धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 30 सितम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि ••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 30 सितम्बर 2025
30 सितम्बर 2025 दिन मंगलवार को आश्विन शुक्ल के शुक्ल पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज महाष्टमी का महाव्रत भी है। आज की अष्टमी को श्री दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है। आज माता महागौरी के दर्शन और पूजन अवश्य ही करना चाहिए। आज अन्नपूर्णा माता की परिक्रमा दिन में 01.44 PM बजे से किया जाएगा। अष्टमी के दिन ही सायंकाल त्रिमुहूर्त में महानवमी व्रत भी मनाया जाएगा। अष्टमी- नवमी तिथि की सन्धि के कारण होम आदि का भी कार्य लोग आज ही कर सकते हैं। आज ही सायंकाल के उपरांत नवमी में उग्रचामुण्डा देवी की पूजा और बलिदान आदि का भी कार्यक्रम भी की जाएगी। आज रवियोग एवं स्थायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “अन्नपूर्णा माता की परिक्रमा एवं महाष्टमी के पावन महाव्रत” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_

☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 06:06 PM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – मूल – 06:17 ए एम तक पूर्वाषाढा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है. इसके अतिरिक्त, इस नक्षत्र की अधिष्ठात्री देवी जल की देवी अपस हैं।
⚜️ योग – शोभन योग 01:02 AM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : बव – 06:06 पी एम तक
द्वितीय करण – बालव – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:13:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:55:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:37 ए एम से 05:25 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:01 ए एम से 06:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:47 ए एम से 12:35 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:10 पी एम से 02:58 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:08 पी एम से 06:32 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:08 पी एम से 07:21 पी एम
💧 अमृत काल : 02:56 ए एम, अक्टूबर 01 से 04:40 ए एम, अक्टूबर 01
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:47 पी एम से 12:35 ए एम, अक्टूबर 01
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मन्दिर में शहद चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दुर्गा अष्टमी/ महाष्टमी उपवास/ सरस्वती पूजन/ अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस, प्रसिद्ध निर्माता एवं निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी जन्म दिवस, मणिपुर के भूतपूर्व मुख्यमंत्री राज कुमार डोरेन्द्र सिंह जन्म दिवस, भारतीय बोर्डिंग स्कूलों के राष्ट्रीय स्मरण दिवस, हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री राव वीरेन्द्र सिंह स्मृति दिवस, प्रसिद्ध साहित्यकार पंडित श्रद्धाराम शर्मा जन्म दिवस, लेखिका सुमित्रा कुमारी सिन्हा पुण्य तिथि, प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार अल्ताफ़ हुसैन हाली स्मृति दिवस, अभिनेत्री दीपती भटनागर जन्म दिवस, राष्ट्रीय प्रेम दिवस” (National Love People Day)
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
सात भागते घोड़ों की तस्वीर लगाने से क्या होता है?
ये सात भागते घोड़े शक्ति और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इनकी तस्वीर घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है जिससे घर परिवार के लोगों को हर काम में सफलता मिलती है। कई लोग बिजनेस में तरक्की के लिए भी इस तस्वीर को घर की दक्षिण दिशा वाली दीवार पर लगाते हैं। कुछ का ये भी मानना है कि इस तरह की तस्वीर घर में लगाने से वास्तु दोष भी खत्म हो जाता है।* किस दिशा में लगानी चाहिए सात भागते घोड़ों की तस्वीर?
वास्तु अनुसार सात भागते घोड़ों की तस्वीर के लिए दक्षिण दिशा सबसे अच्छी होती है। यदि दक्षिण दिशा में कोई दीवार नहीं है, तो अपने इसके उत्तर या पूर्व दिशा में भी लगा सकते हैं। ध्यान रहे कि घर या ऑफिस में ये तस्वीर इस तरह से लगाएं
* *जिससे घोड़ों का चेहरा अंदर की तरफ रहे। इस तस्वीर को लगाने के लिए घर का ड्राइंग रूम सबसे उत्तम स्थान माना जाता है। कमरे में इसे नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा कमरे के गेट के सामने भी ये तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। पेंटिंग में दिखाई दे रहे घोड़ों पर कोई जंजीर, पट्टा या रस्सी नहीं होनी चाहिए वो स्वतंत्र होने चाहिए। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ अमावस्या का तंत्र और अघोर साधना में महत्व
तांत्रिक और अघोर परंपरा में अमावस्या, अर्थात् नई चाँद की रात, विशेष मानी जाती है।
इस रात चाँद आकाश में नहीं दिखता और चारों ओर गहरा अंधकार होता है।
यह अंधकार भय के रूप में नहीं, बल्कि अंतर-मंथन और साधना के अवसर के रूप में देखा जाता है।
पुरानी कथाओं में कहा गया है कि अमावस्या की रात:
मन और वातावरण शांत रहते हैं, जिससे साधक आत्म-चिंतन कर सकता है।
यह रात जन्म-मृत्यु के चक्र और जीवन की नश्वरता पर ध्यान करने का अवसर देती है।
परंपरागत रूप से पूर्वजों का स्मरण करने (पितृ तर्पण) के लिए भी अमावस्या का समय चुना जाता है।
आज के समय में अधिकतर साधक अमावस्या पर:
मौन साधना या ध्यान करते हैं,
मंत्र-जप करते हैं,
उपवास या साधारण आहार लेते हैं,
और जीवन की अस्थिरता पर विचार करते हैं।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
कृमि रोग (पेट के कीड़े) :10 ग्राम नींबू के पत्तों का रस (अर्क) में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीने से 10-15 दिनों में पेट के कीड़े मरकर नष्ट हो जाते हैं। नींबू के बीजों के चूर्ण की फांकी लेने से कीड़ों का विनाश होता है।
*
➡ सिरदर्द या माइग्रेन :* नींबू के पत्तों का रस निकालकर नाक से सूंघे, जिस व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है, उसे भी इससे शीघ्र आराम मिलता है। यह प्रक्रिया लगातार कुछ दिनों तक करने से ऐसे परिणाम मिलेंगे की आप दाँतो तले उंगलियां दबा लेंगे। हमारे द्वारा किये कुछ पीड़ितों पर यह प्रयोग इतना कारगर निकला की उनकी सिरदर्द/माइग्रेन की समस्या का जड़ सफाया हो गया।
गाय का ताजा घी सुबह-शाम 2-4 बूँद नाक में रुई से टपकाने अथवा सूंघते रहने से आधे सिर की दर्द की पीड़ा जड़ से आराम हो जाती है। साथ ही इसे नक् से खून गिरना भी जड़मूल से नष्ट हो जाता है। 7 दिन तक लें।
*
*सिर के जिस तरफ के भाग में दर्द हो उस तरफ के नथुने में 7-8 बूँद सरसों का तेल डालने अथवा सूंघने से दर्द एकदम बन्द हो जाता है। 4-5 दिन तक दिन में 2-3 बार इसी प्रकार सूंघने से कई बार दर्द सदा के लिए मिट जाता है। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ “जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय”
जिसकी रक्षा स्वयं भगवान करता है उसका कोई बाल भी बाँका नहीं कर सकता।* कहते हैं कि, सच्चा सन्त प्रारब्ध को भी कम कर सकता है और .होनी. को भी टाल सकता है। .सन्त. ईश्वर का ही प्रतीक होता है। वह निरन्तर ईश्वर की सेवा में रहता है इसलिए ईश्वर उसकी हर इच्छा को पूरा करते हैं।*
सन्त शिरोमणि रामदास के पास एक बालक उनकी शिष्यता ग्रहण करने के लिए आया। समर्थ रामदास ने बालक के तेज को पहचान कर उसे अपना शिष्य बना लिया। एक दिन प्रातः वह बालक भिक्षा माँगने को एक गाँव में आया। उस गाँव में एक तांत्रिक रहता था जो स्वभाव से क्रोधी था। गाँव के कुछ शरारती बच्चों ने उस बालक को उसी के घर का दरवाजा दिखा दिया कि वह वहाँ से भिक्षा माँगे।* बालक ने ऐसा ही किया। तांत्रिक जो पूजा कर रहा था उठकर आया और बोला कि यहाँ क्यों आया है ? बालक ने उत्तर दिया कि गुरु की आज्ञा से भिक्षा माँगने आया हूँ। तांत्रिक ने भिक्षा की जगह तीन प्रश्न पूछे कि वह अपने गुरु से पूछ कर बताये –(i) सूर्य से बड़ा कौन है ? (ii) पृथ्वी से महान् कौन है ? और (iii) होनी को कौन टाल सकता है ?*
वह बालक अन्य घरों से भिक्षा माँगकर वापस आया और गुरु के लिए भोजन बनाया। उसने गुरु को तीनों प्रश्नों को बता दिया। गुरु ने मुस्कराकर कहा कि कल सुबह उसी दरवाजे पर जाना और उससे कहना—(1) सूर्य से बड़ा पिता है, (ii) पृथ्वी से महान माता है। (iii) तीसरे प्रश्न का उत्तर गुरु जी स्वयं उसी तांत्रिक को देंगे। बालक ने अगले दिन जाकर ऐसे ही कह दिया। तांत्रिक क्रोधित हुआ और शाप दिया कि जा कल सुबह सूरज निकलने से पहले तू मर जायेगा अपने गुरु से कह देना। यह सुनकर बालक के तो होश उड़ गये और किसी प्रकार डरते-डरते भिक्षा लेकर वापस आया और गुरु के लिए भोजन बनाया और उनको खिलाया।* गुरु जी समझ गए और उससे पूछा कि बालक आज तुम्हारे चेहरे का रंग क्यों उड़ गया है ? बालक ने सारी बात बता दी। गुरु जी यह कहकर विश्राम करने चले गए कि अभी कल होने में तो बहुत देर है अभी से क्यों चिन्ता करता है, परन्तु बालक को चैन कहाँ ? शाम हुई। शाम का भोजन बना। गुरु जी ने खाया। बच्चे ने डर के मारे न दोपहर को न शाम को कुछ नहीं खाया। गुरु जी ने बहुत समझाया कि सुबह होने में तो बहुत देर है अभी से चिन्ता क्यों करता है ?*
अब गुरु जी शयन करने लगे और उस बालक से कहा कि तू मेरे पैर दबाता रह और जब तक मैं न कहूँ कहीं जाना मत। बालक पैर दबाता रहा। आधी रात में उस तांत्रिक ने अपनी सिद्ध की हुई यक्षिणी को उस बालक को मारने के लिए भेजा। वह वहाँ आई लेकिन गुरु के तेज के कारण उसके पास न जा सकी। उसने बालक की माँ का भेष बनाया और खीर का कटोरा लेकर बोली “बेटा! तू बहुत दिनों से घर नहीं आया है—ले मैं तेरे लिए खीर लाई हूँ खीर खा ले।”* बालक ने उत्तर दिया-“माँ ! गुरु जी सोए हुए हैं और उनकी आज्ञा बिना मैं तेरे पास नहीं आ सकता। ला यहीं आकर खीर दे दे।” लेकिन वह यक्षिणी गुरु जी के पास नहीं आई। फिर थोड़ी देर बाद उसके पिता के रूप में आई और डाँट कर कहा, “अरे पुत्र! तूने माँ को लौटा दिया। आ मेरे पास आ।” पर बालक गुरु जी के पैर छोड़कर नहीं गया। थोड़ी देर में वह शक्ति क्रोधित हो उस तांत्रिक के पास गई और बोली—”दुष्ट तूने आज एक सन्त का अहित करने भेजा जो मैं न कर पाई—अब मैं तेरे पास से जा रही हूँ।” सुबह हुई। सूरज निकला। गुरु जी उठे और बोले-“अरे बालक तू तो जिन्दा बैठा है तुझे तो इस समय तक मर जाना चाहिए।” तब तक शिष्य गुरु की शक्ति समझ चुका था।*
उसकी अश्रुधारा बहने लगी और गुरु के चरणों को धोने लगा। तभी वह तांत्रिक गुरु जी के चरणों में आकर गिर गया। गुरु जी बोले-“हे तांत्रिक ! तेरे तीसरे प्रश्न का उत्तर यह है कि होनी को भी सच्चा सन्त टाल सकता है।” सच ही कहा है कि
“जाको राखे साइयाँ मार सके नहिं कोइ। बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होइ।।”
🙏🌹🌸 राधे राधे 🌸🌹🙏
◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉►
⚜️ *अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।। *मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

Related Articles

Back to top button