ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 22 मार्च 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 22 मार्च 2026
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 09:16 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र भरणी 10:42 PM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। तथा भरणी नक्षत्र के देवता यमराज (यमदेव) हैं। उन्हें मृत्यु, धर्म और न्याय के देवता के रूप में जाना जाता है।
⚜️ योग – वैधृति योग 03:41 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : वणिज 10:37 AM तक
द्वितीय करण : विष्टि 09:17 PM तक, बाद बव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:09:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:10:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:36 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:12 ए एम से 06:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:04 पी एम से 12:53 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:32 पी एम से 06:56 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:33 पी एम से 07:44 पी एम
💧 अमृत काल : 06:17 पी एम से 07:46 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, मार्च 23 से 12:51 ए एम, मार्च 23
❄️ रवि योग : 06:23 ए एम से 10:42 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वासुदेव चतुर्थी/ श्रीगणेश चतुर्थी व्रत/ भद्रा/ रवि योग/ ज्वालामुखी योग/ स्वतंत्रता सेनानी हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मृति दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी चिन्तामणी पानिग्रही जयन्ती, भारतीय शास्त्रीय संगीतकार रागिनी त्रिवेदी जन्म दिवस, वीर बलिदानी भगत सिंह के बलिदान दिवस, समाज सुधारक मुंशी दयानारायण निगम जयन्ती, भारतीय उद्योगपति सुन्दरम अयंगर जन्म दिवस, प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी सूर्य सेन जयन्ती, बिहार दिवस, विश्व जल दिवस (World Water Day)
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🗼 Vastu tips 🗽
तांबे के कछुए के फायदे: आर्थिक समृद्धि लाने में मदद करता है। नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सकारात्मक वातावरण बनाता है कार्यक्षेत्र में तरक्की और सफलता के रास्ते खोलता है।
*क्रिस्टल का कछुआ मन की शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। यह सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है। क्रिस्टल का कछुआ घर में एक खुशनुमा और सुखद वातावरण का निर्माण करता है। *कब लगाएं क्रिस्टल का कछुआ अगर आपकी मनोकामना मानसिक शांति, परिवार के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध और स्वास्थ्य से जुड़ी हो, तो क्रिस्टल का कछुआ पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। क्रिस्टल कछुआ को सोने के कमरे, बैठक कक्ष या आध्यात्मिक स्थान में रखने से मानसिक तनाव कम होता है और घर के सभी सदस्य खुशहाल रहते हैं। इसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए भी रखा जा सकता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दही खाने के फायदे चरक सूत्र अध्याय 27 श्लोक 225- 228 में दही के गुण बतलाये गए है। जोकि इस प्रकार है –
*यह रुचिकारक, अग्नि को बढ़ाने वाला, वीर्यवर्धक, स्निग्धता देने वाला, बलवर्धक, विपाक में अम्ल रस वाला, उष्णवीर्य, वातनाशक, मंगल ( शुभशकुन ) कारक तथा मांस तत्व को बढ़ाने वाला होता है। *वही पीनस ( प्रतिश्याय ) रोग में, अतिसार में, शीतज्वर में, विषमज्वर में, अरुचि में, मूत्रकृच्छ ( मूत्र के कष्ट से निकलने में ), और कृशता में दही का प्रयोग लाभदायक है।
*जबकि शरद, ग्रीष्म और वसंत ऋतुओं में प्रायः दही का सेवन ( उष्णवीर्य होने के कारण ) वर्जित है। जबकि ज्यादातर लोग दही को गर्मियों के दिनों में खाना अच्छा मानते है। जोकि पूणतः अन्याय संगत है। बल्कि दही के स्थान पर छाछ का प्रयोग न्याय संगत है। *अतः शेष तीन ऋतुओं ( हेमंत, शिशिर, और वर्षा ) में दही का सेवन लाभदायक होता है। रक्तपित्त तथा कफज विकारों में दही का सेवन अहितकर होता है। यह सब बाते नमक मिले दही पर लागू नहीं होती। बल्कि मीठा मिलाये गए या संस्कारित दही पर ही लागू होती है।
🩺 आरोग्य संजीवनी 🩸
जिन आयुर्वेदिक औषधियों में रससिन्दूर का प्रयोग होता है
आयुर्वेद में रससिन्दूर को कई प्रसिद्ध योगों में मिलाकर दिया जाता है, जैसे—म मकरध्वज
*
शरीर की शक्ति, ऊर्जा और वीर्यवर्धन के लिए प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि।
*योगेन्द्र रस*
*नसों की कमजोरी, पक्षाघात और तंत्रिका संबंधी रोगों में आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा उपयोग किया जाता है। *वसन्त कुसुमाकर रस* *मधुमेह, शारीरिक कमजोरी तथा शरीर की शक्ति बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध औषधि।
*स्वर्ण मालिनी वसन्त रस*
*रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा पुरानी बीमारियों में सहायक मानी जाती है। *इन सभी औषधियों में रससिन्दूर अत्यन्त कम मात्रा में मिलाया जाता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
🌸 जब ब्रह्मा और शिव बने बरगद के पेड़: तिरुपति बालाजी के ऋण और विवाह की अद्भुत कथा! 🌸
क्या आप जानते हैं कि तिरुपति बालाजी में हर साल करोड़ों रुपये का जो दान आता है, वह दरअसल भगवान विष्णु द्वारा लिया गया एक ‘ऋण’ चुकाने के लिए है? और इस ऋण के साक्षी स्वयं भगवान ब्रह्मा और शिव बने थे! आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से यह अत्यंत रोचक पौराणिक कथा:
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✨ भृगु ऋषि का परीक्षण और लक्ष्मी जी का क्रोध: एक बार सर्वश्रेष्ठ देव का निर्धारण करने के लिए भृगु ऋषि को परीक्षा का दायित्व मिला। उन्होंने ब्रह्मा और शिव जी को क्रोधित कर दिया। अंत में जब वे क्षीर सागर पहुंचे, तो उन्होंने सोते हुए श्री हरि विष्णु की छाती पर लात मार दी। क्रोधित होने के बजाय, विष्णु जी ने भृगु के चरण पकड़ लिए।
*यह देख माता लक्ष्मी को लगा कि उनके स्वामी ने अपने स्वाभिमान की रक्षा नहीं की। क्रोधित होकर उन्होंने बैकुंठ त्याग दिया और पृथ्वी पर तपस्या करने आ गईं। *🌺 श्रीनिवास और पद्मावती का मिलन: माता लक्ष्मी को ढूंढते हुए भगवान विष्णु ने भी साधारण मानव “श्रीनिवास” के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया। उधर, माता लक्ष्मी ने चोल राजा आकाशराज के यहाँ “पद्मावती” के रूप में जन्म लिया। एक दिन वन में शिकार के दौरान श्रीनिवास ने पद्मावती की रक्षा की और दोनों में प्रेम हो गया।
*💰 कुबेर से ऋण और देवों की गवाही: जब विवाह की बात पक्की हुई, तो साधारण मनुष्य का जीवन जी रहे श्री हरि के पास विवाह के लिए धन नहीं था। तब उन्होंने यक्षराज कुबेर से ऋण (Loan) लेने का निश्चय किया *शर्त यह तय हुई कि कलियुग के अंत तक भगवान श्रीनिवास (बालाजी) कुबेर को ब्याज सहित धन लौटाएंगे।
*लेकिन यह ऋण कौन चुकाएगा? भगवान ने कहा— “कलियुग में मेरे भक्त मुझसे ऐश्वर्य मांगेंगे, मैं उन्हें धनवान बनाऊंगा और बदले में वे अपनी श्रद्धा से जो दान देंगे, उसी से मैं कुबेर का ऋण चुकाऊंगा।” *🌳 ब्रह्मा और शिव बने साक्षी (बरगद के पेड़):कुबेर और श्रीनिवास के बीच हुए इस समझौते के साक्षी स्वयं भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव बने। आज भी तिरुपति में पुष्करिणी तीर्थ के किनारे ये दोनों देव ‘बरगद के पेड़’ के रूप में विराजमान हैं।
*_कहा जाता है कि जब निर्माण कार्य के लिए इन पेड़ों को काटने का प्रयास किया गया, तो इनमें से रक्त की धारा फूट पड़ी थी! तब से इन पेड़ों की भी देवता तुल्य पूजा होती है।
🙏 निष्कर्ष: श्रीनिवास और पद्मावती का विवाह देवों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। आज भी तिरुपति बालाजी मंदिर में भक्त जो दान देते हैं, वह उसी दिव्य ऋण को चुकाने की प्रक्रिया का हिस्सा है जो कलियुग के अंत तक चलता रहेगा।
।। श्री तिरुपति बालाजी की जय ।। 🚩
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

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