ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 24 अगस्त 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 24 अगस्त 2024
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 07:52 AM तक उपरांत षष्ठी तिथि 05:31 AM तक उपरांत सप्तमी
📝 तिथि स्वामी – पंचमी तिथि के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अश्विनी 06:05 PM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। और इसके देव अश्विनी हैं। अश्विनी ग्रहों के राजा सूर्य के पुत्र अश्विनी कुमार हैं,
⚜️ योग – वृद्धि योग 03:06 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
प्रथम करण : तैतिल – 07:51 ए एम तक गर – 06:37 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 05:30 ए एम, अगस्त 25 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:27 ए एम से 05:11 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:49 ए एम से 05:55 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:49 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:32 पी एम से 03:24 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:51 पी एम से 07:13 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:51 पी एम से 07:58 पी एम
💧 अमृत काल : 11:26 ए एम से 12:55 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अगस्त 25 से 12:46 ए एम, अगस्त 25
💮 रवि योग : 06:05 पी एम से 05:56 ए एम, अगस्त 25
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में सात बादाम चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – मूल समाप्त/शुक्र गोचर/वाहन क्रय/ श्री माधवदेव तिथि (असम)/ बलराम जयंती / नाग पंचमी (भाद्रपद माह) / कोलकाता वर्षगांठ दिवस, समाजसुधारक रामकृष्ण गोपाल भंडारकर स्मृति दिवस, सद्भावना दिवस, अंतर्राष्ट्रीय विचित्र संगीत दिवस, क्रांतिकारी शहीद स्वतंत्रता सेनानी राजगुरु जयन्ती, भूतपूर्व मंत्री, अरुण जेटली स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu tips_ 🗽
वास्तु शास्त्र के अनुसार बेल और लताओं को घर के मुख्य द्वार पर लगाना भी फलदायी नहीं होता है। बेल या लताओं को बगीचे में, अपने स्वतंत्र सहारे के साथ उगाया जा सकता है।
मनी प्लांट एक लता है, लेकिन इसे घर के अंदर ही उगाना चाहिए। मनी प्लांट वास्तु के अनुसार इसे बाहर नहीं उगाना चाहिए, बल्कि किसी पेड़ का सहारा लेना चाहिएं
वास्तु शास्त्र एवं उसके प्रभाव का उल्लेख मत्स्य पुराण में भी मिलता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार बेल और लताओं पर शुक्र का प्रभाव होता है। इसीलिए इन्हें घर के दक्षिण पूर्व भाग में खाली स्थान में लगाना चाहिए। पेड़ या किसी अन्य चीज के सहारे इन्हें ऊपर चढ़ाया जा सकता है।
सुगंधित फूल दक्षिण-पूर्वी भाग यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में भी लगाए जा सकते हैं, क्योंकि इनका स्वामी ग्रह भी शुक्र है। मनी प्लांट की तरह ही अन्य लताओं या बेलों को भी पूर्वोत्तर दिशा मेइन में नहीं लगाया जाना चाहिए।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हर बार नहाते वक्त पेशाब आने के कई संभावित कारण हो सकते हैं:
रिलेक्सेशन का प्रभाव: नहाते वक्त आराम और गर्म पानी की वजह से शरीर रिलेक्स हो जाता है, जिससे मूत्राशय पर दबाव कम हो सकता है और पेशाब की इच्छा हो सकती है।
गर्म पानी का प्रभाव: गर्म पानी का उपयोग मूत्राशय की मांसपेशियों को संकुचित कर सकता है, जिससे पेशाब की इच्छा हो सकती है।
सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया: नहाते समय पानी के संपर्क में आने पर शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है, जिससे मूत्राशय पर दबाव बढ़ता है और पेशाब आ सकता है।
मूत्राशय की संवेदनशीलता: कुछ लोगों का मूत्राशय गर्म पानी या नहाने के अन्य शारीरिक अनुभवों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है।
पानी की मात्रा: अगर आप नहाने से पहले अधिक पानी पीते हैं, तो नहाते वक्त पेशाब आने की संभावना बढ़ सकती है।
🍻 आरोग्य संजीवनी 🍺
सूजन कम करने में सहायक: भिंडी की जड़ में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह गठिया और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है: भिंडी की जड़ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है। यह कब्ज, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: भिंडी की जड़ में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। यह आपको कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है।
त्वचा के लिए लाभदायक: भिंडी की जड़ का उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे मुंहासों, दाग-धब्बों और त्वचा की जलन को कम करने के लिए किया जा सकता है।
भिंडी की जड़ का उपयोग कैसे करें:
भिंडी की जड़ को सुखाकर पाउडर बना लें और इसे गर्म पानी के साथ मिलाकर सेवन करें।
भिंडी की जड़ को उबालकर इसका काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।
भिंडी की जड़ का लेप बनाकर त्वचा पर लगा सकते हैं।
👉🏽 ध्यान दें:
भिंडी की जड़ का सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
📖 गुरु भक्ति योग
🕯️
एक गाँव में एक बहुत आलसी आदमी रहता था.वह कुछ काम-धाम नहीं करता था. बस दिन भर निठल्ला बैठकर सोचता रहता था।
एक दिन वह यूंही घूमते-घूमते आम के एक बाग़ में पहुँच गया. वहाँ रसीले आमों से लदे कई पेड़ थे. रसीले आम देख उसके मुँह में पानी आ गया और आम तोड़ने वह एक पेड़ पर चढ़ गया.लेकिन जैसे ही वह पेड़ पर चढ़ा तभी उसकी नज़र एक लोमड़ी पर पड़ी.उस लोमड़ी की एक टांग टूटी हुई थी और वह लंगड़ाकर चल रही थी.
लोमड़ी को देख आलसी आदमी सोचने लगा कि ऐसी हालत में भी इस जंगली जानवरों से भरे जंगल में ये लोमड़ी बच कैसे गई? इसका अब तक शिकार कैसे नहीं हुआ
कुछ ही पल बीते थे कि पूरा जंगल शेर की भयंकर दहाड़ से गूंज उठा जिसे सुनकर सारे जानवर डरकर इधर उधर भागने लगे. लेकिन लोमड़ी अपनी टूटी टांग के साथ भाग नहीं सकती थी. वह वहीं खड़ी रही.।शेर लोमड़ी के पास आने लगा. आलसी आदमी ने सोचा कि अब शेर लोमड़ी को मारकर खा जायेगा.लेकिन आगे जो हुआ, वह कुछ अजीब था.
शेर लोमड़ी के पास पहुँचकर खड़ा हो गया. उसके मुँह में मांस का एक टुकड़ा था, जिसे उसने लोमड़ी के सामने गिरा दिया. लोमड़ी इत्मिनान से मांस के उस टुकड़े को खाने लगी. थोड़ी देर बाद शेर वहाँ से चला गया.।
यह घटना देख आलसी आदमी सोचने लगा कि भगवान सच में सर्वेसर्वा है. उसने धरती के समस्त प्राणियों के लिए, चाहे वह जानवर हो या इंसान, खाने-पीने का प्रबंध कर रखा है. वह अपने घर लौट आया.।
घर आकर वह 2-3 दिन तक बिस्तर पर लेटकर प्रतीक्षा करने लगा कि जैसे भगवान ने शेर के द्वारा लोमड़ी के लिए भोजन भिजवाया था. वैसे ही उसके लिए भी कोई न कोई खाने-पीने का सामान ले आएगा.।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. भूख से उसकी हालात ख़राब होने लगी. आख़िरकार उसे घर से बाहर निकलना ही पड़ा.
घर के बाहर उसे एक पेड़ के नीचे बैठे हुए बाबा दिखाए पड़े. वह उनके पास गया और जंगल का सारा वृतांत सुनाते हुए वह बोला, “बाबा जी! भगवान मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? उनके पास जानवरों के लिए भोजन का प्रबंध है. लेकिन इंसानों के लिए नहीं.”।
बाबा जी ने उत्तर दिया, “बेटा! ऐसी बात नहीं है. भगवान के पास सारे प्रबंध है. दूसरों की तरह तुम्हारे लिए भी. लेकिन बात यह है कि वे तुम्हें लोमड़ी नहीं शेर बनाना चाहते हैं.”।
याद रखें क्योंकि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि…
सकल पदारथ एहि जग माहीं। करमहीन नर पावत नाहीं। ‘
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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