
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 27 नवम्बर 2025
27 नवम्बर 2025 दिन गुरुवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि है। आज की सप्तमी को मित्र सप्तमी या आज मित्रसप्तमी व्रत है। आज यायीजययोग और रवि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “मित्र सप्तमी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
*मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। *मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 12:30 AM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 02:32 AM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है, और इसके देवता अष्ट वसु हैं।
⚜️ योग – ध्रुव योग 12:09 PM तक, उसके बाद व्याघात योग
⚡ प्रथम करण : गर – 12:20 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 12:29 ए एम, नवम्बर 28 तक विष्टि
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:31:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:07:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:05 ए एम से 05:59 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:32 ए एम से 06:53 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:30 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:49 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:45 पी एम
💧 अमृत काल : 03:42 पी एम से 05:22 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:42 पी एम से 12:36 ए एम, नवम्बर 28
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – संविधान दिवस/ पंचक प्रारम्भ 14.06/ अभिनेता अनिल धवन जन्म दिवस, भारतीय अंगदान दिवस, शास्त्रीय संगीतकार सुल्तान खान स्मृति दिवस, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह स्मृति दिवस, समाज सुधारक लक्ष्मीबाई केलकर स्मृति दिवस, राष्ट्रीय बवेरियन क्रीम पाई दिवस, राष्ट्रीय शिल्प जर्की दिवस, लोकसभा के अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना जन्म दिवस, संगीतकार बप्पी लाहिड़ी जन्म दिवस, अल्फ्रेड नोबेल द्वारा नोबेल पुरस्कारों की स्थापना दिवस, कवि हरिवंश राय बच्चन जयन्ती ✍🏼 *तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗼 Vastu tips 🗽
किचन के लिए उपयुक्त रंग कौन से हैं आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, रसोईघर में हल्का हरा, पीला, नारंगी और गुलाबी रंग शुभ माने जाते हैं। ये रंग किचन में सकारात्मक माहौल बनाते हैं और घर में खुशहाली लाते हैं। काले और गहरे नीले रंगों से बचना चाहिए, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं और अग्नि तत्व को कमजोर करते हैं।
*इन वास्तु गलतियों से बचें किचन को कभी भी बाथरूम, पूजा घर या बेडरूम के ऊपर या नीचे नहीं बनाना चाहिए। इससे घर की ऊर्जा असंतुलित होती है। किचन में पानी की लीक या जाम नालियां धन हानि का संकेत हैं, इन्हें तुरंत ठीक कराना चाहिए। साथ ही टूटे-फूटे बर्तनों को घर में रखना नेगेटिविटी को बढ़ाता है, इसलिए इन्हें घर से बाहर कर देना चाहिए। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ अगस्त्य का पेड़ आयरन, विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं. अगस्त्य के पेड़ का जिक्र प्राचीन शास्त्रों में भी मिलता है. आयुर्वेद में इसे शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए भी उपयोगी बताया गया है. इसके पंचांग यानी फूल, फल, पत्ते, जड़ और छाल का इस्तेमाल विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में किया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम सेस्बानिया ग्रैंडिफ्लोरा है. यह मूल रूप से मलेशिया और उत्तर ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र में पाया जाता है. यह तेजी से बढ़ने वाला पौधा होता है. *इस पेड़ पर उगने वाले फूलों में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटी अल्सर गुण पाए जाते हैं, जो उन्हें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अत्यधिक लाभकारी बनाते हैं. इन फूलों का उपयोग अर्क या पाउडर के रूप में किया जाता है. यह डायबिटीज, सिरदर्द, खुजली, पेट की समस्याओं और आर्थराइटिस जैसी समस्याओं के इलाज में सहायक होता है. इसके अलावा जुकाम और सिरदर्द में भी यह राहत प्रदान करता है. विशेषज्ञों के अनुसार सिरदर्द की समस्या में अगस्त्य के फूलों का अर्क पीने से राहत मिल सकती है. पेट संबंधित समस्याओं के लिए भी इसका अर्क बहुत प्रभावी होता है.
🥂 *आरोग्य संजीवनी* 🩸
अगर आपको सर्दी, खाँसी या गले में खराश हो रही है, तो ये नुस्खा बहुत कारगर है।
सामग्री:
*1 छोटा टुकड़ा अदरक (कद्दूकस किया हुआ) *_1 बड़ा चम्मच शहद *_1 कप पानी *आधा नींबू (वैकल्पिक)
बनाने की विधि:
*एक छोटे बर्तन में 1 कप पानी उबालें।
*इसमें कद्दूकस किया हुआ अदरक डालें और 5-7 मिनट तक धीमी आँच पर उबलने दें। *पानी को छानकर एक कप में डालें।
*इसमें 1 बड़ा चम्मच शहद मिलाएँ। अगर चाहें तो आधे नींबू का रस भी निचोड़ सकते हैं। *इसे गर्मागर्म धीरे-धीरे पिएँ।
फायदा: यह काढ़ा गले की खराश को शांत करता है, खाँसी में राहत देता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। दिन में 1-2 बार इसे ले सकते हैं।
🔊 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ अंत समय का स्मरण
एक बार देवर्षि नारद जी ने भगवान विष्णु से प्रश्न किया। “प्रभु! एक बात मेरी समझ में नहीं आती। जो लोग आपका भजन-पूजन करते हैं, वे जीवन में अनेक दुख और कष्ट झेलते हैं। और जो लोग आपका नाम तक नहीं लेते, वे धन-वैभव से सम्पन्न रहते हैं, बड़े सुख और ऐश्वर्य में जीते हैं। ऐसा क्यों होता है?”
*भगवान विष्णु मुस्कुराए और बोले –“नारद, तुम्हारे संशय का समाधान मैं स्वयं करूंगा। चलो, पृथ्वी पर चलते हैं।”दोनों साधु-वेश धारण कर पृथ्वी पर आए। सबसे पहले वे एक धनी व्यापारी के घर पहुँचे और भिक्षा के लिए दरवाज़ा खटखटाया। व्यापारी बाहर आया और दोनों को देखकर तैश में भर गया। वह बोला –“तुम लोग यहाँ क्यों आए हो? मेहनत करके खाओ। यहाँ भीख नहीं मिलेगी। यह सब तुम्हारा धंधा बन गया है।” *वह बहुत अपशब्द कहता रहा और क्रोध में उन्हें भगा दिया। नारद जी को आश्चर्य हुआ कि अब प्रभु अवश्य इसे दण्ड देंगे। परन्तु आगे बढ़ते हुए भगवान विष्णु ने व्यापारी को आशीर्वाद दिया –“तुम्हारा व्यापार और फूले-फले, तुम्हें और अधिक धन-वैभव मिले।”
*नारद जी यह सुनकर चकित रह गए।
*थोड़ी दूर चलने के बाद वे एक वृद्धा के छोटे-से झोपड़े पर पहुँचे। बाहर एक दुबली-सी गाय बंधी थी। साधु स्वरूप में भगवान और नारद जी ने आह्वान किया। वृद्धा बड़े प्रेम और श्रद्धा से बाहर आई। उसने कहा –“बाबा! घर में अन्न नहीं है, पर यह गाय है। इसके दूध से मैं आपको तृप्त कर सकती हूँ।” वह अंदर से दूध का गिलास लाई, आसन बिछाया और बड़े सम्मान से दोनों को पिलाया। उसने कहा –“मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं, बस आपका आशीर्वाद ही चाहिए। प्रभु का नाम लेकर मेरा जीवन कट रहा है।” *यह देखकर नारद जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें विश्वास था कि भगवान अवश्य वृद्धा को सुख-समृद्धि देंगे। परन्तु आगे बढ़ते समय भगवान विष्णु पीछे मुड़े और झोपड़ी की ओर देखकर बोले –“माँ! तुम्हारी यह गाय शीघ्र ही तुम्हारा साथ छोड़ दे।”यह सुनकर नारद जी व्याकुल हो उठे। वे बोले –“प्रभु! यह कैसी लीला है? व्यापारी ने हमें अपमानित किया, उसके लिए आप धन की वृद्धि का वरदान दे रहे हैं। और इस वृद्धा ने श्रद्धा से दूध पिलाया, सम्मान दिया, उसके लिए आप उसकी गाय छीनने का आशीर्वाद दे रहे हैं? यह तो अन्याय है।”
*तब भगवान विष्णु ने समझाया –“नारद, तुमने बात को सतही रूप में देखा। उस व्यापारी का मन धन में अटका है। उसकी अंतिम घड़ियों में भी वह धन की ही चिंता करेगा। यही मोह उसे अगले जन्म में साँप बना देगा, ताकि वह धन के खजाने की रखवाली कर सके। इसलिए मैंने उसकी प्रवृत्ति को और पुष्ट कर दिया। *परन्तु यह वृद्धा सच्ची भक्ति करती है। यदि इसके पास गाय रही, तो मृत्यु के समय इसका मन उसी में उलझ जाएगा – कौन इसे देखेगा, कौन इसे बचाएगा। और यदि अंतिम समय में यह गाय के बारे में सोचेगी तो मोक्ष नहीं मिलेगा। इसलिए मैंने उसकी गाय को उसके जीवन से अलग करने का संकल्प किया, ताकि अंत समय में इसका मन केवल मुझमें रमा रहे और यह मेरे धाम को प्राप्त कर सके।”
*भगवान आगे बोले –“नारद! शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि ‘अंतकाले यः स्मरति तं तमेव भवति।’ अर्थात् मृत्यु के समय जिसका स्मरण होगा, जीव उसी की गति को प्राप्त करता है। यदि कोई भगवान को याद करता है, तो वही उसका अंतिम सत्य बन जाता है।” नारद जी की जिज्ञासा शांत हो गई। वे समझ गए कि ईश्वर की लीला गूढ़ है। जो होता है, वह भक्त के कल्याण के लिए ही होता है। शिक्षा:
हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जीवन का अंतिम स्मरण ही हमारी अगली गति निर्धारित करता है। इसलिए सदैव प्रभु का नाम जपते रहना चाहिए और सांसारिक मोह को त्यागना चाहिए। भगवान की कृपा अटल है और उनका प्रत्येक कार्य हमारे कल्याण के लिए ही होता है।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।

