ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 16 जून 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 16 जून 2024
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – ग्रीष्म ऋतु
🌤️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 04:43 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी : दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है। यह सौम्य अर्थात शांत तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 11:12 AM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है।हस्त के नक्षत्र मंडल का स्वामी देवता है सवितृ अर्थात् सूर्य देवता हैं।
⚜️ योग – वरीयान योग 09:02 PM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : तैतिल – 03:41 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 04:43 ए एम, जून 17 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:50 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:20 पी एम से 07:40 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:21 पी एम से 08:21 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:23 ए एम से 11:13 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, जून 17 से 12:42 ए एम, जून 17
❄️ रवि योग : पूरे दिन
💦 अमृत सिद्धि योग : 05:23 ए एम से 11:13 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-ईलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-किसी पवित्र नदी में कलावे की बाती से दीपदान करें।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अमृतसिद्धि योग/सर्वार्थसिद्धि योग/श्री गंगा दशहरा, ताजा सब्जी दिवस है, अंतर्राष्ट्रीय पारिवारिक धन प्रेषण दिवस, ब्लूम्स दिवस, विश्व रिफिल दिवस, अंतर्राष्ट्रीय अफ्रीकी बाल दिवस, युवा दिवस, गुरु अर्जन देव शहीदी दिवस, राष्ट्रीय टर्की प्रेमी दिवस, भारतीय स्वाधीनता सेनानी देशबंधु चितरंजन दास स्मृति दिवस, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती जन्म दिवस, ताजा सब्जी दिवस है, अंतर्राष्ट्रीय पारिवारिक धन प्रेषण दिवस, ब्लूम्स दिवस, विश्व रिफिल दिवस, अंतर्राष्ट्रीय अफ्रीकी बाल दिवस, फादर्स डे ( Fathers Day )
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗼 Vastu tips
जीवनसाथी से सुख प्राप्ति के घरेलू उपाय
ये दोष एक बहुत बडा कारण रहता है कि कमरे की दक्षिण और दक्षिण – पूर्व दिशा से सम्बन्धी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यदि इस दिशा में कोई खिडकी या दरवाज़ा है तो यहाँ से energy leakage होना जीवन में romance को कम करता है। इस दिशा में ऊचे पहाडो की तसवीर लगा सकते हैं, खास कर south – east में red या orange color होना चाहिए, pink color का भी इसतेमाल किया जा सकता है। कमरे का यह हिस्सा relationship को growth देता है। और इस दिशा में दोश होने से ग्रहस्थ जीवन में कलेश रहता है, कहासुनी होती है, gf / bf से झगडे होते हैं बिना किसी बात पर breakup हो जाता है। इस लिए इस दिशा को बन्द रखना चाहिए। कुण्डली का 11वा भाव दूशित होगा तो ये तय है इस दिशा में दोष होगा, शुक्र से 4th भाव में कोई पापी ग्रह है तो भी इस दिशा में दोष होगा।
कमरे की उतर और उतर – पूर्व दिशा भी बहुत महत्वपूर्ण है, यह दिशा पिछली बातो को भुला कर रिश्ते को नयापन देती है। इस दिशा में दोष होने पर couple एक दूसरे की बीती हुई बातो को लेकर निन्दा करते रहते हैं , जो रिश्ते में नयापन नहीं आने देता।इस दिशा को हवादार होना, खिडकी – दरवाज़े, झरने वाली तसवीर, स्वछ पानी से भरा कटोरा इस दिशा में होने चाहिए। Energy blocks यानि कि खिडकी ना होने से एक दूसरे को माफ़ ना करने की भावना आती है, जिस से रिश्तो में खटास आती है। कुण्डली के 3rd भाव में, नवमान्श कुण्डली के 9th भाव में, गुरु से 4th भाव में पापी ग्रह होने से ये तय है इस दिशा में दोष होगा।
बैड के नीचे मिट्टी होने से, नियमित सफ़ाई ना होने से, जूते – चप्पल , झाड़ू आदि होने से, किसी भी तरह का कबाड होने से, यह स्थिति directly relationship को प्रभावित करती है। ऐसी स्थिति में जीवनसाथी, gf / bf से धोखा मिलता है , जीवन साथी का शारीरिक सुख प्राप्त नहीं होता। कुण्डली में 6th भाव पर बुरा प्रभाव होने से, केतु से 4th भाव में बुरा प्रभाव होने से, नवमान्श कुण्डली के 12वे भाव में बुरे ग्रह होने से ये तय है बिसतर के नीचे कबाड रहेगा, और जीवनसाथी का सुख प्राप्त करने में बाधा आयेगी। इस लिए बिसतर के नीचे नियमित सफ़ाई करनी चाहिए।
🗝️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
खाने के बाद नींद भगाने के लिए क्या करें अगर दोपहर में खाने के बाद आपको ऑफिस में काम करते वक्त तेज नींद आती है तो इसके लिए जरूरी है कि आप दिन में हल्का खाना खाएं। खाने में ज्यादा से ज्यादा फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करें। रात में भरपूर नींद लें और एक्सरसाइज करें। खूब पानी पिएं और तुरंत चाय-कॉफी पीने से बचें। खाना खाने के बाद 10 मिनट की वॉक जरूर करें। खाने के आधा घंटे बाद पानी पिएं। अगर नींद आए तो आंखों पर पानी के झींटे मारें और थोड़ा घूम लें। इससे आपकी नींद चली जाएगी। खाने के बाद सौंफ या किसी दूसरे माउथ फ्रेशनर का उपयोग करें। रोजाना एक समय पर ही भोजन करें। खाने की मात्रा भूख से हमेशा कम रखें।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
गिलोय रस – गिलोय की पत्तियाँ एंटिओक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं जो की फ्री रैडिकल से हमें प्रोटेक्ट करते और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। यह बुखार को कम करने में सहायक है और पुराने दीर्घकालिक चिकनगुनिया और डेंगू में भी प्रभावी है। यह हमारे प्लेटलेट्स काउंट को डेंगू और चिकनगुनिया जैसे बुखार में प्रभावी रूप से बढ़ाता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष …….
जे कृष्णमूर्ति ने इस अवस्था को बिना नाम लिए अन्तः प्रस्फुटन inner flowering कहा है। कुछ ऐसा इस पाटल पुष्प जैसा।
◆तैत्तरीय उपनिषद वल्ली 2 ,अनुवाक 9 ,का बहुत प्रसिद्ध छंद है जिसमें ऐसे आत्मज्ञानी ऋषिकी स्थिति इस प्रकार से कही गई है : यतो वाचोनिवर्तन्ते ,अप्राप्य मनसा सह …(छंद 1 ):मन के सहित इन्द्रियाँ उसे न पाकर जहाँ से लौट आती हैं —उस ब्रह्म के आनंद को जानने वाला पुरुष भय रहित हो जाता है.
●इसी उपनिषद की वल्ली 3,अनुवाक 10 में आत्मबोध को प्राप्त ऋषि कहते है : हाहाहा बु ..अहमन्न .आश्चर्य आश्चर्य .मैं अन्न हूँ ,…मै ही अन्न का भोक्ता हूँ , ….मैं ही इन दोनों का संयोग करने वाला हूँ …मैं ही ही प्रथम उत्पन्न हिरण्यगर्भ,मैं ही देवताओं से पूर्व विद्यमान अमृत नाभि हूँ , मैं समस्त ब्रह्माण्ड का तिरस्कार करता हूँ ,मेरे प्रकाश की एकझलक सूर्य के समान है … (अर्थ गीता प्रेस के अनुसार )
◆यदि किसी के सम्बन्ध में यह प्रचलित हो कि अमुक व्यक्ति बड़ाआत्मज्ञानी है तो उसकी •पहली पहचान है उसका सबके प्रति समान प्रेम भाव का होना है .
●यदि वह गम्भीर मुद्रा में रूखा सा, ज्ञान के घमण्ड में दीखता है तो उसे शास्त्र ज्ञान तो होगा पर आत्म ज्ञान नहीं होगा।
◆पर कभी कभी आत्मज्ञानी अपने को छुपाने के लिए अ-सामान्य सा व्यवहार भी करते दिखते हैं ताकि उनकी साधना में माँगने वालों की भीड़ के कारण व्यवधान नहीं पड़े.
◆आत्म ज्ञान की उच्चतम अवस्था में शरीर के प्रति मोह नहीं रहता इसलिए ऐसे महापुरुष कोई आदत भी शरीर को बनाए रखने के लिए बना लेते हैं.
●उनके कर्म बीज अर्थात ऐसे समस्त संचित कर्म जो अगले जन्म का कारण बनते रहते हैं -दग्ध हो जाते हैं , नष्ट हो जाते हैं इसलिए ऐसे आत्म ज्ञानी का जन्ममरण चक्र टूट जाता है
◆परन्तु जिस प्रारब्ध से यह शरीर ,आयु और भोग मिला है ऐसे प्रारब्ध कर्म जब तक भोग नहीं लिए जाते है नष्ट नहीं होते इसलिए उनका शरीर बना रहता है और कोई कर्मज रोग आदि हैं तो वे सब भी ऐसे आत्म ज्ञानीतटस्थ भाव से भोगते हैं , उनके भुक्त हो जाने पर ऐसे शीर्ष पुरुष देह त्याग देते हैं।
●ऐसे आत्मबोध को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा की स्थिति क्या होती है , इस पर सांख्य , योग वेदांत आदि छह दर्शनों में थोड़ा बहुत अंतर है जो वेदान्त दर्शनकी द्वैत अद्वैत विशिष्ट अद्वैत व्याख्याओं में,अलग अलग ढंग से बताया गया है .जिसको जो मत मान्य है उसे अपना मत ही अधिक समझ आएगा इसलिए इस पर अधिक दार्शनिक चर्चा यहाँ अनावश्यक है
★जिन सिद्ध योगी ,ज्ञानी , भक्त का चरित वर्तमान समय में पढने देखने में सामान्य जन के अनुभव में आता है वह कुछ ऐसा ही होता है जैसा कि अभी कहा गया है।
◆परमहंस योगानंद , राम कृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, देवरह बाबा, महाराष्ट्र एवं दक्षिण भारत के कुछ सन्त इसी आत्म बोध को प्राप्त महापुरुष थे ,ये कुछ उदाहरण मात्र हैं.
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

Related Articles

Back to top button