धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 08 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 07 मार्च 2025
07 मार्च 2025 दिन शुक्रवार को आज फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि हैं।आज से होलाष्टक लग जाता है। और आज रोहिणी व्रत, दुर्गा अष्टमी व्रत के साथ ही बरसाना में लड्डू होली मनाई जाती है। आप सभी सनातियों को “फाल्गुन मास, बसंतोत्सव एवं होलाष्टक” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125_

🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 09:18 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 11:32 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। तथा इसके अधिपति देवता चंद्र हैं।
⚜️ योग – प्रीति योग 06:14 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
प्रथम करण : बव – 09:18 ए एम तक
द्वितीय करण : बालव – 08:43 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:11:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:49:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:02 ए एम से 05:51 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:26 ए एम से 06:40 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:09 पी एम से 12:56 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:17 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:22 पी एम से 06:47 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:25 पी एम से 07:38 पी एम
💧 अमृत काल : 02:56 पी एम से 04:30 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, मार्च 08 से 12:56 ए एम, मार्च 08
❄️ रवि योग : 11:32 पी एम से 06:39 ए एम, मार्च 08
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दुर्गाष्टमी/ होलाष्टक प्रारंभ/संत श्री दादूदयाल जयंती/ भारतीय अभिनेता अनुपम खेर जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ ग़ुलाम नबी आजाद जयन्ती, प्रसिद्ध हिन्दी लेखक सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ जयन्ती, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और वरिष्ठ नेता गोविंद बल्लभ पंत शहीद दिवस, भारतीय गुरु परमहंस योगानन्द जी स्मृति दिवस, छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु दादोजी कोंडदेव स्मृति दिवस, भारतीय संगीतकार रविशंकर शर्मा स्मृति दिवस, भूजल सप्ताह (5 से 11 मार्च)
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips_ 🗽
पारिजात का पेड़ कब लगाना चाहिए-पारिजात का पेड़ आप किसी भी शुक्रवार या फिर सोमवार को लगा सकते हैं। ये दोनों ही देवी पक्ष का दिन है जिसमें देवियों की पूजा होती है। वैसे, शुक्रवार की शाम को पारिजात का पेड़ लगाना सबसे सही समय और शुभ माना जाता है। ऐसा इसलिए कि ये लक्ष्मी की दिन और समय होता है।
पारिजात का पेड़ लगाने के फायदे-पारिजात का पेड़ लगाने के फायदे कई हैं। ये जहां समृद्धि की दिशा है वहीं, ये घर के नेगेटिव एनर्जी को कम करने में भी मददगार है। इसके अलावा ये घर के लोगों को मानसिक शांति देते हैं और एक हेल्दी व लंबी उम्र देते हैं। साथ ही इस पेड़ को लगाने से घर में कई प्रकार के वास्तु दोष नहीं होते। आप इसे अपने घर के आगे लगा सकते हैं, अपने मंदिर के पास रख सकते हैं और साथ ही इसे छत पर भी रह सकते हैं।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आप चाहें तो आसानी से घर पर भी भृंगराज का तेल तैयार कर सकते हैं. इसके लिए नारियल या सरसों तेल में भृंगराज की कुछ पत्तियों को उबालें. इससे इसका सार तेल में समा जाता है. बालों के अलावा, यह पौधा शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही गुणकारी है.
भृंगराज का रस या कैप्सूल लिवर को डिटॉक्सिफाई करने में कारगर है. यह पित्त के स्राव को संतुलित करता है. फैटी लिवर, पीलिया जैसे रोगों में राहत देता है. शोध के अनुसार, इसमें मौजूद ‘वेडेलोलैक्टोन’ नाम का कम्पाउंड लिवर सेल्स के पुनर्जनन में मदद करता है.
भृंगराज का पौधा पाचन तंत्र को मजबूत बनाने वाली ‘जठराग्नि’ को प्रज्वलित करता है. इससे भोजन सही से पचता है. साथ ही पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर तरीके से होता है.पेट की गैस, अल्सर और मतली जैसी समस्याओं में भी यह कारगर है.
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
नाक की बढ़ी हड्डी या मांस का घरेलू इलाज
👉🏼 कैसे बनाएं देसी दवाई
अर्जुन की छाल, अश्वगंधा और नौशादर को पीसकर बारीक पाउडर बना लें
इस पाउडर को एक डिब्बे के अंदर स्टोर कर लें
ध्यान रहे कि इसे हवा और नमी से बचाकर रखें
👉🏼 कैसे करें सेवन

डॉक्टर ने बताया कि इस पाउडर को 2 ग्राम मात्रा में लें
सुबह खाली पेट और दो ग्राम शाम को पानी से लें
15 दिन में ठीक हो जाएगा बढ़ा हुआ मांस डॉक्टर ने बताया कि इस पाउडर का नियमित सेवन करने से मात्र 15 दिन में नाक का बढ़ा हुआ मांस ठीक हो जाएगा। इतना ही नहीं, कुछ ही दिनों के अंदर जो नाक की हड्डी बढ़ी हुई है, वो भी ठीक हो जाएगी।
🌹 गुरु भक्ति योग 🌷
(कल का शेष)
ध्यान की प्रक्रिया फिर से दोहराते हैं। सफेद रंग के प्रकाश के बीच काले रंग की आड़ी तिरछी रेखाएं एक दूसरे को क्रॉस करके चल रही होती हैं। जब इनका चलना बंद होता है तो सामने से चेहरे के ऊपर गोलों की बरसात जैसी होने लगती है। दूर से छोटे-छोटे गोले आते हुए दिखाई देते हैं जैसे ही वह पास आते जाते हैं उनका आकार बढ़ता जाता है। इस प्रकार के गोलों की बरसात काफी देर तक होती रहती है
दृश्य नंबर 4 इन बरस रहे गोलों की बरसात जब बहुत तेज हो जाती है तब ऐसा लगने लगता है जैसे कि सफेद आकाश उबल रहा है। इसके बाद यह उबलता हुआ आकाश और भी अद्भुत प्रकाश से युक्त हो जाता है। इस आकाश के कई तरह के बहुत ही अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं।
प्रकाश के दृश्यों को काफी देर तक स्थिर रखने की विधि
ध्यान की अवस्था में बहुत ही अद्भुत प्रकाश के दृश्य दिखाई देते हैं, लेकिन वह कुछ देर बाद ही चले जाते हैं जबकि हम चाहते हैं कि यह अद्भुत दृश्य इसी तरह से लगातार दिखाई देते रहें। इसके लिए हम विभिन्न प्रयोग करते रहे। दृश्यों को स्थिर रखने के लिए हम उसी तरह हाथ पांव मारते रहे जिस तरह से हम पानी में तैरना सीखने के लिए अपने हाथ पांव चलाते हैं।
अपने उद्देश्य में मुझे सफलता भी मिली। प्रकाश के दृश्य देखने की विधि के साथ अपनी श्वास पूरी तरह बाहर निकाल दें और वही पर अपनी सांस को रोक दें इसके बाद अपने पेट को ऊपर सिकोड़ने से जो अंदर प्रकाश पहले से दिखाई दे रहा था वह प्रकाश और भी बहुत तेज दिखाई देने लगता है जब हमारी सांस लगता है कि अब नहीं रुकेगी कुछ समय प्रकाश बहुत ही अधिक तेज हो जाता है लेकिन फिर हमें सांस लेनी पड़ती है इसी सांस बाहर निकालनें तथा अपने पेट को ऊपर की तरफ सिकोड़ने से भीतर दिखाई देने वाला प्रकाश वहीं पर स्थिर हो जाता है बल्कि प्रकाश और अधिक तेज हो जाता है तथा नये-नये प्रकाश के दृश्य दिखाई देने लगते हैं।
जितनी देर तक हम इस प्रक्रिया को दोहराते रहते हैं हम अद्भुत प्रकाश को लगातार देखते रहते हैं।
दृश्य नंबर 5 एक सफेद प्रकाश का गोला दिखाई देता है। इस गोले की बाहरी कक्षा में एक के बाद एक कई गोले और भी होते हैं जोकि अलग-अलग रंग के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं केंद्र में एक छोटा सा गोला होता है। जब हम सांस बाहर निकालने और अपने पेट को ऊपर की तरफ सिकोड़ने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। तो यह प्रकाश बहुत ही अद्भुत तथा तेज मर्करी जैसा प्रकाश हो जाता है।
प्रकाश का सबसे केंद्र वाला छोटा गोला एक सफेद गोभी के फूल में परिवर्तित हो जाता है उसके नीचे की तरफ जड़बाली डंडी भी निकल आती है। कुछ देर बाद वह डंडी नीले रंग की हो जाती है।
इसके बाद वह फूल गायब हो जाता है तथा उसकी जगह पर एक बड़ा सा वृक्ष दिखाई देता है इस वृक्ष के कुछ देर बाद कई वृक्ष और झाड़ियां जैसी भी दिखाई देती हैं।
दृश्य नंबर 6 प्रकाश के गोले के चारों तरफ रेडिएशन निकलने लगता है तथा आतिशबाजी जैसा दृश्य दिखाई देता है। थोड़ी देर बाद धीरे-धीरे यह रेडिएशन शांत होता जाता है। शांत होने के बाद जैसे ही हम अपने साथ बाहर निकाल कर अपने पेट को ऊपर सिकोड़ने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। उसी तरह की प्रकाशमय गोले से उसी तरह का कंपन फिर से चालू हो जाता है कुछ देर तक है आतिशबाजी जैसा दृश्य दिखाई देता रहता है इसके बाद जैसे ही यह कंपन बंद होते हैं। उसके बाद
गोले के बीच में एक बिंदु पर तेजी से कंपन चालू हो जाता है। पहले तो ऐसा लगता है कि बीच के बिंदु पर कुछ तेजी से घूम रहा हो लेकिन ध्यान से देखने पर वहां पर कुछ भी घूमता नहीं है बल्कि तेजी से कंपन हो रहा होता है।
ऐसे दृश्य देखकर ऐसा लगता है कि अब हमारा सहस्त्रार चक्र खुलने ही वाला है लेकिन ऐसे अद्भुत दृश्यों का कहीं अंत ही नहीं आता।
प्रतिदिन एक से एक बढ़कर हैरतअंगेज दृश्य दिखाई देते हैं।
(इति समाप्ति)
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

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