ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 26 जून 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 26 जून 2024
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : बुधवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 08:55 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथि स्वामी – पंचमी तिथि के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र धनिष्ठा 01:05 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी स्वामी मंगल हैं। वहीं राशि स्वामी शनि है। और इसके अधिपति देवता वसु हैं।
⚜️ योग – विष्कुम्भ योग 06:14 AM तक, उसके बाद प्रीति योग 03:20 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
प्रथम करण : कौलव – 10:03 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 08:55 पी एम तक गर
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:25.00_

🌅 सूर्यास्त – सायं 19:23.00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:05 ए एम से 04:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:25 ए एम से 05:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:22 पी एम से 07:42 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 04:51 ए एम, जून 27 से 06:21 ए एम, जून 27
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, जून 27 से 12:44 ए एम, जून 27
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी बटुक को धर्मशास्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : पंचक जारी, अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस, विश्व मादक पदार्थ दिवस, भारतीय फ़िल्म निर्माता यश जौहर पुण्य तिथि, वसंत पुरुषोत्तम काले स्मृति दिवस, छत्रपति शाहू महाराज, राजर्षि शाहू महाराज जन्म दिवस, अन्तरराष्ट्रीय देह व्‍यापार विरोधी दिवस, अत्याचार के पीड़ितों के समर्थन में संयुक्‍त राष्‍ट्र अन्तरराष्ट्रीय दिवस, पत्रकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जन्म दिवस, साहित्यकार गोविंद शास्त्री दुगवेकर स्मृति दिवस, नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं उनकी तस्करी के विरुद्ध विश्व दिवस
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
इस दिशा में न हो नव दंपत्ति का कमरा कभी भी नविवाहित जोड़े का कमरा उत्तर, दक्षिण, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए। इन दिशाओं में अगर कमरा होता है तो वैवाहिक जीवन में टकराव की स्थिति बन सकती है। छोटी-छोटी बातों पर भी झगड़ा हो सकता है।
इस दिशा में हो नवविवाहित जोड़े का कमरा
विवाह के बाद हर कोई चाहता है कि उसके जीवन में लव रोमांस हो, जीवनसाथी के साथ घूमना फिरना हो। कुछ नए और अच्छे अनुभव जीवन में प्राप्त हों। इसके लिए वास्तु के अनुसार नवविवाहित दंपत्ति का कमरा उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह दिशा वैवाहिक जीवन में रोमांस को तो बढ़ाती ही है, साथ ही जीवन की कई अन्य परेशानियों का हल भी जीवनसाथी के साथ मिलकर निकल आता है।
🍵 जीवनोपयोगी कुंजियां 🍶
यूज कर सकते हैं नीम की पत्तियां
नीम की कुछ पत्तियों को पानी में डालकर अच्छी तरह से बॉइल कर लें। अब इस पानी को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर अपने नहाने के पानी में मिक्स कर लें। कुछ दिनों तक इस पानी से नहाएं और खुद-ब-खुद पॉजिटिव असर देखें। यकीन मानिए इस तरीके से आपको घमोरियों से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
इस्तेमाल कर सकते हैं पुदीने की पत्तियां आपको जानकर हैरानी होगी कि पुदीने की पत्तियां भी घमोरियां दूर करने में मददगार साबित हो सकती हैं। घमोरियों से छुटकारा पाने के लिए आपको पुदीने की पत्तियों का एक पेस्ट तैयार कर लेना है। इस पेस्ट को लगाएं और घमोरियों को अलविदा कह दें।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
लस्सी- गर्मियों में दही से बनाई जाने वाली लस्सी को बड़े चाव के साथ पिया जाता है। लस्सी में मौजूद!माइक्रोबैक्टीरिया स्ट्रेस और एंग्जायटी से छुटकारा दिलाने में आपकी मदद कर सकता है।
अदरक ड्रिंक- पोषक तत्वों से भरपूर अदरक भी आपकी मेंटल हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकती है। अदरक वाली ड्रिंक में मौजूद कैल्शियम, विटामिन्स, फॉस्फोरस, सोडियम, बीटा कैरोटीन और मैग्नीशियम जैसे तत्व आपके स्ट्रेस और एंग्जायटी को रिलीज करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
पार्वतीजी ने महादेव शिव से प्रश्न किया की हे महादेव, कलयुग मे धर्म या मोक्ष प्राप्ति का क्या मार्ग होगा?
उनके इस प्रश्न के उत्तर मे महादेव शिव ने उन्हे समझते हुए जो भी व्यक्त किया तंत्र उसी को कहते हैं।
योगिनी तंत्र मे वर्णन है। की कलयुग मे वैदिक मंत्र विष हीन सर्प के सामान हो जाएगा। ऐसा कलयुग में शुद्ध और अशुद्ध के बीच में कोई भेद भावः न रह जाने की वजह से होगा। कलयुग में लोग वेद में बताये गए नियमो का पालन नही करेंगे। इसलिए नियम और शुद्धि रहित वैदिक मंत्र का उच्चारण करने से कोई लाभ नही होगा। जो व्यक्ति वैदिक मंत्रो का कलयुग में उच्चारण करेगा उसकी व्यथा एक ऐसे प्यासे मनुष्य के सामान होगी जो गंगा नदी के समीप प्यासे होने पर कुआँ खोद कर अपनी प्यास बुझाने की कोशिश में अपना समय और उर्जा को व्यर्थ करता है। कलयुग में वैदिक मंत्रो का प्रभाव ना के बराबर रह जाएगा। और गृहस्त लोग जो वैसे ही बहुत कम नियमो को जानते हैं उनकी पूजा का फल उन्हे पूर्णतः नही मिल पायेगा। महादेव ने बताया की वैदिक मंत्रो का पूर्ण फल सतयुग, द्वापर तथा त्रेता युग में ही मिलेगा।
तब माँ पार्वती ने महादेव से पुछा की कलयुग में मनुष्य अपने पापों का नाश कैसे करेंगे? और जो फल उन्हे पूजा अर्चना से मिलता है वह उन्हे कैसे मिलेगा?
इस पर शिव जी ने कहा की कलयुग में तंत्र साधना ही सतयुग की वैदिक पूजा की तरह फल देगा। तंत्र में साधक को बंधन मुक्त कर दिया जाएगा। वह अपने तरीके से इश्वर को प्राप्त करने के लिए अनेको प्रकार के विज्ञानिक प्रयोग करेगा।
परन्तु ऐसा करने के लिए साधक के अन्दर इश्वर को पाने का नशा और प्रयोगों से कुछ प्राप्त करने की तीव्र इच्षा होनी चाहिए। तंत्र के प्रायोगिक क्रियाओं को करने के लिए एक तांत्रिक अथवा साधक को सही मंत्र, तंत्र और यन्त्र का ज्ञान जरुरी है।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

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