धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 17 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 17 दिसम्बर 2024
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार पौष माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 10:56 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ _ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 12:44 AM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति और राशि स्वामी बुध हैं। इस नक्षत्र की देवी अदिति हैं।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 09:10 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
⚡ प्रथम करण : गर – 10:56 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 10:25 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00_

🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:18 ए एम से 06:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:46 ए एम से 07:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:38 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:24 पी एम से 05:52 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:27 पी एम से 06:49 पी एम
💧 अमृत काल : 10:23 पी एम से 11:57 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:45 ए एम, दिसम्बर 18
🪷 त्रिपुष्कर योग : 07:08 ए एम से 10:56 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्योहार – त्रिपुष्कर योग/ राष्ट्रीय सेवानिवृत्ति दिवस, अभिनेता रितेश देशमुख जन्म दिवस, भूटान राष्ट्रीय दिवस, कवि अब्दुल रहीम खान-ए-खान जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी डॉ. भोगराजू पट्टाभि सीतारमैया स्मृति दिवस, क्रांतिकारी सखाराम गणेश देउसकर जयन्ती, अमर शहीद क्रांतिकारी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी पुण्य तिथि, नूरजहां स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
भूमि दोष होने पर मिलते हैं ये संकेत
अगर दोष वाली भूमि पर आपका घर बना है तो परिवार के लोगो के साथ अप्रिय घटनाएं हो सकती हैं।
ऐसे घर में पालतू जानवर जैसे- कुत्ता, बिल्ली, गाय ज्यादा दिन तक जी नहीं पाते।
घर के लोगों के साथ दुर्घटनाएं होती रहती हैं, तो समझ जाइए इसका कारण भूमि दोष हो सकता है।
घर में अनजान आवाजों का सुनाई देना या विचित्र आकृतियां दिखने का भ्रम पैदा होना भी भूमि दोष का कारण है।
धन का संचित न हो पाना और बने-बनाए कार्यों का भी बिगड़ जाना।
करियर में मेहनत करने पर भी तरक्की न होना और घर के लोगों के बीच लड़ाई-झगड़े होने का कारण भी भूमि दोष हो सकता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
किसी भी पूर्णिमा के दिन बुध की होरा में गोरोचन तथा नागकेसर खरीद कर ले आइए। बुध की होरा काल में ही कहीं से अशोक के वृक्ष का एक अखण्डित पत्ता तोड़कर लाइए। गोरोचन तथा नागकेसर को दही में घोलकर पत्ते पर एक स्वस्तिक चिह्न बनाएँ। जैसी भी श्रद्धाभाव से पत्ते पर बने स्वस्तिक की पूजा हो सके, करें। एक माह तक देवी-देवताओं को धूपबत्ती दिखलाने के साथ-साथ यह पत्ते को भी दिखाएँ। आगामी पूर्णिमा को बुध की होरा में यह प्रयोग पुनः दोहराएँ। अपने प्रयोग के लिये प्रत्येक पुर्णिमा को एक नया पत्ता तोड़कर लाना आवश्यक है। गोरोचन तथा नागकेसर एक बार ही बाजार से लेकर रख सकते हैं। पुराने पत्ते को प्रयोग के बाद कहीं भी घर से बाहर पवित्र स्थान में छोड़ दें।
💉 आरोग्य संजीवनी 💊
पेशाब करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:
पेशाब को रोकें नहीं: जब पेशाब आने का मन करे तो इसे रोकने की कोशिश न करें। पेशाब को रोकने से मूत्राशय में संक्रमण, किडनी स्टोन और प्रोस्टेट की समस्याएं हो सकती हैं।
ब्लैडर को पूरी तरह खाली करें: पेशाब करते समय जल्दबाजी न करें और सुनिश्चित करें कि आपका ब्लैडर पूरी तरह से खाली हो गया है।
पेशाब करते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करें: पेशाब करते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने से ध्यान भटकता है और ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता।
बैठकर पेशाब करें: खड़े होकर पेशाब करने की बजाय बैठकर पेशाब करें। इससे ब्लैडर पूरी तरह से खाली होता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।
पेशाब करने के तुरंत बाद पानी न पिएं: पेशाब करने के तुरंत बाद पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।
नहाने के दौरान पेशाब न करें: नहाने के दौरान पेशाब करने से मूत्राशय में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
पेशाब में झाग को नजरअंदाज न करें: पेशाब में झाग आना कई बीमारियों का संकेत हो सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
एक बार अयोध्या के राज भवन में भोजन परोसा जा रहा था।
माता कौशल्या बड़े प्रेम से भोजन खिला रही थी।
माँ सीता ने सभी को खीर परोसना शुरू किया और भोजन शुरू होने ही वाला था की ज़ोर से एक हवा का झोका आया सभी ने अपनी अपनी पत्तलें सम्भाली सीता जी बड़े गौर से सब देख रही थी…
ठीक उसी समय राजा दशरथ जी की खीर पर एक छोटा सा घास का तिनका गिर गया जिसे माँ सीता जी ने देख लिया…
लेकिन अब खीर में हाथ कैसे डालें ये प्रश्न आ गया माँ सीता जी ने दूर से ही उस तिनके को घूर कर देखा वो जल कर राख की एक छोटी सी बिंदु बनकर रह गया सीता जी ने सोचा अच्छा हुआ किसी ने नहीं देखा…
लेकिन राजा दशरथ माँ सीता जी के इस चमत्कार को देख रहे थे फिर भी दशरथ जी चुप रहे और अपने कक्ष पहुँचकर माँ सीता जी को बुलवाया…
फिर उन्होंने सीताजी से कहा कि मैंने आज भोजन के समय आप के चमत्कार को देख लिया था…
आप साक्षात जगत जननी स्वरूपा हैं, लेकिन एक बात आप मेरी जरूर याद रखना…
आपने जिस नजर से आज उस तिनके को देखा था उस नजर से आप अपने शत्रु को भी कभी मत देखना…
इसीलिए माँ सीता जी के सामने जब भी रावण आता था तो वो उस घास के तिनके को उठाकर राजा दशरथ जी की बात याद कर लेती थीं…
तृण धर ओट कहत वैदेही…
सुमिरि अवधपति परम् सनेही…
यही है…उस तिनके का रहस्य…
इसलिये माता सीता जी चाहती तो रावण को उस जगह पर ही राख़ कर सकती थी लेकिन राजा दशरथ जी को दिये वचन एवं भगवान श्रीराम को रावण-वध का श्रेय दिलाने हेतु वो शांत रही.
ऐसी विशालहृदया थीं हमारी जानकी माता..
🌹!!…..जय सियाराम…..!!🌹
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।

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