धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 20 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 20 मार्च 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 02:45 AM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 11:31 PM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं। जो राशि स्वामी मंगल का शत्रु है।
⚜️ योग – वज्र योग 06:19 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : गर – 01:44 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 02:45 ए एम, मार्च 21 तक विष्टि
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:1:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:59:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:50 ए एम से 05:37 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:14 ए एम से 06:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:04 पी एम से 12:53 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:18 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:30 पी एम से 06:54 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:32 पी एम से 07:43 पी एम
💧 अमृत काल : 11:57 ए एम से 01:44 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, मार्च 21 से 12:52 ए एम, मार्च 21
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:25 ए एम से 11:31 पी एम
❄️ रवि योग : 11:31 पी एम से 06:24 ए एम, मार्च 21
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-होलिका में हल्दी लगाकर श्रीफल अर्पित करें।
🌳 *वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ विश्व विक्लांग दिवस, फ्रेंच भाषा दिवस, पखाल दिवस, ट्यूनीशिया स्वतंत्रता दिवस, अभिनेत्री गायत्री जोशी जन्म दिवस, भारतीय अभिनेत्री कंगना राणावत जन्म दिवस, ख्यातिप्राप्त भारतीय पार्श्वगायिका अलका याग्निक जयन्ती, विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस, सामाजिक अधिकारिता स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस, विश्व गौरैया दिवस, भारतीय अभिनेता गणेश वेंकटरमन जन्म दिवस, गोल्फ खिलाड़ी अर्जुन अटवाल जन्म दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है। 🗽 *_Vastu tips* 🏝️
पति-पत्नी के रिश्ते होंगे मजबूत वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेड का सिरहाना दक्षिण दिशा में होना शुभ माना जाता है। इससे दांपत्य जीवन सदैव सुखमय होता है और पति-पत्नी के रिश्ते में मजबूती आती है। इसके अलावा दांपत्य जीवन में आ रही बाधा दूर होती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण के अलावा उत्तर दिशा को भी शुभ माना जाता है। किसी नए काम की शुरुआत के दौरान उत्तर दिशा की तरफ मुंह होना उत्तम माना जाता है। इससे काम में सफलता प्राप्त होती है। इसके अलावा पूजा के दौरान जातक का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना शुभ माना गया है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मसूर की दाल के कुछ संभावित नुकसान:
पाचन संबंधी समस्याएं: मसूर की दाल में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो कुछ लोगों में गैस, सूजन या पेट दर्द का कारण बन सकती है।
एलर्जी: कुछ लोगों को मसूर की दाल से एलर्जी हो सकती है, जिससे खुजली, चकत्ते या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
किडनी की समस्या: मसूर की दाल में प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है, जो किडनी की समस्याओं वाले लोगों के लिए हानिकारक हो सकती है।
वात दोष: आयुर्वेद के अनुसार, मसूर की दाल वात दोष को बढ़ा सकती है, जिससे जोड़ों में दर्द, कब्ज या अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
🧉 आरोग्य संजीवनी 🍶
रेक्टल प्रोलैप्स के प्रमुख कारण और जोखिम कारक
लंबे समय तक कब्ज या मलत्याग में अत्यधिक जोर लगाना – जब व्यक्ति लंबे समय तक कब्ज से ग्रस्त रहता है या शौच के दौरान बहुत अधिक जोर लगाता है, तो इससे मलाशय की दीवारें कमजोर हो सकती हैं और धीरे-धीरे मलद्वार से बाहर आने लगती हैं।
मांसपेशियों की कमजोरी – उम्र बढ़ने के साथ-साथ पेल्विक फ्लोर और मलाशय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।
प्रसव के बाद की जटिलताएं – कई महिलाओं में नॉर्मल डिलीवरी के दौरान अधिक तनाव और खिंचाव के कारण मलाशय कमजोर हो जाता है, जिससे यह समस्या जन्म ले सकती है।
बार-बार होने वाला डायरिया – यदि किसी को लंबे समय तक दस्त या आंतों में जलन की समस्या रहती है, तो मलाशय की दीवारों पर दबाव पड़ता है और वे कमजोर हो सकती हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
प्राचीन काल की बात है, शेषनाग का एक महा बलवान पुत्र था। उसका नाम मणिनाग था। उसने भक्ति भाव से भगवान शंकर की उपासना कर गरुड़ से अभय होने का वरदान माँगा। भगवान् शंकर ने कहा–‘ठीक है, गरुड़ से तुम निर्भीक हो जाओ।तब वह नाग गरुड़ से निर्भय हो क्षीरसागर भगवान् विष्णु जहाँ निवास करते हैं, वहाँ क्षीर सागर के समीप विचरण करने लगा। उसकी इस प्रकार की धृष्टता देखकर गरुड़ को बड़ा क्रोध आया और उसने मणिनाग को पकड़ कर गरुड़ पाश में बाँधकर अपने घर में बन्द कर दिया।
इधर जब कई दिन तक मणिनाग भगवान शंकर के दर्शन को नहीं आया, तो नन्दी ने भगवान शंकर से कहा–‘हे देवेश ! मणिनाग इस समय नहीं आ रहा है, अवश्य ही उसे गरुड़ ने खा लिया होगा या बाँध लिया होगा। यदि ऐसा न होता तो वह क्यों न आता ?’तब नन्दी की बात सुनकर देवाधिदेव भगवान शिव ने कहा–‘नन्दिन् ! मणिनाग गरुड़ के घर पर बँधा हुआ पड़ा है, इसलिये शीघ्र ही तुम भगवान् विष्णु के पास जाओ और उनकी स्तुति करो। साथ ही स्वयं मेरी ओर से कहकर गरुड़ द्वारा बाँधे गये उस सर्प को ले आओ।
अपने स्वामी भगवान शिव का वचन सुनकर नन्दी ने लक्ष्मीपति भगवान विष्णु के पास जाकर उनकी स्तुति की और उनसे भगवान शंकर का सन्देश कहा।
भगवान शंकर का सन्देश और नन्दी की स्तुति सुनकर नारायण विष्णु बड़े प्रसन्न हुए, उन्होंने गरुड़ से कहा–‘हे वैनतेय ! तुम मेरे कहने से मणिनाग को बन्धन मुक्त कर नन्दी को सौंप दो।’यह सुनकर गरुड़ क्रोधित हो गया। अहंकार में आकर बोला कि ‘स्वामी जन अपने भृत्यों को पुरस्कार देते हैं और एक आप हैं, जो मेरे द्वारा प्राप्त वस्तु को भी हर लेना चाहते हैं। हे नारायण ! मेरे बल से ही आप दैत्यों पर विजय प्राप्त करते हैं और स्वयं ‘मैं महाबलवान हूँ’, ऐसी डींग हाँकते हैं।
गरुड़ की अहंकारपूर्ण बातें सुनकर भगवान विष्णु ने हँसते हुए कहा–‘पक्षिराज ! तुम सचमुच मुझे पीठ पर ढोते-ढोते दुर्बल हो गये हो। हे खगश्रेष्ठ ! तुम्हारे बल से ही मैं सब असुरों को जीतता हूँ, जीतूँगा भी। अच्छा, तुम मेरी इस कनिष्ठि का अँगुली का भार वहन करो।’
यह कहकर भगवान विष्णु ने अपनी कनिष्ठिका अँगुली गरुड़ के सिर पर रख दी। अँगुली के रखते ही गरुड़ का सिर दबकर कोख में घुस गया और कोख भी दोनों पैरों के बीच घुस गयी, उसके समस्त अंग चूर-चूर हो गये ।तब वह अत्यन्त लज्जित, दीन, व्यथा से कराहता हुआ हाथ जोड़कर विनीत भाव से बोला–‘हे जगन्नाथ ! मुझ अपराधी भृत्य की रक्षा करो–रक्षा करो। प्रभो ! सम्पूर्ण लोकों को धारण करने वाले तो आप ही हैं। हे पुत्रवत्सल ! हे जगन्माता ! मुझ दीन-दुखी बालक की रक्षा करो।’ यह कहकर गरुड़ ने भगवान की प्रार्थना की।
यह देखकर करुणामयी भगवती लक्ष्मी ने भगवान जनार्दन से प्रार्थना की कि ‘प्रभु ! गरुड़ आपका सेवक है, उसका अपराध क्षमा कर उसकी रक्षा करें।’
भगवान् ने भी गरुड़ को विनीत और अहंकार रहित देखकर कहा कि ‘गरुड़ ! अब तुम भगवान शंकर के पास जाओ। भगवान शंकर की कृपा दृष्टि से ही तुम स्वस्थ हो सकोगे।’
गरुड़ ने प्रभु की आज्ञा स्वीकार कर नन्दी और मणिनाग के साथ गर्वरहित हो मन्दगति से भगवान शंकर के दर्शन के लिये प्रस्थान किया। उनका गर्व दूर हो चुका था। भगवान शंकर का दर्शनकर और उनके कहने से गौतमी गंगा में स्नानकर वे पुनः वज्रसदृश देहवाले और वेगवान हो गये।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।

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