ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 21 मई 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 21 मई 2026
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_

🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – अधिक ज्यैष्ठ मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 08:26 AM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पुष्य 02:49 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि ग्रह हैं, जबकि इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता देव गुरु बृहस्पति हैं
⚜️ योग – गण्ड योग 10:58 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग
प्रथम करण : बालव 08:27 AM तक
द्वितीय करण : कौलव 07:21 PM तक, बाद तैतिल
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:26:32
🌅 सूर्यास्तः – सायं 19:08:29
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:05 ए एम से 04:46 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:25 ए एम से 05:27 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:35 पी एम से 03:29 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:07 पी एम से 07:28 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : शाम 07:08 पी एम से 08:10 पी एम
💧 अमृत काल : शाम 08:47 पी एम से 10:18 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, मई 22
🌸 गुरु पुष्य योग 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22
सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22
🌊 अमृत सिद्धि योग : सुबह 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22
❄️ रवि योग : सुबह 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अधिक स्कन्द षष्ठी/ गण्ड मूल/ गुरु पुष्य योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ गुरुपुष्यामृत योग सुबह 06.05 से उ. रात्रि 02.49 तक/ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी बलिदान दिवस/ ‘अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस’, आतंकवाद विरोधी दिवस, वैश्विक अभिगम्यता जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय अमेरिकी रेड क्रॉस संस्थापक दिवस, डच चिकित्सक, शरीर क्रिया विज्ञान विशेषज्ञ और नोबेल पुरस्कार विजेता विलेम आइंथोवेन जन्म दिवस, प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाकार शरद जोशी जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
✈️ Vastu tips 🗽
वास्तु के अनुसार, सोने से पहले बिस्तर को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। गंदे या बिखरे बिस्तर पर सोने से मानसिक तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। साथ ही सिरहाने के पास गंदे कपड़े, मोजे या जूते रखने से भी बचना चाहिए।* बिस्तर पर न ले जाएं गीले पैर धार्मिक मान्यताओं में सोने से पहले पैर धोना अच्छा माना गया है, लेकिन केवल पैर धो लेना काफी नहीं है। गीले पैर लेकर सोना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर असर पड़ सकता है। इसलिए पैरों को धोने के बाद अच्छी तरह पोछकर या सुखाकर ही सोना बेहतर माना जाता है।*
न करें नकारात्मक बातें रात को साने के लिए जाते समय पैसों की कमी, कर्ज या नुकसान जैसी बातों पर चर्चा करना भी ठीक नहीं माना जाता। माना जाता है कि सोने से पहले सकारात्मक सोच रखने से मन शांत रहता है और घर का वातावरण भी अच्छा बना रहता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*अधिक तापमान होने की वजह से खून सूखने लगता है अत्यधिक तापमान होने की वजह से लोगों के शरीर से पसीने और नमक तेजी से निकलने लगते हैं जिसकी वजह से खून गाढ़ा होने लगता है अर्थात सूखने लगता है इसकी वजह से हृदय रोगियों के रक्तचाप में तेजी से बदलाव आने लगता है आगे स्थिति गंभीर होकर हार्ट अटैक की समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है। *अधिक तापमान की वजह से दिमाग पर प्रभाव पड़ता है अत्यधिक तापमान बढ़ने की वजह से दिमाग पर विशेष प्रभाव पड़ता है ज्यादा गर्मी हो या फिर ठंड दोनों परिस्थितियों में दिमाग के हार्मोन का समीकरण बिगड़ जाता है और मनोरोगियों की संख्या में इजाफा होता है। साथ ही पागल व्यक्तियों की समस्या और भी बढ़ जाती है। अधिक तापमान की वजह से पागलपन के साथ-साथ अवसाद की भी समस्या में इजाफा होता है।
*अधिक तापमान की वजह से ऑपरेशन में संक्रमण की समस्या हो जाती है गर्मियों के मौसम में किसी भी प्रकार की ऑपरेशन संक्रमण की समस्या को दावत देते हैं गर्मियों में अधिक तापमान की वजह से निकलने वाले पसीने टांके वाले स्थान को संक्रमित कर देता है। साथ ही शरीर में पानी की कमी के कारण चमड़ी सिकुड़ने लगती है। जिससे ऑपरेशन के पश्चात चमड़ी को जोड़ने में वक्त लगता है। *अधिक तापमान की वजह से आंखों में समस्या हो जाती है अत्यधिक तापमान के कारण आंखों से संबंधित बीमारियां बढ़ जाती हैं जिसकी वजह से आंखों में दर्द संक्रमण लाल होना आदि समस्याएं हो जाती हैं ऐसे में समय-समय पर ठंडे पानी से आंखों में छींटे मारने से राहत मिलता है।
🪻 आरोग्य संजीवनी ☘️
वज्रदंती का भारत में पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है। इस पौधे में दांत दर्द, एनीमिया यानी खून की कमी, सांप के काटने, डायबिटीज, फेफड़ों की बीमारियां, ब्लड डिसऑर्डर, कब्ज, जोड़ों का दर्द, किडनी की पथरी, तनाव, बाल झड़ने और सूजन जैसी घातक समस्याओं का इलाज करने की क्षमता होती है।
*वज्रदंती हानिकारक जीवाणुओं से लड़ती है और दांतों को क्षय, प्लाक जमाव और मसूड़े की सूजन से बचाती है। *इसमें पाए जाने वाले आयुर्वेदिक तत्व दांतों को मजबूत बनाते हैं और कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ावा देते हैं।
*जिन लोगों को मुंह के छालों की समस्या होती है उनको वज्रदंती के जड़ के काढ़े का उपयोग माउथवॉश के रूप में करने की सलाह दी जाती है। इससे छाले तेजी से ठीक हो जाते हैं। *संपूर्ण मौखिक स्वास्थ्य के लिए बहुत से लोग वज्रदंती की टहनियों को भी चबाते हैं।
*जिन लोगों को दाद की समस्या हो उनके लिए भी यह औषधि फायदेमंद मानी जाती है। इसके लिए वज्रदंती की जड़ों को सुखाकर पाउडर के रूप में पीस लें। अब इस पाउडर को नींबू के रस में मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाएं। *इसके अलावा जिन लोगों को एड़ी फटने की समस्या होती है वह वज्रदंती की पत्ती का रस या पेस्ट भी लगा सकते हैं।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास बेहद पावन महीना माना गया है। कहते हैं इस महीने में किए गए दान-पुण्य के कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। ये महीना हर तीसरे साल में एक बार आता है। इस महीने में व्रत रखने, भगवान विष्णु और कृष्ण जी की पूजा करने और तुलसी उपासना करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके साथ ही इस महीने में एक खास कथा सुनना भी बेहद शुभ फलदायी माना गया है। चलिए आपको बताते हैं आचार्य श्री गोपी राम उस पावन कथा के बारे में विस्तार से यहां।
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा
*पुराणों में अधिकमास यानी मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा का वर्णन किया गया है। इस कथा के अनुसार सभी बारह महीनों के तो अलग-अलग स्वामी थे पर मलमास का कोई स्वामी नहीं था जिस कारण इसकी काफी निंदा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास पहुंचा। इसके बाद श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुंचे, जहां पर श्रीकृष्ण विराजमान थे। भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की परेशानी जानकर उसे वरदान दिया कि अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं। जिससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाहित हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से जाना जाता हूं और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूं। जिससे अब से तुम पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे। *शास्त्रों के अनुसार इसलिए इस मास में जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस मास में श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन और विष्णु भगवान की उपासना का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दौरान तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं इस माह में किया गया दान सौ गुना अधिक फल देता है। इसलिए अधिक मास में दान-पुण्य देने का बहुत महत्व होता है। इस माह में धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करना भी बेहद पुण्य का काम माना जाता है।
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⚜️ *_पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

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