
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 16 नवम्बर 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 *रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें। *इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
*रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें । *रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 04:47 AM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 02:11 AM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। और इसकी राशि कन्या है, जिसके स्वामी बुध हैं।
⚜️ योग – विष्कुम्भ योग 06:46 AM तक, उसके बाद प्रीति योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 03:40 पी एम तक
✨ द्वितीय करण: तैतिल – 04:47 ए एम, नवम्बर 17 तक गर
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:23:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:10:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:58 ए एम से 05:51 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:25 ए एम से 06:45 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:27 पी एम से 05:54 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:27 पी एम से 06:47 पी एम
💧 अमृत काल : 07:32 पी एम से 09:18 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:33 ए एम, नवम्बर 17
🌸 द्विपुष्कर योग : 02:11 ए एम, नवम्बर 17 से 04:47 ए एम, नवम्बर 17
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:45 ए एम से 02:11 ए एम, नवम्बर 17
🌊 अमृत सिद्धि योग : 06:45 ए एम से 02:11 ए एम, नवम्बर 17
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अमृत सिद्धि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ द्विपुष्कर योग/ उत्पन्ना एकादशी व्रत पारण/ सूर्य देवता तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश/ राष्ट्रीय प्रेस दिवस, अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस, माता वीरांगना ऊदा देवी पासी जी जयन्ती, राष्ट्रीय इंडियाना दिवस, सैयद अकबर हुसैन, शंभू महाराज जयन्ती, मिहिर सेन जन्म दिवस, पुलेला गोपीचंद जन्म दिवस, आदित्य रॉय कपूर जयन्ती, पासी’ जाति से सम्बंधित वीरांगना उदा देवी स्मृति दिवस, अभिनेता आदित्य रॉय कपूर जन्म दिवस, प्रसिद्ध भारतीय क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा पुण्य तिथि, पंडितराव अगाशे स्मृति दिवस, राष्ट्रीय बटन दिवस, राष्ट्रीय पुस्तक दिवस (सप्ताह), नवजात शिशु दिवस (सप्ताह)
✍🏼 *तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है। 🏘️ *Vastu tips* 🏚️
अगर आप दाम्पत्य संबंधों में मजबूती लाना चाहते हैं, तो रविवार के दिन आपको आम के दो फल लेकर, उन पर एक साथ मौली लपेटनी चाहिए और उन्हें विष्णु भगवान के चरणों में अर्पित करना चाहिए। साथ ही भगवान का आशीर्वाद लेना चाहिए। ऐसा करने से आपके दाम्पत्य संबंधों में मजबूती आएगी।
*व्यवसायिक लाभ और वित्तीय स्थिति सुधारें अगर आप अपनी व्यवसायिक यात्रा से अर्थ लाभ पाना चाहते हैं, अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर करना चाहते हैं, तो रविवार के दिन एक केसर की डिब्बी लेकर, उसे भगवान विष्णु के चरणों से लगाकर अपने पास रख लें और जब कभी आप किसी व्यवसायिक यात्रा से बाहर जायें, तो उस केसर से अपने माथे पर तिलक लगाकर जाए।वहीं, अगर आप केसर ना ले सकें, तो आप एक डिब्बी में सुखी हल्दी ले लें। रविवार के दिन ऐसा करने से आपको व्यवसायिक यात्राओं से अर्थ लाभ जरूर मिलेगा। लिहाजा आपकी फाइनेंशियल कंडिशन बेहतर होगी। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ मकरध्वज वटी एक विशेष आयुर्वेदिक औषध है । शरीर में रक्त का परिमाण कम हो तो रक्त बृद्धि केलिए और लीवर के औषध के रूप में भी मकरध्वज वटी प्रयोग किया जाता है । शरीर में रक्त बृद्धि केलिए मकरध्वज वटी चिकित्सक के द्वारा दिए गए मात्रानुसार लेकर खलबट्टा में मधु के साथ अच्छी तरह पीसकर उसमें एक चम्मच मक्खन ( आमुलवाला मक्खन नहीं । घर में दुध गरम करने के बाद जो मक्खन दिखाई पड़ता है वह मक्खन ) मिलाकर फिर से अच्छी से पीसकर खाया जाता है और लीवर ठीक करने केलिए मक्खन के जगह केवल आमरुल शाग वह भी एक चम्मच और कले के पत्ते पर भुना हुआ अच्छी तरह से पीसकर खाया जाता है । इससे भुख ना लगना , लीवर के रोग आदि ठीक हो जाता है किन्तु सबकुछ चिकित्सक को पुंछकर ही खाना चाहिए। 🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
थकान बने रहने के निम्न कारण हो सकते हैं-
*डायबिटीज- रक्त में ग्लूकोज की अधिक मात्रा थकान बने रहने का कारण बनती है। *थाइराइड- यदि थायराइड जनक बीमारी है तो भी थकान बनी रहती है।
*हीमोग्लोबिन- रक्त में हीमोग्लोबिन कम होने पर शरीर को ऊर्जा एवं ऑक्सीजन की पूर्ति ठीक से न होने के कारण थकान बनी रहती है। *पानी की कमी- यदि पानी उचित मात्रा में न पिया जाए तो भी कमजोरी महसूस होती है।
*कमजोर पाचनतंत्र- पाचन सम्वन्धी समस्या के कारण भी थकान व कमजोरी बनी रहती है। *हृदय सम्बन्धी रोग- हार्ट में ब्लॉकेज शुरू होने पर हार्ट को खून बराबर नहीं मिल पाता है। इससे थकान बनी रहती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
हिंदू धर्म का महान ग्रंथ रामायण में, मात्र श्री राम जी के जीवन की गाथा नहीं है, बल्कि इस अद्भुत ग्रंथ में इतनी रहस्यमई बाते भरी पड़ी है कि इन बातों को ध्यान से देखा जाए दिमाग हैरानी से भर जाता हैं।
*रामायण के पात्रों में दो महान ऋषियों की गाथा बार-बार आती है। ऋषि विश्वामित्र और ऋषि वशिष्ठ। दोनों को महर्षि की उपाधि मिली हुई हैं। महर्षि वशिष्ठ एक ऋषि ही है। लेकिन महर्षि विश्वामित्र पहले एक राजा थे और बाद में वो ऋषि और फिर महर्षि बने।
*महर्षि वशिष्ठ के पास योग साधना से बहुत सारी शक्तियां है। उनकी शक्तियों से प्रभावित होकर ही राजा विश्वामित्र योग साधना की तरफ मुड़ गए थे।दोनों में कई बार आमने सामने की लड़ाई होती है। ब्रह्मास्त्र का भी प्रयोग होता है। ब्रह्मास्त्र हिन्दू ग्रंथों का और प्राचीन भारत का सबसे बड़ा विनाशक शस्त्र माना गया है। *महर्षि विश्वामित्र ने बड़ी तपस्या और मेहनत ब्रह्मास्त्र अर्जित किया और उन्होंने सोचा कि वो अब गुरु वशिष्ठ को हरा कर उन्हें नीचा दिखा सकेंगे। लेकिन गुरु वशिष्ठ एक बहुत ही गहरे ऋषि है। उनके पास बहुत सारी ऐसी शक्तियां है जिन्हें वो आमतौर पर प्रदर्शित नहीं करते लेकिन समय आने पर वो उनका प्रयोग करके उन शक्तियों को सम्मान देते रहे है।
*बाल्मीकि रामायण के 55वें, 56वें सर्ग में जब महर्षि विश्वामित्र ऋषि वशिष्ठ के आश्रम पर ब्रह्मशास्त्र से आक्रमण करते है। विश्वामित्र सोच रहे है कि वो इस बार अपने ब्रह्मास्त्र से महर्षि वशिष्ठ को हरा ही देंगे। लेकिन होता उस से उलट है। *जैसे ही आश्रम पर विश्वामित्र हमला करते है तो एक बार उथल पुथल मच जाती है। पशु पक्षी तक भयभीत होकर विभिन्न दिशाओं में भागने लगते है और आश्रम 2 घड़ी में ही सुना हो जाता है। लेकिन वशिष्ठ शांत है और आत्मविश्वास से भरे शब्दों में कहते है कि – डरो मत, भागो मत, मैं अभी इस गाधिपुत्र (विश्वामित्र) को नष्ट किए देता हूं। ठीक उसी तरह जैसे सूर्य कुहासे को मिटा देता है।
*उधर विश्वामित्र ब्रह्मास्त्र छोड़ चुके है। तभी वशिष्ठ अपना ब्रह्मदंड निकालते है। यह यमदंड के समान एक डंडे के रूप का एक अस्त्र होता है। कुछ ही क्षणों वशिष्ठ जी ने अपने ब्राह्मतेज के प्रभाव से भयंकर ब्रह्मास्त्र को भी ब्रह्मदंड से शांत कर दिया। महाबली विश्वामित्र गुरु वशिष्ठ से फिर से पराजित हो गए। *पराजित होने के बाद पराजित विश्वामित्र ने जानते है क्या कहा? – क्षत्रिय के बल को धिक्कार है। ब्राह्मतेज से प्राप्त होने वाला बल ही वास्तव में बल है, क्योंकि आज एक ब्रह्मदंड ने मेरे सभी अस्त्र नष्ट कर दिए।
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।



