़ारों साल पुराने मूल ग्रंथों में छिपा है! 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ वेदों में शुक्र एक ग्रह है और शुभ है पर पुराणों में दैत्यगुरु है पुराणों में एक कथा आती है जो अत्यंत ही दुर्लभ है *पद्मपुराण (उत्तराखंड अध्याय 18) का कथन है कि एक बार जालंधर दैत्य और शिव जी का युद्ध चल रहा था और शुक्राचार्य संजीवनी विद्या द्वारा दैत्य जालंधर के मृत सैनिकों को जीवित कर रहे थे, जब शिव जी ने दैत्यगुरु शुक्राचार्य मारना चाहा तो शुक्र ने कहा कि ऐसा करने पर शिवजी को ब्रह्मम हत्या का दोष लगेगा क्योंकि दैत्यगुरु शुक्राचार्य ब्राह्मण है, तब शिव ने शुक्र को एक नारी की योनि में कैद करने का विचार किया ताकि कैद रहने पर वह सैनिकों को बार-बार अपनी विद्या से जीवित नहीं कर पाएंगे, शिव जी के ऐसा सोचते ही उनके तीसरे नेत्र से एक राक्षसी निकल पड़ी जिसके लंबे लंबे केश , बड़े-बड़े स्तन , विशाल नेत्र और विशाल पेट था, उस नग्न राक्षसी का नाम कृत्या था (ऐसा पद्मपुराण का मत है )शिव जी ने उस राक्षसी को आदेश दिया कि जब तक मैं जालंधर को ना मार डालू तब तक तुम शुक्राचार्य को अपनी योनि के भीतर दबा कर रखो, जब शुक्राचार्य ने राक्षसी को देखा तो, वह सब कुछ समझ कर भागने लगे लेकिन कृत्या राक्षसी ने शुक्राचार्य को दौड़ाकर पकड़ लिया उनका आलिंगन किया और उन्हें अपनी योनि डाल दिया और अदृश्य हो गई, शिव की आज्ञा से जब तक जालंधर नहीं मारा तब तक उसराक्षसी ने शुक्राचार्य को अपनी योनि से बाहर नहीं निकाला
*संस्कृत के श्लोकों में यह कथा पद्मपुराण में अंकित है ,तब से यौन संबंध तथा इससे प्राप्त सुख का संबंध शुक्र से जुड़ गया,शुक्र यौन अंगों और वीर्य का कारक शुक्र माना जाता है, ज्योतिष में आकर्षण और प्रेम वासना का प्रतीक शुक्र है इसलिए शुक्र से विवाह या पत्नी के लिए देखा जाता है। शुक्र ग्रह की अनुकूलता से व्यक्ति भौतिक सुख पाता है। शुक्र सुख, उपभोग, विलास और सुंदरता के प्रति आकर्षण पैदा करता है। यौन रोग में हीरा, रत्न धारण करना भी लाभप्रद रहता है। *शुक्र बलवान होने से व्यक्ति को स्त्री सुख/सैया सुख प्राप्त होता है ,प्रेम विवाह में सफलता का भी योगदान शुक्र के द्वारा होता है अतः शुक्र बलवान अवश्य करना चाहिए अगर इन की चाहत है
*क्योंकि शुक्र ग्रह के बारे में पूछा है इसलिए स्त्रियों से शुक्र ग्रह का संबंध,यौन सुख से शुक्र का संबंध,प्रेम विकास शुक्र का संबंध के विषय में लिखा गया है *जैसे कक्षाओं में यौन शिक्षा अनिवार्य करी गई है,उसको पढ़ने में कोई बुराई नहीं होती है /बुरा नहीं मानना चाहिए उसी प्रकार शुक्र की जानकारी देने में अथवा पढ़ने में कोई बुरे विचार नहीं करना चाहिए।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।

