धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 04 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 04 दिसम्बर 2024
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_

☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – बुधवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 01:10 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि के देवता हैं यक्षराज कुबेर।चूँकि गौरी इसकी स्वामिनी है, तथा चतुर्थी के देवता गणेश हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 05:14 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी शुक्र है और इसका वैदिक देवता अपस अर्थात् जल देवता है।
⚜️ योग – गण्ड योग 01:56 PM तक, उसके बाद वृद्धि योग
प्रथम करण : गर – 01:10 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 01:02 ए एम, दिसम्बर 05 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:45:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:15:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:10 ए एम से 06:05 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:37 ए एम से 06:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:49 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:46 पी एम
💧 अमृत काल : 12:20 पी एम से 01:58 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:39 ए एम, दिसम्बर 05_
💮 रवि योग : 05:15 पी एम से 07:00 ए एम, दिसम्बर 05
🚓 यात्रा शकुन-गणेश जी को 108 दूर्वांकुर की माला चढ़ाएं।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी बटुक को हरे फल भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विनायकी चतुर्थी/रवियोग/ विनायक चतुर्थी (खुलासा मागील बाजुस)/मुख्यमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल जन्म दिवस, भारतीय भौतिक वैज्ञानिक श्रीनिवास कृष्णन जन्म दिवस, रासायनिक दुर्घटनाओं रोकथाम दिवस, भारतीय नौसेना दिवस, बैंकों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, अंतरराष्ट्रीय बैंक दिवस, अभिनेता जावेद जाफरी जन्म दिवस, अभिनेता मोतीलाल राजवंश जन्म दिवस, प्रसिद्ध अभिनेता शशि कपूर पुण्य तिथि, राजस्थान से भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ ओम बिड़ला जन्म दिवस
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
पेड़-पौधे लगाने से वहले वास्तु के इन नियमों का रखें ध्यान
घर के अंदर कमरों में किसी भी प्रकार का पौधा लगाना वास्तु शास्त्र के अनुसार शुभ नहीं माना जाता है। लोग अक्सर घर के अंदर बेडरूम, ड्राइंगरूम, सेंट्रल हॉल और सीढ़ियों पर गमले लगा लेते हैं। कमरों में रखे पौधों में चीटियां, कीट-पतंग आदि का प्रकोप होता है जिसे वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता है और यह निगेटिविटि को आमंत्रित करने जैसा है। इन पौधों को घर के बाहर गार्डन में लगाना ही उचित है।
घर के कमरों में सजावट के तौर पर प्लास्टिक और फाइबर के पौधे रखने से भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है, जो कलह का कारण बनता है। जिस वजह से परिवार के सदस्यों में सुख-शांति नहीं रहती है।
वहीं वास्तु के अनुसार घर में कांटे वाले पेड़-पौधे जैसे कि कैक्टस और नागफनी नहीं लगाना चाहिए, यह पेड़ घर में लगाने से कलह को बढ़ावा देते हैं और परिवार पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
यहां कुछ बातें ध्यान रखने योग्य हैं:
स्टेरॉयड्स: कुछ लोग ताकत बढ़ाने के लिए स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ये बहुत ही खतरनाक होते हैं और इनके कई दुष्प्रभाव होते हैं। स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल करने से लीवर, किडनी और दिल की बीमारियां हो सकती हैं।
सप्लीमेंट्स: मार्केट में कई तरह के सप्लीमेंट्स उपलब्ध हैं जो ताकत बढ़ाने का दावा करते हैं, लेकिन इनकी प्रभावशीलता के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं है।
आयुर्वेदिक दवाएं: कुछ आयुर्वेदिक दवाएं मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
ताकत बढ़ाने के लिए आप क्या कर सकते हैं:
संतुलित आहार लें: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन से भरपूर आहार लें।
नियमित व्यायाम करें: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो व्यायाम दोनों ही मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
पर्याप्त नींद लें: नींद शरीर को रिपेयर करने और मजबूत बनाने के लिए जरूरी है।
तनाव से बचें: तनाव मांसपेशियों को कमजोर बना सकता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
मलेरिया के मुख्य लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, पसीना आना और शरीर में दर्द होना शामिल हैं। इसे समझने के लिए हम इसे कुछ स्टेज़ में बाँट सकते हैं:
बुखार और ठंड लगना: मलेरिया का सबसे पहला लक्षण बुखार है, जो अचानक और तेज़ी से बढ़ता है। बुखार के दौरान आपको बहुत ठंड लग सकती है, जिससे आपका शरीर कांपने लगेगा। यह ठंड लगने का चरण कुछ देर चलता है, फिर बुखार तेज़ी से बढ़ता है।
पसीना आना: बुखार के चरम पर पहुँचने के बाद अचानक से शरीर में पसीना आ जाता है। यह स्थिति तब होती है जब शरीर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है, और पसीना बाहर निकलता है। पसीना आने के बाद बुखार थोड़ी देर के लिए कम हो सकता है, लेकिन फिर यह एक बार फिर से बढ़ सकता है।
शरीर में दर्द और कमजोरी: मलेरिया के दौरान शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द महसूस होता है, खासकर मांसपेशियों और जोड़ों में। इसके साथ ही, शरीर में कमजोरी भी महसूस होती है। रोगी को लगता है जैसे वो बहुत थका हुआ और सुस्त हो गया हो।
सिर दर्द और उल्टियाँ: मलेरिया के दौरान सिर में तेज़ दर्द हो सकता है। साथ ही, मितली और उल्टियाँ भी हो सकती हैं। इससे शरीर और भी कमजोर हो जाता है।
📖 गुरु भक्ति योग
🕯️
समुद्र तट के किसी नगर में एक धनवान वैश्य के पुत्रों ने एक कौआ पाल रखा था। वह उस कोए को बार-बार अपने भोजन से बचें अन्न देते थे। उनकी जूठन खाने वाला वह कौआ स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन खाकर खूब मोटा हो गया था। इससे उसका अहंकार बहुत बढ़ गया। वह अपने से श्रेष्ठ पक्षियों को भी तुच्छ समझने और उनका अपमान करने लगा।
एक दिन समुद्र तट पर कहीं से उड़ते हुए आकर कुछ हंस उतरे। वैश्य के पुत्र उन हंसों की प्रशंसा कर रहे थे। यह बात कौए से सही नहीं गई। वह उन हसों के पास गया और उसे उनमें जो सर्वश्रेष्ठ हंस प्रतीत हुआ, उससे बोला – “मैं तुम्हारे साथ प्रतियोगिता करके उड़ना चाहता हूँ।”
हंस ने उसे समझाया – “भैया ! हम तो दूर-दूर उड़ने वाले हैं। हमारा निवास मानसरोवर यहाँ से बहुत दूर है। हमारे साथ प्रतियोगिता करने से तुम्हें क्या लाभ होगा। तुम हंसो के साथ कैसे उड़ सकते हो।”
कोए ने अहंकार में आकर कहा – “मैं उड़ने की सौ गतियाँ जानता हूँ। और प्रत्येक गति से सौ योजन तक उड़ सकता हूँ। उडीन, अवडीन, प्रडीन, डीन आदि अनेकों गतियों के नाम गिनाकर वह बकवादी कोआ बोला – “बतलाओ ! इनमें से तुम किस गति से उड़ना चाहते हो।”
तब श्रेष्ठ हंस ने कहा – “काक ! तुम तो बड़े निपुण हो, परंतु मैं तो एक ही गति जानता हूँ, जिसे सब पक्षी जानते हैं, मैं उसी गति से उडूँगा।
गर्वित कोए का गर्व और बढ़ गया – “वह बोला अच्छी बात तुम जो गति जानते हो उसी से उड़ो।”
उस समय कुछ पंछी वहाँ और आ गए थे। उनके सामने ही हंस और कौआ दोनों समुद्र की ओर उड़े। समुद्र के ऊपर आकाश में वह कौआ नाना प्रकार की कलाबाजियां दिखाता पूरी शक्ति से उड़ा और हंस से कुछ आगे निकल गया। हंस अपनी स्वाभाविक मंद गति से उड़ रहा था। यह देखकर दूसरे कोए प्रसन्नता प्रकट करने लगे।
थोड़ी देर में ही कौए के पंख थकने लगे। वह विश्राम के लिए इधर-उधर वृक्ष युक्त द्वीपों की खोज करने लगा। परंतु उसे उस अनंत सागर के अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था। इतने समय में हंस उड़ता हुआ उससे आगे निकल गया था। कोए की गति मंद हो गई। वह अत्यंत थक गया और ऊंची तरंगों वाले भयंकर जीवों से भरे समुंद्र की लहरों के पास गिरने की दशा में पहुंच गया।
हंस ने देखा कि कौआ बहुत पीछे रह गया है, तो रुक गया। उसने कौए के समीप आकर पूछा – ” काक ! तुम्हारी चौच और पंख बार-बार पानी में डूब रहे हैं। यह तुम्हारी कौन सी गति है।
हंस की व्यंग्य भरी बात सुनकर कौआ बड़ी दीनता से बोला – “हंस ! हम कोए केवल कांव-कांव करना जानते हैं। हमें भला दूर तक उड़ना क्या आएगा। मुझे अपनी मूर्खता का दंड मिल गया। कृपया करके अब मेरे प्राण बचा लो।“
जल से भीगे अचेत और अधमरे कोए पर हंस को दया आ गई। पैरों से उसे उठाकर हंस ने उसे पीठ पर रख लिया और उसे लादे हुए उड़कर वहाँ आया जहाँ से दोनों उड़े थे। हंस ने कौए को उसके स्थान पर छोड़ दिया।
अपनी क्षमताओं का ज्ञान होना चाहिए और कभी भी अहंकार न करना चाहिए!!!
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

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