Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 13 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 13 अक्टूबर 2025
13 अक्टूबर 2025 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष कि सप्तमी तिथि है। परंतु आज शाम को प्रदोष काल में कालाष्टमी का पालन व्रत भी मनाया जाएगा। अहोई अष्टमी का परम पवित्र व्रत भी आज ही होगा। आज ही है सब शाम को प्रदोष काल में और चंद्रोदय के साथ ही मनाया जाएगा। आप सभी सनातनियों को “कालाष्टमी एवं अहोई अष्टमी के परम पवित्र व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास प्रारंभ
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 12:24 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आद्रा 12:26 PM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है. आर्द्रा नक्षत्र के देवता भगवान शिव के रुद्र रूप, रुद्र हैं।
⚜️ योग – परिघ योग 08:10 AM तक, उसके बाद शिव योग 05:55 AM तक, उसके बाद सिद्ध योग
⚡ प्रथम करण : बव – 12:24 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 11:41 पी एम तक कौलव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:15:00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 05:54:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:41 ए एम से 05:31 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:06 ए एम से 06:21 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:30 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:03 पी एम से 02:49 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:53 पी एम से 06:18 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:53 पी एम से 07:08 पी एम
❄️ रवि योग : 06:21 ए एम से 12:26 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:42 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 14
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ कालाष्टमी/ राधा कुण्ड स्नान/ कराष्टमी/ अहोमी/ अष्टमी/ भारतीय अभिनेता अशोक कुमार जन्म दिवस, पाकिस्तानी गायक नुसरत फतेह अली खान जन्म दिवस, अभिनेत्री पूजा हेगड़े जन्म दिवस, प्रमुख संसदीय नेता भूलाभाई देसाई जयन्ती, श्री माधवाचार्य जयंती, अंतर्राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण दिवस, संयुक्त राज्य अमेरिका नौसेना स्थापना दिवस, रजत जयंती, भारतीय पार्श्व गायक किशोर कुमार स्मृति दिवस, विश्व दृष्टि दिवस, विश्व डाक दिवस (सप्ताह), राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह)
✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗼 Vastu tips 🗽
ग्रह दोष शांति के उपाय
मंगल दोष में हनुमान जी को गुड़ और चना अर्पित करें और शनि दोष के लिए काली उड़द और तेल पीपल के नीचे रखें। वहीं, राहु-केतु दोष शांति हेतु रोज सफेद चंदन का तिलक लगाएं और गणेश जी की पूजा करें।
इस उपाय से घर की नेगेटिविटी होगी दूर
*अपने घर के मेन गेट पर गंगाजल का छिड़काव करके सिंदूर का तिलक कर दें। आपको अपने घर के नौ कोनों में कपूर जलाना होगा, जिससे घर की नेगेटिव एनर्जी दूर होगी। पूजा के दौरान रोज शंख और घंटी बजाने से वास्तु दोष दूर होता है। इसके अलावा घर में गुड़ और चने का प्रसाद बांटने से राहु दोष शांत होता है। इसे घर में शांति बनाए रखने का भी असरदार उपाय बताया गया है।
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*आयुर्वेद में सुरण कंद को पाचनसंस्था के लिए विशेषरूप से लाभदायी बताया गया है।इस में पाचन, वातानुलोमक, क्षुधावर्धक गुण होते है और इसीलिए गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल प्रणाली पर इस का उल्लेखनीय प्रभाव होता है। *बवासीर, उल्टी, भूख न लगना, अपचन, पेट फूलना, पेट का दर्द, कब्ज, हेपेटाइटिस जैसे पचन संबंधी समस्याओं में यह काफी फायदेमंद है।
*सूरनकंद में क्वेरसेटिन, रुटिन, साइटोस्टेरोल आदि फाइटोकॉन्स्टिट्यूएंट्स मौजूद होते है। *प्रायोगिक अध्ययन में सूरनकंद में एनाल्जेसिक (वेदना नाशक), एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडन्ट, साइटोटोक्सिक, जीवाणुरोधी और ऐंटिफंगल गतिविधिया देखी गयी है।
*बवासीर में यह विशेषरूप से लाभदायक है। इसीलिए इस का एक नाम – अर्शारि (अर्श याने बवासीर का अरि याने शत्रू)सूरन के छोटे टुकड़े कर उन्हें भाप में पका लें। तिल तेल में इन की सब्जी बनाकर खाएं और बाद में ताजा छाछ पिएं। यह सभी प्रकार के बवासीर में फायदा पहुंचता है। इसे लगातार तीस दिन तक करें। *खूनी बवासीर में सूरन की सब्जी के साथ इमली की पत्तियां एवं चावल खाने से लाभ होता हैं।
🧋 आरोग्य संजीवनी 🍶
अपामार्ग के गुण: आयुर्वेद के अनुसार, इसका स्वाद ‘कटु’ (तीखा) और ‘तिक्त’ (कड़वा) होता है। इसकी तासीर ‘उष्ण’ (गर्म) होती है और यह पचने में ‘लघु’ (हल्का) और ‘रूक्ष’ (सूखा) होता है। यह मुख्य रूप से बढ़े हुए कफ और वात दोष का शमन करता है।
*पेशाब संबंधी रोग (मूत्र रोग): यह एक उत्तम ‘मूत्रल’ (Diuretic) औषधि है। यह पेशाब की मात्रा को बढ़ाकर मूत्र मार्ग की सफाई करता है, जिससे पेशाब में जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना और पथरी जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है। *बवासीर (अर्श): अपनी गर्म तासीर और पाचन को सुधारने वाले गुणों के कारण यह कब्ज को दूर करता है। इसका ‘रूक्ष’ गुण मस्सों को सुखाने में मदद करता है।
*पेट के कीड़े (कृमि रोग): अपामार्ग एक प्रसिद्ध ‘कृमिघ्न’ (कीड़े मारने वाली) औषधि है। इसका कड़वा और तीखा स्वाद पेट में कीड़ों को खत्म करके मल के रास्ते बाहर निकाल देता है। दर्द और सूजन (शूल और शोथ): इसका ‘वात-शामक’ गुण इसे एक बेहतरीन दर्द निवारक बनाता है। यह ‘शोथहर’ (सूजन कम करने वाला) भी है, जिस कारण इसके पत्तों का लेप जोड़ों के दर्द और सूजन पर लगाया जाता है। 🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌸 ब्रह्मराक्षस कौन होते हैं?
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मराक्षस वे आत्माएँ होती हैं जो अपने जीवनकाल में ब्राह्मण होती हैं लेकिन कुछ कारणों से श्राप या अधर्म के चलते मृत्यु के बाद राक्षस योनि में जन्म लेती हैं। ये आत्माएँ अपार शक्ति और ज्ञान से युक्त होती हैं, लेकिन साथ ही अति क्रोधी और प्रतिशोधी भी होती हैं। जब तक इनका उचित रूप से तर्पण (श्राद्ध) या शांति अनुष्ठान नहीं किया जाता, तब तक वे भटकती रहती हैं।
थिरूनक्कारा मंदिर और ब्रह्मराक्षस की कथा
कहते हैं कि सैकड़ों वर्ष पहले इस मंदिर में एक अत्यंत विद्वान ब्राह्मण तांत्रिक रहते थे। वे भगवान शिव के परम भक्त थे और गूढ़ तांत्रिक साधनाओं में निपुण थे। उन्होंने मंदिर के संरक्षण और आध्यात्मिक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए कई कठिन अनुष्ठान किए। लेकिन उनकी सिद्धियों के कारण कुछ अन्य तांत्रिक उनसे ईर्ष्या करने लगे।
एक दिन एक अन्य तांत्रिक ने उन्हें शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दी। यह कोई साधारण शास्त्रार्थ नहीं था, बल्कि इसमें हारने वाले के लिए मृत्यु का विधान था। विद्वान ब्राह्मण ने चुनौती स्वीकार कर ली, लेकिन दुर्भाग्यवश, षड्यंत्र के कारण वे इस शास्त्रार्थ में पराजित हो गए और उनकी हत्या कर दी गई। लेकिन वे बिना मोक्ष पाए ही मृत्यु को प्राप्त हुए, जिससे उनकी आत्मा ब्रह्मराक्षस बन गई।
मंदिर में ब्रह्मराक्षस का कोप
उनकी मृत्यु के बाद मंदिर के अंदर और आसपास अजीब घटनाएँ घटने लगीं। लोग रात के समय मंदिर के पास जाते हुए डरते थे। कई बार, भक्तों ने मंदिर के प्रांगण में एक विशाल, प्रचंड आकृति को घूमते देखा, जो अचानक गायब हो जाती थी।
*भक्तों का मानना था कि यह वही विद्वान ब्राह्मण थे, जो अब ब्रह्मराक्षस के रूप में भटक रहे थे। जो भी बिना शुद्ध मन से मंदिर में प्रवेश करता, उसे किसी न किसी रूप में परेशानियों का सामना करना पड़ता। मंदिर में रहने वाले पुजारियों ने कई बार इस आत्मा को शांत करने के लिए अनुष्ठान किए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो पाए।
*ब्रह्मराक्षस की मुक्ति*
कई वर्षों बाद, एक सिद्ध तांत्रिक मंदिर में आए और उन्होंने इस रहस्य को सुलझाने का निश्चय किया। उन्होंने ब्रह्मराक्षस की आत्मा से संपर्क किया और उससे मोक्ष पाने की इच्छा पूछी। ब्रह्मराक्षस ने बताया कि जब तक कोई योग्य ब्राह्मण उसका तर्पण नहीं करेगा, तब तक उसे शांति नहीं मिलेगी।
*उस तांत्रिक ने स्थानीय ब्राह्मणों को बुलाकर एक विशेष यज्ञ और पिंडदान कराया। इस अनुष्ठान के पूर्ण होने पर मंदिर के वातावरण में अचानक शांति आ गई। लोगों का कहना है कि उसके बाद से मंदिर में अजीब घटनाएँ बंद हो गईं और ब्रह्मराक्षस को मोक्ष मिल गया। मंदिर की रहस्यमयी आभा हालांकि, कुछ स्थानीय लोग आज भी मानते हैं कि उस ब्रह्मराक्षस की कुछ ऊर्जा मंदिर के आसपास बनी हुई है, जो केवल भक्तों की रक्षा के लिए है। थिरूनक्कारा मंदिर अपने आध्यात्मिक महत्व और रहस्यमयी इतिहास के कारण भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। *सीख*
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अधर्म का परिणाम भटकाव और पीड़ा होती है। साथ ही, यह भी कि जब तक उचित विधियों से आत्माओं को शांति नहीं मिलती, तब तक वे इस लोक में विचरण करती रहती हैं।
*यह कथा प्राचीन जनश्रुतियों और मंदिर से जुड़े रहस्यमयी अनुभवों पर आधारित है। यदि आप इस स्थान की वास्तविकता को महसूस करना चाहते हैं, तो एक बार थिरूनक्कारा महादेव मंदिर की यात्रा अवश्य करें! *तो प्यारे पाठकों कैसी लगी आपको कहानी, अपनी राय अवश्य प्रकट करें। अगली कहानी के साथ फिर मुलाकात होगी, तब तक के लिए आप हँसते-मुस्कराते रहिए और प्रभु का स्मरण करते रहिए।
धन्यवाद
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।



