Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 25 मई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 25 मई 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌑 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 03:51 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अश्विनी 11:12 AM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है. इसके देवता अश्विनी कुमार हैं, जिन्हें देवताओं का चिकित्सक माना जाता है.
⚜️ योग – सौभाग्य योग 11:06 AM तक, उसके बाद शोभन योग
⚡ प्रथम करण : गर – 05:37 ए एम तक वणिज – 03:51 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 02:01 ए एम, मई 26 तक शकुनि
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:19:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:41:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:04 ए एम से 04:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:24 ए एम से 05:26 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:46 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:36 पी एम से 03:31 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:09 पी एम से 07:30 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:11 पी एम से 08:12 पी एम
💧 अमृत काल : 04:09 ए एम, मई 26 से 05:34 ए एम, मई 26
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:38 ए एम, मई 26
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:26 ए एम से 11:12 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻 आज का उपाय- विष्णु मंदिर में बेल का फल चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/भद्रा/मूल समाप्त/नवतपा प्रारंभ/ शिवरात्रि/ सावित्री चतुर्दशी ( बंगाल)/ क्रांतिकारी रासबिहारी बोस जयंती, अभिनेता करण जौहर जन्म दिवस, अभिनेता एवं राजनीतिक सुनील दत्त स्मृति दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार लक्ष्मीकांत पुण्य तिथि, प्रसिद्ध कवि एवं निबंधकार भगवत रावत स्मृति दिवस, अफ़ीका दिवस, रास बिहारी बोस जयंती, विश्व थायरॉइड दिवस, जॉर्डन स्वतंत्रता दिवस, गैर-स्वशासी क्षेत्रों के लोगों के साथ एकजुटता सप्ताह, 25-31 मई
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🗽 Vastu tips 🗼
घर के प्रवेश द्वार पर दीपक वास्तु शास्त्र में भी इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। प्रत्येक संध्या के समय मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। विशेष रूप से दीपक को इस प्रकार रखना चाहिए कि जब कोई व्यक्ति घर से बाहर निकले तो दीपक उसके दाहिने हाथ की ओर हो। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है।
सावधानियां और अन्य वास्तु सुझाव ईशान कोण में भारी सामान न रखें। यह दिशा देव स्थान मानी जाती है, इसलिए यहां गंदगी या भारी वस्तुएं रखने से आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
तिजोरी की दिशा सही हो। घर में धन रखने के लिए तिजोरी या अलमारी को हमेशा दक्षिण दिशा में रखना चाहिए और इसका दरवाजा उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए।
मुख्य द्वार पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। यह सुख-समृद्धि को आकर्षित करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गंगाजल के फायदे और उपाय –जो व्यक्ति रोज गंगा जल पीता है वो निरोगी रहता है और अधिक उम्र तक जीवन व्यतीत करता है.
जिस घर में गंगा जल रखा होता है वहा सकारात्मक उर्जा का वास होता है , उस घर में सुख समृद्धि पाई जाती है.
यदि रात्रि में गंगा जल के बिस्तरों में छाटे मार कर सोया जाये तो बुरे और डरावने सपने नही आते.
पारिवारिक सदस्यों में क्लेश रहता है तो प्रतिदिन सुबह सारे घर में गंगा जल का छिड़काव करें. इस उपाय से घर की नकारात्मकता का नाश होता है और सकारात्मकता का माहौल बनता है.
मरने वाले व्यक्ति के गले में यदि गंगा जल की कुछ बूंदे डाल दी जाये तो उसके प्राण आसानी से निकल जाते है और उसे मुक्ति मिलती है.
गंगा जल विज्ञान के लिए भी चमत्कार है क्योकि यह सालो तक बोतल में रहने के बाद भी खराब नही होता।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
आइए जानते हैं गिलोय के फायदे…
गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता..गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।
ठीक करती है बुखार…अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
मृत्यु के देवता यम को श्री राम तक पहुंचने की हिम्मत कैसे होती, जब उनके महल का प्रहरी, उनका अनन्य भक्त हनुमान, वज्र सरीखी भुजाएं लिए खड़ा थे? यम का अयोध्या में प्रवेश मानो सिंह के गुफा में घुसने जैसा था। तब लीलाधर राम ने एक अद्भुत योजना बनाई।एक दिन, जब प्रभु राम जान गए कि उनके लौकिक लीला का समापन निकट है, उन्होंने हनुमान से कहा – ‘हे पवनपुत्र, अब यमराज को मेरे पास आने दो। मेरे वैकुंठ धाम जाने का समय आ गया है।’ पर भक्ति के सागर में डूबे हनुमान भला यह कैसे स्वीकार करते?’लेकिन हनुमान जी नहीं मान रहे थे
यम के प्रवेश के लिए श्री हनुमान को हटाना जरुरी था।इसलिए तब भगवान राम ने अपनी मुद्रिका, अपनी प्रिय अंगूठी, महल की धरती के एक छोटे से छिद्र में गिरा दी। व्याकुलता का नाटक करते हुए उन्होंने हनुमान से उसे ढूंढ लाने का आग्रह किया। प्रभु की आज्ञा शिरोधार्य कर, हनुमान पल भर में भौंरे के समान छोटे हो गए और उस रहस्यमय छेद में उतर गए।यह छिद्र मात्र एक बिल नहीं था, बल्कि नागों के लोक, नागलोक की ओर जाने वाली एक लंबी सुरंग थी! वहां हनुमान की भेंट नागों के राजा वासुकी से हुई, जिन्हें उन्होंने अपने आने का कारण बताया। वासुकी हनुमान को नागलोक के मध्य में ले गए, जहां अंगूठियों का एक विशाल पर्वत खड़ा था!
यहां आपको श्री राम की अंगूठी अवश्य मिल जाएगी,’ वासुकी ने कहा। हनुमान उस अथाह ढेर को देखकर सोच में पड़ गए – भूसे के ढेर में सुई ढूंढना भी इतना मुश्किल न होगा! किस्मत ने साथ दिया, और पहली जो अंगूठी हनुमान के हाथ लगी, वह भगवान श्री राम की ही थी! आश्चर्य तब और गहरा गया, जब दूसरी अंगूठी भी वही निकली। वास्तव में, उस पूरे पर्वत पर जितनी भी अंगूठियां थीं, सब एक समान थीं! हनुमान का मस्तिष्क चकरा गया – ‘इसका क्या अर्थ है?’
वासुकी मंद-मंद मुस्कुराए और बोले, ‘हे वानरश्रेष्ठ, यह संसार सृष्टि और विनाश के चक्र में घूमता रहता है, और इसके मध्य में कर्म का पहिया चलता है। भगवान राम ने अवतार लेकर यही सिखाया है कि कर्म को कैसे जिया जाए। हर सृष्टि चक्र एक कल्प कहलाता है, और हर कल्प में चार युग होते हैं।’
वासुकी ने आगे कहा, ‘दूसरे युग, त्रेता युग में, भगवान राम अयोध्या में जन्म लेते हैं। एक वानर उनकी अंगूठी का पीछा करता है, और पृथ्वी पर राम मृत्यु को प्राप्त होते हैं। यह अंगूठियों का ढेर ऐसे ही सैकड़ों-हजारों कल्पों से बनता आ रहा है। सभी अंगूठियां सत्य हैं। गिरती रहीं और इनका अंबार बढ़ता रहा। भविष्य के रामों की अंगूठियों के लिए भी यहां पर्याप्त स्थान है।’
अब हनुमान समझ गए कि उनका नागलोक में आना और अंगूठियों के पर्वत से मिलना कोई साधारण घटना नहीं थी। यह स्वयं श्री राम का तरीका था उन्हें यह समझाने का कि मृत्यु एक अटल सत्य है, जिसे कोई रोक नहीं सकता। भगवान राम मृत्यु को प्राप्त होंगे और फिर से जन्म लेंगे।
हे मनुष्य! तुम्हें भवसागर से पार होने के लिए यह सुंदर मानव शरीर रूपी नौका मिली है। कर्म की पतवार को ठीक से थामना होगा। जरा सी चूक, और वासना, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष के भंवर में पड़कर यह नौका डूब जाएगी! सतर्क रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुम स्वयं ही अपनी मुक्ति के मार्ग में बाधा बन जाओ!
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।



