Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 12 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 12 फ़रवरी 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌑 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – बुधवार माघ माह के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 07:35 PM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी : अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध ( होता है।
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 07:05 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 07:22 पी एम तक बालव
⚜️ योग : सौभाग्य योग 08:06 AM तक, उसके बाद शोभन योग
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 1:59 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:27:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:33:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:19 ए एम से 06:10 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:45 ए एम से 07:02 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:27 पी एम से 03:11 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:07 पी एम से 06:32 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:09 पी एम से 07:26 पी एम
💧 अमृत काल : 05:55 पी एम से 07:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 13 से 01:01 ए एम, फरवरी 13
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी पवित्र नदी में स्नान उपरान्त किसी बटुक को हरे फल भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : माघ स्नान समाप्ति/ गुरु रविदास जयंती/ पूर्णिमा समाप्ति रात्रि 07.22/ माघी पूर्णिमा-(स्नान/दान/व्रत), गुलाब दिवस, राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस, सर्वोदय दिवस, प्रसिद्ध विद्वान गोपी कुमार पोदिला पुण्य तिथि, उद्योगपति राहुल बजाज स्मृति दिवस, भारतीय योगाचार्य धीरेन्द्र ब्रह्मचारी अवतरण दिवस, अभिनेत्रा प्राण जन्म दिवस, प्रखर सुधारवादी संन्यासी दयानंद सरस्वती अवतरण दिवस, बाल सैनिकों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस, उद्योगपति निसा गोदरेज जन्म दिवस, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री महामायाप्रसाद सिन्हा स्मृति दिवस, हास्य अभिनेता ओम प्रकाश पुण्य तिथि, राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह (12 से 18 फरवरी)
✍🏼 तिथि विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🗽 Vastu tips 🗼
देवी-देवताओं वाली लॉकेट न करें धारण
ज्योतिष शास्त्र की मानें तो कभी भी देवी-देवताओं वाले या फिर उनकी बनावट वाले लॉकेट नहीं पहननी चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, रोजमर्रा की जिंदगी में शरीर पर गंदगी लग जाती है और वो लॉकेट में भी जमा होती है। वहीं कई बार ऐसा होता है कि बिना हाथ धोए ही लोग गंदे हाथ से लॉकेट पहन लेते हैं जो भगवान का अपमान है। इससे घर में नकारात्मक शक्तियां हावी हो सकती है। साथ ही आपको जीवन में कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भगवान वाले लॉकेट पहनने से मना किया जाता है।
ये लॉकेट होते हैं शुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार, चांदी, पीतल और तांबे से बना लॉकेट शुभ माना जाता है। लेकिन वास्तु कहता है कि किसी भी धातु को बिना जानकारी के धारण नहीं करना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पाचन में सहायक: शहद पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह कब्ज, एसिडिटी और गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
ऊर्जा का स्त्रोत: शहद प्राकृतिक रूप से ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। थकान और कमजोरी दूर करने में मददगार साबित होता है।
त्वचा के लिए लाभकारी: शहद त्वचा को पोषण देता है और मुलायम बनाता है। यह मुंहासों, दाग-धब्बों और जलन से राहत दिलाता है।
खांसी-जुकाम में आराम: शहद गले की खराश, खांसी और जुकाम में आरामदायक होता है। गर्म पानी में शहद मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
नींद की समस्याओं में सहायक: शहद नींद को बेहतर बनाने में मददगार होता है। सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में शहद मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
शतावरी फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, जो पाचन को नियमित करने और कब्ज को रोकने में मदद कर सकता है। यह पेट के अल्सर और सूजन आंत्र रोग जैसी स्थितियों वाले लोगों को भी फायदा पहुंचा सकता है।
यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकता है। शतावरी में एडाप्टोजेनिक गुण होते हैं जो तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे अनिद्रा और अवसाद जैसी स्थितियों वाले लोगों को फायदा हो सकता है।
शतावरी को कैप्सूल, टैबलेट, पाउडर या तरल के रूप में पूरक के रूप में लिया जा सकता है। इसे ताजी, जमी हुई या डिब्बाबंद सब्जी के रूप में भी खाया जा सकता है।शतावरी आम तौर पर सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन कुछ लोगों को दुष्प्रभाव हो सकते हैं जैसे पेट खराब होना, दस्त, और सिरदर्द। यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो शतावरी लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
माघ पूर्णिमा की तिथि को हिंदू धर्म में काफी महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही इस दिन शिव पूजा का भी बड़ा महत्व है। पूर्णिमा के दिन भगवान नारायण जल में निवास करते हैं, ऐसे में इस दिन पितृ दोष से छुटकारा पाने का भी बढ़िया मौका है। 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा मनाई जाएगी, ऐसे में आइए जानते है आचार्य श्री गोपी राम से कि इसके लिए कौन से उपाय करने चाहिए…
पितृ दोष क्यों लगता है?
पितृ दोष एक प्रकार का कर्मिक दोष है जो अपने पूर्वजों के अनादर, उनकी उपेक्षा या उनके प्रति किए गए कामों के कारण होता है। यह दोष हमारे जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। पितृ दोष के कारण हैं, पूर्वजों का अनादर या उपेक्षा, पूर्वजों के प्रति किए गए अपराध, पूर्वजों की इच्छाओं का पालन न करना और पूर्वजों के लिए तर्पण या श्राद्ध न करना।
सुबह करें इनका पाठ
जिन जातकों को पितृदोष लगा हुआ है, उन्हें इस दिन पूजा-पाठ जरूर करना चाहिए। इस दिन जातक को सुबह उठकर स्नान करना चाहिए, फिर सूर्य को जल दें और फिर अपने पितरों के नाम से पीपल पर जल जरूर चढ़ाएं। इसके बाद शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर एक लोटा जल, कच्चा दूध, तिल, सफेद फूल, बिल्व पत्र, भांग और धतूरा चढ़ाएं। इसके बाद जातक को पितृसूक्त, पितृ चालीसा, गंजेंद्र मोक्ष, पितृ स्तोत्र, पितृ कवच का पाठ करना चाहिए। अंत में भगवान शिव की आरती करें। इससे पितृ और भगवान शिव प्रसन्न होंगे और जातक को पितृदोष से मुक्त करेंगे।
शाम को करें ये काम
इस दिन नदी तट पर या नदी में दीपदान करने का महत्व भी है, माना गया है कि इससे देवी और देवता खुश होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है। जातक को शाम में तुलसी के नीचे और पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जरूर जलाना चाहिए। इससे आपके सारे कष्ट दूर होंगे।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।।
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।।



