
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 19 फरवरी 2026
19 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि द्वितीय तिथि है। आज नवीन मत के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्म जयन्ती है। आज भगवान श्रीसूर्य देवता धनिष्ठा अक्षर से चलकर (रात्रि 10:24 PM पर) शतभिषा नक्षत्र में चले जाएंगे। आपसभी सा आप सभी सनातनियों को “छत्रपति श्रीशिवाजी महाराज जी के जन्म जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
*मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। *मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 03:59 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीय तिथि (दूज) के स्वामी ब्रह्मा जी हैं, जिन्हें विधाता भी कहा जाता हैं, इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 08:51 PM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्व भाद्रपद नक्षत्र के देवता वृहस्पति को माना जाता है। आम के पेड को पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का प्रतीक माना जाता है।
⚜️ योग – सिद्ध योग 08:42 PM तक, उसके बाद साध्य योग
⚡ प्रथम करण – कौलव 03:59 PM तक
✨ द्वितीय करण – तैतिल 03:21 AM तक, बाद गर
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:39:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:53:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05:41 मिनट से सुबह 06:32 मिनट तक
🌇 प्रातः सन्ध्या – सुबह 06:06 मिनट से सुबह 07:23 मिनट तक
🌟 अभिजित मुहूर्त – दोपहर को 12:38 मिनट से दोपहर को 13:23 मिनट तक
✡️ विजय मुहूर्त – दोपहर को 14:54 मिनट से दोपहर 15:39 मिनट तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:37 मिनट से शाम को 19:02 तक
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:39 मिनट से 19:55 शाम तक
💧 अमृत काल : दोपहर 30:30 मिनट से फरवरी 20 को शाम 08:16 बजे तक 🗣️ निशिता मुहूर्त- शाम 24:35 मिनट से शाम 25:26 तक
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ आडल योग/ विडाल योग/ फुलेरा दोज (स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त)/ श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती/ पंचक जारी/ मेला श्याम बाबा खाटू 10 दिन का प्रारंभ (राज.)/ गोपाल कृष्ण गोखले पुण्य दिवस/ रोजा शुरु (मु,)/महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती/ दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन तुग़लक़ स्मृति दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट मिंट दिवस, राष्ट्रीय अरेबियन हॉर्स दिवस, राष्ट्रीय पशु चिकित्सक गर्ल्स राइज दिवस, राष्ट्रीय लैश दिवस, राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन जयन्ती, हिंदी प्रकाशक मुंशी नवलकिशोर पुण्य तिथि, प्रसिद्ध गायक पंकज मलिक स्मृति दिवस, अभिनेत्री सोनू वालिया जन्म दिवस, पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह जन्म दिवस, बड़ौदा की राजकुमारी इंदिरा राजे जन्म दिवस, अभिनेता निर्मल पांडे पुण्य तिथि
✍🏼 तिथि विशेष – द्वितीय तिथि को कटोरी फल का तथा तृतीया तिथि है नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। द्वितीय तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीय तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी को बताया गया है। यह द्वितीय की तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीय तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
घर का दर्पण, खिड़की का शीशा या कोई भी कांच अगर टूट जाए, तो उसे लंबे समय तक घर में न रखें। टूटे शीशे को शुक्र ग्रह से संबंधित माना गया है। ऐसे कांच घर में नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं। माना जाता है कि टूटा शीशा आपकी आर्थिक स्थिति और रिश्तों पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।
टूटे बर्तन: आती है दरिद्रता ज्यादातर लोग चिटके हुए बर्तनों का बेझिझक इस्तेमाल करते हैं, लेकिन किचन में रखे टूटे बर्तन घर की समृद्धि को प्रभावित करते हैं। इसमें खाना बनाना या खाना दोनों ही वास्तु के अनुसार अशुभ है। माना जाता है कि टूटे बर्तनों की वजह से घर में दरिद्रता प्रवेश करती है और अन्नपूर्णा की कृपा कम हो जाती है।
*टूटा पलंग: बिगाड़ता है दांपत्य जीवन अगर पति-पत्नी टूटे हुए पलंग पर सोते हैं, तो वास्तु के हिसाब से इसे अशुभ माना जाता है। यह उनके रिश्ते में कड़वाहट, तनाव और कलह ला सकता है। ऐसा माना जाता है कि टूटा फर्नीचर सकारात्मक ऊर्जा को रोक देता है और वैवाहिक जीवन में बाधाएं पैदा करता है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ अगर आपको गर्दन में दर्द है तो धीरे-धीरे हाथ में बढ़ रहा है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। दर्द अगर 1-2 दिन में सही नहीं होता है तो डॉक्टर को दिखाएं। ऐसे में दर्द बढ़ाने वाली एक्टिविटीज जैसे एक्सरसाइज करना, जिम करना या फिर डांस या कोई भी एक्सट्रीम मूवमेंट्स नहीं करें। अगर आपको दवा लेने की जरूरत पड़ रही है तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न खाएं। फिजियोथेरेपी से मिलेगा आराम इस दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए आपको दवा खानी पड़ेगी, लेकिन लंबे समय दर्द को दूर करने के लिए फिजियोथेरेपी की मदद लें। इसमें आपको गर्दन की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, पॉश्चर करेक्शन जैसी बातें बताई जाएंगी, जिससे काफी आसाम मिलेगा। कुछ समय के लिए सर्वाइकल कॉलर भी पहना जा सकता है जो आपको सपोर्ट देगा और इस दर्द को कम करने में मदद करेगा। 🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
🔅गर्मी में लू लगने पर मेथी की सुखायी हुई भाजी को ठंडे पानी में भिगोकर रखें। अच्छी तरह से भीगने पर मसलकर, छानकर उसका पानी पीने से लाभ होता है
*🔅आँव के लिए मेथी की भाजी का 50 मि.ली. रस निकालकर उसमें छः ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें अथवा 20 ग्राम सूखी मेथी के पाउडर को 40 ग्राम दही में मिलाकर लें।
🔅बहुमूत्र के लिए मेथी की भाजी का 100 ग्राम रस निकालें। उसमें 1.5 ग्राम कत्था एवं 3 ग्राम मिश्री डालकर पीयें।
*रक्तातिसार 40 मि.ली. मेथी की भाजी के रस में 20 ग्राम काली द्राक्ष डालकर पीयें। पायरिया भिगोयी हुई मेथी को मिश्री के साथ खायें।
*🔅डायबिटीज 10 ग्राम मेथी को 100 मि.ली. पानी में भिगोकर सुबह उस मेथी को मसलकर मेथी खा लें एवं वही पानी पी लें।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ एक गुरू जी के दो चेले थे। साथ ही रहते, साथ ही खाते। चेले क्या थे बवाल ही थे। “काम के ना काज के। दुश्मन अनाज के॥” *एक बार सर्दियों की आधी रात को गजब की वर्षा आई। बाहर ही बंधी गाय भीगी तो रंभाने लगी। गुरू जी की नींद टूट गई, चेलों से कहा- चेला! जाओ गाय खोल कर भीतर ले आओ।
*दोनों एक स्वर में बोले- गुरू जी! जो खुद बंधा हो, वह दूसरे को मुक्त कैसे करे? बंधन खोलना तो आप जैसे मुक्त महापुरुषों का काम है। *गुरू जी स्वयं ही उठे। गाय का बंधन खोल भीतर ले आए। शरीर सुखा कर, गुरू जी लेटे और विचार करने लगे कि कैसे इन्हें बदला जाए।
*अगली सुबह, गुरू जी रोज की ही तरह पूजा करने के लिए अपने तख्त पर बैठ गए। पूजा शुरू की तो बोले- ओह! तुलसी के पत्ते लाना तो मैं भूल ही गया। चेला! जाओ बाहर से तुलसी के दो पत्ते ले आओ। *अब सुबह का वक्त था, हलकी बूंदाबाँदी अभी भी हो रही थी और ठंड कड़ाके की थी। तुलसी का पौधा लगा था बगीचे के अंतिम छोर पर। दोनों चेले पहले ही कंबल औढ़े दाँत किटकिटा रहे थे, तुलसी के पत्ते कौन लाता? और दोनों एक से बढ़कर एक चालाक और कामचोर।
*पहला बोला- गुरू जी! तुलसी का पौधा कैसा होता है मैं नहीं जानता। आप पहचान बता दें तो मैं ले आऊँ। गुरू जी ने कहा- अच्छा तो तुम तुलसी का पौधा नहीं जानते। *दूसरा समझ गया कि अब मुझे ही कहा जाएगा। वह तुरंत पहले वाले से बोला- अरे मूर्ख! तूं तुलसी का पौधा नहीं पहचानता? तूने कभी तुलसी के पत्ते नहीं देखे? तुलसी का पौधा नहीं लगा हुआ वहाँ बीच बगीचे में?
*फिर दोनों बाहें फैला कर बोला- वही तो है तुलसी जिसके इतने लम्बे लम्बे पत्ते हैं। *गुरू जी बोले- अच्छा तो तुम भी तुलसी नहीं जानते। देखो मैं तो तख्त पर बैठ गया हूँ। और मेरा नियम है कि एक बार मैं पूजा के लिए बैठ जाऊँ तो बिना पूजा पूरी किए उठ नहीं सकता। चलो कोई बात नहीं, तुम तुलसी नहीं जानते, तख्त उठाना तो जानते हो? चलो मुझे ही बाहर ले चलो, फिर तुलसी के पत्ते तो मैं खुद ही ले आऊँगा।
*अब तो दोनों चेलों का खून सूख गया। आखिर पुराना तख्त था, वह तो भारी भरकम था ही, गुरू जी भी भगवान की कृपा से कोई तख्त से कम भारी न थे। पर अब क्या किया जा सकता था? जैसे तैसे दोनों ने गुरू जी सहित तख्त उठाया और चले। *पहुँचे तुलसी के पौधे के पास। गुरू जी ने तुलसी के दो पत्ते लिए और कहा- प्यारे चेलों! अब वापिस भी ले चलो।
*_बात ऐसी है कि कुछ चेले सीधे सीधे नहीं सीखते। उन्हें सिखाने के लिए गुरू को भी उन्हीं के स्वभाव के अनुरूप योजना बनानी पड़ती है। वे चेले अब और कुछ भूलें न भूलें, पर तुलसी
◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉►
⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही मनाया जाता है तथा किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्मा जी का पूजन आवश्यक करना चाहिए। वैसे तो मूहूर्त चिंतामणि आदि ग्रंथों के अनुसार द्वितीय तिथि अत्यंत शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परंतु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिए श्रावण और भद्रपद की द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।


