धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 01 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 01 जून 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 07:59 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 09:36 PM तक उपरांत मघा
💫 नक्षत्र स्वामी – आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है. आश्लेषा नक्षत्र का देवता नाग (सर्प) है।
⚜️ योग – ध्रुव योग 09:11 AM तक, उसके बाद व्याघात योग
प्रथम करण : कौलव – 08:00 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 07:59 पी एम तक गर
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:18:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:44:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:38 पी एम से 03:33 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:13 पी एम से 07:34 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:15 पी एम से 08:15 पी एम
💧 अमृत काल : 07:58 पी एम से 09:36 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:39 ए एम, जून 02
❄️ रवि योग : 05:24 ए एम से 09:36 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय- विष्णु मंदिर में ताम्र पात्र चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ रवि योग/ मूल समाप्त/ अरण्य षष्ठी/ विंध्यवासिनी पूजा/ सीतला षष्ठी पूजा (उड़िसा)/ साईं टेउॅंराम पुण्य तिथि/ प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार जन्म दिवस, भारतीय महिला क्रिकेटर राजेश्वरी गायकवाड़ जन्म दिवस, सत्येंद्रनाथ टैगोर जयन्ती, नरगिस दत्त जन्म दिवस, अशोक कुमार जन्म दिवस, लक्ष्मी अग्रवाल जन्म दिवस, दिनेश कार्तिक जन्म दिवस, स्वामीनारायण पुण्य तिथि, नाना पलशिकर स्मृति दिवस, नीलम संजीव रेड्डी पुण्य तिथि, वैश्विक अभिभावक दिवस, विश्व रीफ जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय नेल पॉलिश दिवस, दादा भाई नौरोजी स्मृति दिवस, माता-पिता का वैश्विक दिवस, वास्तुकला दिवस, वर्ल्ड मिल्क डे, संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन विश्व दुग्ध दिवस, बाल दिवस (Children’s Day), जैतून दिवस (National Olive Day)
✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु के अनुसार, धूप-अगरबत्ती या पूजा की चीजें को बाथरूम में नहीं फेंकनी चाहिए। कुछ लोग पूजा के बाद बची अगरबत्ती या दीपक को बाथरूम में फेंक देते हैं। यह वास्तु दोष का कारण बन सकता है और मां लक्ष्मी का अपमान माना जाता है।
टूटी हुई चप्पल अगर आपके बाथरूम में भी टूटे-फूटे चप्पल रखी हुए है, तो उन्हें तुरंत वहां से हटा दें। ऐसा माना जाता है कि टूटी हुई चप्पल बाथरूम में रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में परिवारिक कलह का सामना करना पड़ता है।
टूटा हुआ आइना या शीशा वास्तु के अनुसार, टूटा हुआ दर्पण घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाता है और यदि ये बाथरूम में पड़ा हो, तो यह आपके आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता पर असर डालता है। इसलिए इन्हें बाथरूम नहीं रखना चाहिए।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कॉकरोच इस उपाय के डर से घबराये : खाली कॉलिन स्प्रे की बोटल में नहाने वाली साबुन का घोल भर लें । कॉकरोच दिखने पर उनके ऊपर इसका स्प्रे कर दें । साबुन का यह घोल कॉकरोच को मार देता है । रात के समय सोने से पहले वॉशबेसिन आदि के पाईप के पास भी इस घोल का अच्छी मात्रा में स्प्रे कर देना चाहिये ऐसा करने से कॉकरोच नाली के रास्ते घर में अंदर नही घुस पायेंगे।
चींटी नही आयेगी घर मे : चींटी अगर घर में एक जगह बना लेती हैं तो जगह जगह से निकलने लगती हैं। चींटी के रास्ते बंद करने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि उनके निकलने की जगह पर एक दो स्लाईस कड़वे खीरे के रख दें। कड़वे खीरे की महक से चींटी दूर भागती हैं और जब उनके निकलने की जगह पर ही यह स्लाईस रखा होगा तो वे निकलेंगी ही नहीं। चींटियों के बिल के मुहाने पर लौंग फँसा कर रखदेने से चींटियॉ उस रास्ते का प्रयोग करना ही बंद कर देती हैं ।
मक्खियाँ निकट भी ना आये : घर में उड़ने वाली मक्खियों से मुक्ति पाने के लिये नीम्बू का इस्तेमाल करना चाहिये । नीम्बू मक्खियों को दूर करने का बहुत कारगर उपाय है । घर में पोछा लगाते समय पानी में 2-3 नीम्बू का रस निचोड़ देना चाहिये । नीम्बू की महक से कई घण्टे तक मक्खियॉ दूर रहती हैं और घर में ताजगी का भी अहसास होता रहता है ।
🩸 आरोग्य संजीवनी 🩸
छोटी आंत को नुकसान या समस्या: पोषक तत्वों का अधिकांश अवशोषण छोटी आंत में होता है। अगर इसकी अंदरूनी परत क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो भोजन शरीर में नहीं लगता। सीलिएक रोग : ग्लूटेन (गेहूं, जौ, राई में पाया जाने वाला प्रोटीन) के सेवन से छोटी आंत की परत को नुकसान पहुंचता है। क्रोहन रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस : ये आंतों में सूजन संबंधी बीमारियाँ हैं जो आंत की परत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। छोटी आंत में जीवाणु अतिवृद्धि : छोटी आंत में अत्यधिक बैक्टीरिया का बढ़ना, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है। आंतों के संक्रमण: परजीवी, बैक्टीरिया या वायरस के कारण होने वाले गंभीर या लगातार संक्रमण। आंत की सर्जरी: अगर आंत का कोई हिस्सा हटाया गया है, तो अवशोषण के लिए पर्याप्त सतह क्षेत्र नहीं बचता।
आहार और जीवनशैली संबंधी कारक: खराब आहार: कम पोषक तत्वों वाला, अत्यधिक प्रोसेस्ड, तला-भुना या जंक फूड खाना। पानी की कमी : पर्याप्त पानी न पीने से पाचन क्रिया धीमी हो सकती है। अनियमित खानपान: भोजन का सही समय पर न होना। तनाव : अत्यधिक तनाव पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। शारीरिक गतिविधि की कमी: निष्क्रिय जीवनशैली भी पाचन को धीमा कर सकती है। खाना ठीक से न चबाना: अगर भोजन को ठीक से नहीं चबाया जाता है, तो पाचन एंजाइमों को काम करने में दिक्कत होती है।
📚 गुरु भक्ति योग 📗
(राम नाम सत्य है) सिर्फ मृत्यु के समय ही क्यों बोले जाते हैं?
मृत्यु पर राम नाम सत्य है ही क्यों बोला जाता है, शिव या कृष्ण या कोई और क्यों नहीं, क्या वे सत्य नहीं हैं?
उत्तर भारत में मर्यादा को धारण करने वाले श्रीराम आराध्य हैं। जब दो लोग मिलते है तो राम-राम कहकर अभिवादन एक दूसरे का करते हैं। जब किसी से कुछ टूट जाये तो बोलते हैं हे राम! तुमने यह क्या कर दिया। परेशानी में बोलते हैं जैसी प्रभु राम की इच्छा। किसी के घर बच्चा हो तो राम जी की कृपा हो गयी बोलते हैं। राम तो जीवन मे रच बस गए हैं।
इसीतरह अंतिम यात्रा में भी राम नाम सत्य बोलते हैं।
दरअसल शवयात्रा में ‘राम नाम सत्य है’ यह बोलकर मृतक को सुनाना नहीं होता है, बल्कि साथ में चल रहे परिजन, मित्र और वहां से गुजर रहे लोग इस तथ्य से परिचित हो जाएं कि राम का नाम ही सत्य है। साथ ही जब मनुष्य जब राम का नाम लेगा तभी उसकी सदगति होगी। इसलिए इसका मकसद यह कहकर परंपरा शुरू की गई थी कि मृतक के मरने के पीछे जब मनुष्य इतना लड़ते हैं, उसकी संपत्ति के लिए वाद-विवाह करते हैं और संपत्ति का बंटवारा करते हैं, लेकिन अन्य व्यक्ति को भी यह मालूम होना चाहिए कि राम का नाम सत्य है यानि जिसने इस धरती पर जन्म लिया, उसकी मृत्यु निश्चित है। मान्यता है कि इन्हीं सब कारणों की वजह से शवयात्रा में ‘राम नाम सत्य है’ बोलते हैं।
बंगाल में व व्रज में कई जगह शव यात्रा में “हरि बोल” बोलते है। कई जगह “जय जय शिव शम्भो” भी बोलते हैं।
मृत्यु के समय मृतात्मा अपने शरीर घर धन और परिवार को छोड़ ने से ईश्वर की याद बिल्कुल नहिं आती । कुछ साधक स्तर के लोग ही मृत्यु के समय ईश्वर का ध्यान कर पाते है । मृत्यु ke समय राम नाम सत्य बोलने से भगवानों राम के आदर्शों का ध्यान मृतक को आ जाय तो उसकी सद्गति में विशेष सहायता मिल सकती है ।
मृत्यु के समय मृतात्मा का जैसा सोच विचार होता है उसका अगला जन्म उसी के अनुरूप होता है । यह गीता में भगवान कृष्ण ने बताया है ।
जो जीवन भार अच्छे सोच विचार करते उन्हों को मृत्यु के समय भी श्रेष्ठ चिंतन सोच विचार बना रहता है ।इसलिए जीवन भार संज्ञान सद्विचार और सत्कर्मों का आश्रय लेने चाहिए । तभी सद्गति मिलती है ।
मृत्यु पर राम नाम सत्य है ही क्यों बोला जाता है, शिव या कृष्ण या कोई और क्यों नहीं, क्या वे सत्य नहीं हैं?
मृत्यु पर राम नाम सत्य है बोले जाने के कई कारण हैं
दरअसल राम जनमानस में गहरे बसे हैं।
राम एक ओर भगवान विष्णु के अवतार हैं वहीं निर्गुण निराकार ब्रह्म का एक नाम राम ही है।
लोग ईश्वर को याद करते हैं तो भी राम ही बोलते हैं।
कबीरदास जी के निर्गुण निराकार ईश्वर राम ही हैं।
जगतगुरु शंकराचार्य जी के विचार “ब्रह्म सत्यं” को जनसाधारण की भाषा में ‘राम नाम सत्य’ ही बोला जाता है।
हालांकि शिव या कृष्ण ईश्वर के ही नाम हैं, फिर भी निर्गुण, निराकार परमब्रह्म का जनसाधारण में प्रचलित नाम ‘राम’ ही है।
दसरथ नंदन राम के अलावा महर्षि परशुराम और श्रीकृष्ण के भाई बलराम का वास्तविक नाम ‘राम’ ही है।
राम ईश्वर और महान विभूतियों ताकि लोगों को पता चले जिंदगी भर जिस मृग मरीचिका के पीछे भाग रहे थे न कि हाय मेरा बेटा,,मेरा पोता,,मेरी कोठी ,,मेरा महल ,,मेरा मेकअप बॉक्स ,,मेरी तिजोरी ,,मेरी कार ,,,,,,वो सब एक भ्रम था ,,असली सच यही है जो सत्य है और वो है राम का नाम, यही साथ जायेगा बाकी कोई काम नहीं आएगा ,,,खाली हाथ आए थे खाली हाथ जा रहे हो राम के भरोसे अब तुम्हारा उद्धार हो _
सुंदरता और पैसे के पीछे भागते हैं लोग ,,,श्मशान कोई नही कहता कि ये सुंदर या पैसे वाले आदमी /औरत की लाश है वो बस एक लाश एक शव ही होता है सबके लिए तो केवल राम का नाम
लाश ले जाते समय ‘राम नाम सत्य है ‘ ऐसा क्यों कहा जाता है ,’शिव नाम सत्य है ‘ ऐसा क्यों नहीं कहा जाता?
आपका सवाल बहुत बढ़िया है। एक दम मस्त!
बहुत ही काम शब्दों में बता देता हूँ।
जब भारत के रामेश्वरम द्वीप से श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक राम सेतु का निर्माण चल रहा था। तो भगवान राम ने सोचा मेरे नाम का जब पत्थर तैर सकता है। तो मैं तो स्वयं राम हूँ।
चुपके से उन्होंने एक पत्थर उठाया और जैसे ही पानी में डाला वह डूब गया। वहीं पास में खड़े हनुमान जी यह सब देख रहे थे। खिल-खिला कर हँस पड़े और बोले राम से बड़ा राम का नाम।
ऐसा नहीं है कि शिव नाम सत्य है कहने में बुराई है। बिल्कुल कहा जा सकता है। यह तो सदियों से चला आ रहा है। तो चलता ही जा रहा है।
अगर राम नाम सत्य है तो उसे लोगों के मरने पर ही क्यों बोलते हैं, जन्मदिन या अन्य कोई शुभ अवसर पर क्यों नहीं बोलते हैं?
राम नाम विशेष रूप से दिव्य गुणों के कारण सत्य है…. हम अपने जीवन में राम को चेतना के रूप अनुभव करते हैं……वास्तविकता यह है कि सांसारिक सुखों में व्यस्त रहने के कारण हमारी चेतना को दिव्य गुणों का अनुभव हमेशा नहीं होता है……………….,,,,,. जब कोई व्यक्ति शरीर छोडता है…तब परिवार के सदस्यों के साथ स्नेही जनों के द्वारा अंतिम संस्कार के समय राम नाम सत्य का संदेश देते हुए अंतिम विदाई देते हैं……..वास्तविकता यह है कि लोग अपने आपको जीवन भर शरीर ही मानते हैं…जब कोई व्यक्ति शरीर को छोड देता है.. तभी लोगों में श्मशान वेराग्य जागता है और वह भी थोड़ी देर के लिए…. सत्य यह है कि जब चेतन रूप में दिव्य शक्ति शरीर में से निकल जाती है…तब ही समझो कि राम का नाम सत्य है…और देह…असत्य प्रतीत होता है क्योंकि सत्य शरीर से बाहर निकल गया…………..… रही बात शुभ अवसर पर….. राम का नाम सुमिरन तो किया जाता है पर यह कहना कि राम नाम सत्य है…. शोभनीय नहीं लगता है…क्योकि बंदा जीवित है और उसमें राम नाम के रूप चेतन्य शक्ति विधमान है…………. शरीर तो निमित्त मात्र है…कमाल तो देह धारी का है जिसके चलते हम आनंद का अनुभव करते हैं..
अन्तिम यात्रा में राम नाम सत्य ही क्यों बोलते हैं, जबकि मृत्यु के देवता भगवान शिव हैं?
राम शब्द राम अबतार से पहले का है। फिर राम शब्द सगुण राम और निर्गुण राम दोनों में आया है। राम शब्द सदाचार का प्रतीक भी है। इसी लिये मृतक को अंतिम क्रिया पर ले जाते समय राम नाम सत्य है बोला जाता है।
यानी राम का नाम लेना ही सत्य है और सत्य बोलने से ही सदगति होती है।। यही कहने के लिये राम नाम सत्य है सत्य बोलो गत है कहा जाता है।
शिव तो जन्म मरण के चक्र से छुटकारा दिलाने वाले है यानी मोक्ष्य के कारक है। उनसे इसलिये महामुर्तुजय मंत्र का जाप करके अकाल म्रत्यु न होने की कामना की जाती है।
तुलसी दास जी ने मानस में राम नाम की महिमा में कितना अच्छा लिखा है।
अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा॥
मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग ‍निज बस निज बूतें॥(१)
भावार्थ:- निर्गुण और सगुण ब्रह्म के दो स्वरूप हैं, इन दोनों स्वरूपों का वाणी से वर्णन नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह अकथनीय है, इनकी गहराई का अध्यन नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह अगाध है, इनका कोई आरम्भ नहीं है क्योंकि यह अनादि है और इनकी कोई मिसाल भी नही दी जा सकती है क्योंकि यह अनुपम है। मेरी बुद्धि के अनुसार नाम इन दोनों से बड़ा है, जिसने अपने बल से दोनों ब्रह्म को अपने वश में कर रखा है।(१)
प्रौढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की॥
एकु दारुगत देखिअ एकू। पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू॥(२)
भावार्थ:- सज्जन व्यक्ति इस बात को मुझ दास की धृष्टता या कल्पना न समझें, मैं अपने मन के विश्वास, प्रेम और रुचि की बात कहता हूँ। ‍निर्गुण ब्रह्म का ज्ञान उस अप्रकट अग्नि के समान है, जो लकड़ी के अंदर है परन्तु दिखती नहीं है और सगुण ब्रह्म उस प्रकट अग्नि के समान है, जो प्रत्यक्ष दिखलायी देती है।(२)
उभय अगम जुग सुगम नाम तें। कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें॥
ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनाशी। सत चेतन घन आनँद रासी॥(३)
भावार्थ:- निर्गुण और सगुण ब्रह्म दोनों ही जानने में सुगम नहीं हैं, लेकिन नाम जप से दोनों को आसानी से जाना जा सकता हैं, इसी कारण मैंने “राम” नाम को निर्गुण ब्रह्म और सगुण ब्रह्म राम से बड़ा कहा है, जबकि ब्रह्म एक ही है जो कि व्यापक, अविनाशी, सत्य, चेतन और आनन्द की खान है।(३)
अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी॥
नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें॥(४)
भावार्थ:- समस्त विकारों से मुक्त भगवान सभी के हृदय में रहते हैं फिर भी संसार के सभी जीव दीनहीन और दुःखी हैं। नाम के यथार्थ स्वरूप, महिमा, रहस्य और प्रभाव को जानकर श्रद्धा-पूर्वक नाम जपने से ब्रह्म उसी प्रकार प्रकट हो जाता है, जिस प्रकार रत्न की जानकारी होने से उसका मूल्य प्रकट हो जाता है।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।

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