
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 04 जुलाई 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 04:32 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 04:50 PM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, तथा चित्रा नक्षत्र के देवता विश्वकर्मा जी हैं।
⚜️ योग – शिव योग 07:35 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 04:31 पी एम तक
✨ द्वितीय करण – तैतिल – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 5.27 AM
🌄 सूर्यास्त – सायं 19.23 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:07 ए एम से 04:48 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:28 ए एम से 05:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:53 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:22 पी एम से 07:42 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:24 पी एम
💧 अमृत काल : 09:38 ए एम से 11:26 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जुलाई 05 से 12:46 ए एम, जुलाई 05
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में मखाने की खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ भड़ली नवमी/ मेला सरीफ भवानी (कश्मीर)/ संयुक्त राज्य अमेरिका स्वतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिवस का पहला वार्षिक स्मरणोत्सव, नानक सिंह जयन्ती, अल्लूरी सीताराम राजू जन्म दिवस, गुलजारीलाल नंदा जन्म दिवस, अभिनेत्री नसीम बानो जयंती, स्वामी विवेकानंद स्मृति दिवस, राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ अभिकल्पक पिंगली वेंकय्या स्मृति दिवस, भरत व्यास पुण्यतिथि, अभिनेता सुनील कुमार जन्म दिवस, भारत के भूतपूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलज़ारीलाल नन्दा जयन्ती, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी धन सिंह गुर्जर स्मृति दिवस, धर्म चक्र दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🗽 Vastu tips_ 🗼
इन जगहों पर न करें भोजन
अक्सर देखा गया है कि लोग अपने बेड पर बैठकर भोजन करते हैं, जो कि वास्तु शास्त्र के हिसाब से ठीक नहीं है। इससे आपकी हेल्थ खराब हो सकती है। साथ ही आर्थिक हालत भी माली हो जाएगी और धन हानि होगी। इसके अलावा, आप हमेशा मानसिक तनाव से घिरे रहेंगे। इससे बचने के लिए अब से बेड पर खाना बंद कर दें।
भोजन करने जा रहे हैं तो ध्यान रखें कि आप ऐसी कोई भी जगह न बैठें जहां गंदगी है, इससे आपके अंदर निगेटिव एनर्जी भर जाएगी। साथ ही आर्थिक स्थिति भी खराब हो जाएगी। इससे बचने के लिए साफ-सुथरी जगह बैठकर भोजन करें।
अगर आपके किचन के आसपास पूजा घर हैं तो कोशिश करें कि भोजन करने के दौरान आप पूजा घर के आसपास न बैठें। कारण है कि पूजा घर पवित्र होता है और आप भोजन कर उस जगह को जूठा कर रहे हैं। इससे घर के देवी-देवता नाराज हो जाएंगे और घर से सुख-समृद्धि चली जाएगी।
कई बार देखा गया है कि लोग किचन में ही खाना शुरू कर देते हैं। वास्तु के हिसाब से चूल्हे के पास कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए, इससे घर की शांति खत्म होती है और कलह का आगमन होता है।
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, किसी भी हाल में दरवाजे के पास या चौखट के पास भोजन नहीं करना चाहिए। इससे घर में अशुभता आती है और निगेटिव एनर्जी का वास होता है। मां लक्ष्मी भी ऐसा करने से नाराज होती है। इस कारण दरवाजे के पास भोजन न करें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दीपक को हमें जमीन पर नहीं रखना चाहिए।इसे हमें किसी चीज के ऊपर या कपड़ा बिछाकर रखना चाहिए।
शिवलिंग को भी हमें कभी भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इसे भी कहीं भी ऊपर ऊंचे स्थान पर रखना चाहिए।
भगवान की मूर्तियों को भी कभी भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें भी किसी जमीन से ऊंचे स्थान पर रखना चाहिए।
गहनों को भी कभी भी नीचे स्थान पर नहीं रखना चाहिए । गहने भी लक्ष्मी का एक रूप होते हैं ।
शालिग्राम को भी हमें कभी भी नीचे नहीं रखना चाहिए। इन्हें भी हमें हमेशा किसी ना किसी ऊंचे स्थान पर किसी न किसी चीज पर रखना चाहिए।
शंख भी कभी भी हमें नीचे नहीं रखना चाहिए।
पैसे को भी कभी भी नीचे नहीं रखना चाहिए।इससे माता लक्ष्मी का अपमान होता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
👉 तेजपत्ता के औषधीय गुण🍾👌
तेजपत्ता मधुमेह, अल्ज़ाइमर्स, बांझपन, गर्भस्त्राव, स्तनवर्धक, खांसी जुकाम, जोड़ो का दर्द, रक्तपित्त, रक्तस्त्राव, दाँतो की सफाई, सर्दी जैसे अनेक रोगो में अत्यंत उपयोगी है।
👉तेजपत्ता में दर्दनाशक, एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। आयुर्वेद में अनेक गंभीर रोगो में इसके उपयोग किये जाते रहे हैं।
👉चाय-पत्ती की जगह तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से सर्दी-जुकाम, छींकें आना, बुखार, नाक बहना, जलन, सिरदर्द आदि में शीघ्र लाभ मिलता है।
👉तेजपात के पत्तों का बारीक चूर्ण सुबह शाम दांतों पर मलने से दांतों पर चमक आ जाती है।
👉तेजपात के पत्रों को नियमित रूप से चूंसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है।
👉एक चम्मच तेजपात चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।
👉तेजपात के पत्तों का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर पीने से पेट का फूलना व अतिसार आदि में लाभ होता है।
👉कपड़ों के बीच में तेजपात के पत्ते रख दीजिये, ऊनी, सूती, रेशमी कपडे कीड़ों से बचे रहेंगे।
👉अनाजों के बीच में 4-5 पत्ते डाल दीजिए तो अनाज में भी कीड़े नहीं लगेंगे लेकिन उनमें एक दिव्य सुगंध जरूर बस जायेगी।
👉अनेक लोगों के मोजों से दुर्गन्ध आती है, वे लोग तेजपात का चूर्ण पैर के तलुवों में मल कर मोज़े पहना करें। पर इसका मतलब ये नहीं कि आप महीनों तक मोज़े धुलें ही न.!
📚 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
हवन क्यों किया जात है?
हवन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और प्राचीन अनुष्ठान है, जिसे कई धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारणों से किया जाता है। इसे किसी भी पूजा या धार्मिक कार्य की पूर्णता के लिए आवश्यक माना जाता है।
🔥 हवन क्यों किया जाता है, इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
👉🏼 धार्मिक और आध्यात्मिक कारण
पूजा की पूर्णता: हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान को हवन के बिना अधूरा माना जाता है। हवन के माध्यम से पूजा को पूर्णता मिलती है।
देवी-देवताओं को प्रसन्न करना: हवन अग्नि के माध्यम से देवी-देवताओं को आहुतियां समर्पित की जाती हैं, जिससे माना जाता है कि वे प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मक ऊर्जा का संचार: ऐसा माना जाता है कि हवन से निकलने वाला धुआं और मंत्रों का उच्चारण घर और आसपास के वातावरण से नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों को दूर करता है, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
ग्रह शांति और वास्तु दोष निवारण: जिन लोगों को ग्रह दोष होते हैं, उन्हें ग्रह शांति के लिए हवन करने की सलाह दी जाती है। हवन से वास्तु दोषों को भी दूर करने में मदद मिलती है।
मनोकामना पूर्ति: कई लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए हवन करते हैं।
पूर्वजों को शांति: कुछ हवन पूर्वजों को शांति और मोक्ष प्रदान करने के उद्देश्य से भी किए जाते हैं।
वैज्ञानिक कारण : वातावरण की शुद्धि: हवन में उपयोग की जाने वाली सामग्री (जैसे जड़ी-बूटियां, घी, चंदन, कपूर आदि) और अग्नि से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करता है। शोधों से पता चला है कि हवन के धुएं में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो हवा में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं को 94% तक नष्ट कर सकते हैं।
रोगों से बचाव: हवन से उत्पन्न होने वाला धुआं और ऊष्मा श्वसन संबंधी समस्याओं (जैसे दमा, ब्रोंकाइटिस) और एलर्जी में लाभकारी हो सकता है। यह टाइफाइड जैसे रोगों के जीवाणुओं को भी खत्म करने में सहायक माना गया है।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य: हवन के दौरान बोले जाने वाले मंत्रों की ध्वनि और हवन सामग्री की सुगंध मन को शांत करती है और तनाव कम करती है। यह मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करता है।
ऑक्सीजन में वृद्धि: कुछ हवन सामग्री जैसे घी के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम होता है और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, जो पर्यावरण के लिए लाभदायक है।
कृषि और भूमि उर्वरता: कुछ शोधों में यह भी बताया गया है कि यज्ञ से भूमि की उर्वरता बढ़ती है और वर्षा लाने में भी सहायक होता है।
स्वाहा का महत्व : हवन में हर मंत्र के बाद ‘स्वाहा’ का उच्चारण किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वाहा अग्नि देव की पत्नी हैं। यह माना जाता है कि अग्नि देव अपनी पत्नी स्वाहा के माध्यम से ही हविष्य (आहुति) ग्रहण करते हैं, और उन्हीं के माध्यम से यह हविष्य आह्वान किए गए देवताओं तक पहुंचता है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं स्वाहा को यह वरदान दिया था कि उनके नाम से ही देवता हविष्य को ग्रहण कर पाएंगे।
कुल मिलाकर, हवन सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति और पर्यावरण दोनों के लिए कई तरह से फायदेमंद है, जिससे सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।


