धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 16 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 16 फरवरी 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 02:16 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 04:31 AM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है।नक्षत्र स्वामी चंद्रमा तो राशि कन्या इसका स्वामी बुध है।
⚜️ योग – धृति योग 08:05 AM तक, उसके बाद शूल योग
प्रथम करण : बव – 01:01 पी एम तक
द्वितीय करण : बालव – 02:15 ए एम, फरवरी 17 तक कौलव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:48 बजे से 18:12 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:24:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:36:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:16 ए एम से 06:07 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:42 ए एम से 06:59 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:28 पी एम से 03:12 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:10 पी एम से 06:35 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:12 पी एम से 07:29 पी एम
💧 अमृत काल : 09:48 पी एम से 11:36 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 17 से 01:00 ए एम, फरवरी 17
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:59 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 17
💦 अमृत सिद्धि योग : 06:59 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 17
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर गुड़ के मोदक अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ अमृतसिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ श्रीगणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत (चंद्रोदय रात्रि 09 बजकर 54 मि.) साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय स्मृति दिवस, महान वैज्ञानिक मेघनाद साहा पुण्य तिथि, थोरले माधवराव पेशवा जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफ़र जन्म दिवस, अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध चित्रकार गुलाम मोहम्मद शेख़ जन्म दिवस, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक दादा साहब फाल्के स्मृति दिवस, लिथुआनिया राज्य का दर्जा बहाली दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे जयन्ती, मोटरसाइकिल रेसर वैलेंटिनो रॉसी जन्म दिवस, अभिनेत्री शोमा आनंद जन्म दिवस, उत्पादकता सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा के दौरान पूर्व दिशा में मुख करके पूजा-अर्चना करना श्रेष्ठ रहता है, क्योंकि पूर्व दिशा शक्ति व शौर्य का प्रतीक है। वास्तु शास्त्र में पूजा के लिए पश्चिम की तरफ पीठ करके यानि पूर्वाभिमुख होकर बैठना ज्ञान प्राप्ति के लिए अच्छा माना जाता है। इस दिशा में उपासना करने से हमारे भीतर क्षमता और सामर्थ्य का संचार होता है, जिससे हमें अपने लक्ष्य को हासिल करने में आसानी होती है। इस दिशा में पूजा स्थल होने से घर में रहने वालों को शांति, सुकून, धन, प्रसन्नता और स्वास्थ लाभ मिलता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हार्मोन संतुलन में मदद करे शरीर में प्राकृतिक रूप से हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में सहायक हो सकता है।स्वस्थ हार्मोनल बैलेंस मानसिक और शारीरिक दोनों ही दृष्टि से लाभदायक होता है।
मानसिक तनाव को कम करे यह मस्तिष्क को शांत रखने में मदद करता है।
अच्छी नींद और सकारात्मक मूड को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।
मांसपेशियों की ताकत बढ़ाए यह मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है।
शरीर को अधिक सक्रिय और मजबूत बनाए रखता है।
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
आयुर्वेदिक और घरेलू इलाज: आयुर्वेद में कई प्रभावी जड़ी-बूटियाँ हैं जो बवासीर को जड़ से ठीक कर सकती हैं। त्रिफला चूर्ण, अर्जुन की छाल, हरड़, एलोवेरा, नीम, और नागकेशर जैसी औषधियाँ बवासीर में बहुत फायदेमंद होती हैं। अर्शकल्प वटी, कचनार गुग्गुल, और पंचतिक्त घृत गुग्गुल जैसी आयुर्वेदिक दवाएँ भी असरदार हैं।
✅ एलोपैथिक इलाज: अगर बवासीर बहुत बढ़ चुकी हो तो डॉक्टर्स स्टेरॉयड क्रीम, दर्द निवारक गोलियाँ, और फ्लेवोनॉयड्स युक्त दवाइयाँ लिखते हैं। गंभीर मामलों में रबर बैंड लिगेशन, स्क्लेरोथेरेपी या लेज़र सर्जरी जैसे मेडिकल ट्रीटमेंट भी किए जाते हैं, जो इसे हमेशा के लिए ठीक कर सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
गाँव की मुख्य गली के अंत में रहने वाली सुधा ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया था। वह पढ़ी-लिखी थी, लेकिन अपने परिवार और गाँव के प्रति उसकी जिम्मेदारियाँ उसे शहर में नौकरी करने से रोकती रहीं। उसका परिवार भी कुछ हद तक प्राचीन सोच से बंधा हुआ था, खासकर उसके दादा, जिनकी मान्यता थी कि महिलाएँ दरवाजे पर नहीं बैठेंगी, वरना घर की शांति भंग हो जाएगी। सुधा को यह नियम कभी समझ नहीं आया, लेकिन उसने कभी इसका विरोध भी नहीं किया।
एक दिन, जब घर में सभी लोग किसी काम में व्यस्त थे, सुधा ने अकेले बैठने का फैसला किया। घर का आंगन बड़ा था और सामने के दरवाजे के पास बैठने की जगह खाली थी। वहाँ बैठते ही उसे कुछ अजीब सा महसूस हुआ, जैसे वहाँ किसी ने उसे रोकने की कोशिश की हो। अचानक से हवा तेज़ हो गई और दरवाजा जोर-जोर से हिलने लगा। सुधा ने खुद को समझाते हुए सोचा, “यह तो सिर्फ हवा है, इसमें डरने की क्या बात है?
पुरानी दास्तां रात होते-होते सुधा को अजीब-अजीब सपने आने लगे। उसे लगा जैसे वह किसी और समय में पहुँच गई है। उसके सपने में एक पुरानी हवेली दिखाई दी, जहाँ औरतें दरवाजे के पास बैठी थीं और उन पर अचानक से कोई विपत्ति आ गई थी। वह सपना इतना वास्तविक लग रहा था कि सुधा को यकीन हो गया कि इस दरवाजे के पीछे जरूर कोई रहस्य छिपा है।
सुधा ने गाँव के बुजुर्गों से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे लोग उससे कतराने लगे। “यह बातें महिलाओं के जानने की नहीं हैं,” ऐसा कहकर उसे चुप करा दिया गया। मगर सुधा की जिज्ञासा बढ़ती गई। उसने तय किया कि वह इस रहस्य को जानकर ही मानेगी।
अतीत की परछाई कुछ दिनों बाद, गाँव में एक उत्सव हुआ। इस दौरान सुधा की मुलाकात गाँव के पुराने इतिहासकार जगदीश बाबू से हुई। जगदीश बाबू गाँव के इतिहास और पुरानी परंपराओं पर शोध कर रहे थे। सुधा ने उनसे दरवाजे पर महिलाओं के न बैठने की प्रथा के बारे में पूछा।
जगदीश बाबू ने बताया, “यह मान्यता सदियों पुरानी है। इस गाँव में बहुत पहले एक ऐसा समय था, जब महिलाओं को बहुत स्वतंत्रता थी। वे घर की मुखिया होती थीं और सारे निर्णय वही लेती थीं। लेकिन एक बार गाँव पर बाहरी आक्रमण हुआ। आक्रमणकारियों ने दरवाजे के पास बैठी महिलाओं को निशाना बनाया, क्योंकि वे घर की सीमा की सुरक्षा की प्रतीक मानी जाती थीं। उस दिन गाँव में बहुत बड़ी विपत्ति आई। तब से यह मान्यता बन गई कि महिलाएँ दरवाजे पर नहीं बैठेंगी, ताकि उन्हें और घर को कोई नुकसान न हो।”
सुधा ने सोचा, “तो यह बस अतीत की एक घटना थी, जो आज तक चली आ रही है। लेकिन अब इसका कोई वास्तविक महत्व नहीं है।”
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

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