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02 जुलाई 2024: योगिनी एकादशी कब है, जानें डेट और शुभ मुहूर्त के साथ महत्‍व व शुभ संयोग

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🚩 02 जुलाई 2024: योगिनी एकादशी कब है, जानें डेट और शुभ मुहूर्त के साथ महत्‍व व शुभ संयोग
🔘 HIGHLIGHTS
👁️‍🗨️ वर्ष में 24 एकादशी तिथि होती हैं।
👁️‍🗨️ आषाढ़ माह में योगिनी एकादशी होती है।
👁️‍🗨️ इस दिन श्री हरि की पूजा की जाती है।
👁️‍🗨️ इस साल योगिनी एकादशी पर 2 अद्भुत संयोग का निर्माण हो रहा है।
👉🏽 आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। योगिनी एकादशी के बाद देवशायनी एकादशी मनाई जाती है। आषाढ़ माह में आने वाली इन दोनों एकादशी का बड़ा महत्व है। इस दिन श्रीहरि विष्णुजी की पूजा-आराधना से जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल 2 जुलाई को योगिनी एकादशी मनाई जाएगी। इस साल योगिनी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, त्रिपुष्कर योग समेत कई शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। जिससे इस दौरान धर्म-कर्म और दान-पुण्य के कार्यों का कई गुना ज्यादा शुभ फलों की प्राप्ति होगी। कहा जाता है कि योगिनी एकादशी का व्रत रखने और विष्णुजी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से योगिनी एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजाविधि…
⚛️ योगिनी एकादशी कब है?
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की पहली एकादशी तिथि की शुरुआत 1 जुलाई 2024 को सुबह 10 बजकर 26 मिनट पर होगी और अगले दिन यानी 2 जुलाई 2024 को सुबह 8 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, 2 जुलाई 2024 को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
🌟 सर्वार्थ सिद्धि योग : 2 जुलाई 2024 सुबह 5:27 एएम से 3 जुलाई 4:40 एएम तक
🌸 त्रिपुष्कर योग : 2 जुलाई 2024 सुबह 8:42 मिनट से 3 जुलाई 4:40 एएम तक
💧 पारण का शुभ मुहूर्त : एकादशी व्रत में द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है। इस दिन 3 जुलाई को सुबह 5 बजकर 28 मिनट से सुबह 7 बजकर 10 मिनट तक पारण किया जा सकता है।
🫵🏼 इन 2 शुभ योग में रखा जाएगा योगिनी एकादशी व्रत 2024
इस साल की योगिनी एकादशी का व्रत 2 शुभ योग में पड़ रहा है. योगिनी एकादशी के दिन त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है. सर्वार्थ सिद्धि योग 2 जुलाई को सुबह 5:27 बजे से अगले दिन 3 जुलाई को सुबह 4:40 बजे तक रहेगा. वहीं त्रिपुष्कर योग 2 जुलाई को सुबह 8:42 से 3 जुलाई को 4:40 तक मान्य है.
धार्मिक मान्यता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में किया गया कोई भी कार्य सफल होता है. वहीं, त्रिपुष्कर योग में पूजा-पाठ, दान, यज्ञ या कोई और शुभ कार्य करने से उसका तीन गुना फल मिलता है. त्रिपुष्कर योग में योगिनी एकादशी व्रत की पूजा करना बेहद फलदायी रहेगा.
✍🏼 योगिनी एकादशी पूजा नियम
एकादशी तिथि से एक दिन पहले भी सात्विक भोजन करें. फिर एकादशी व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान विष्‍णु और माता लक्ष्‍मी की पूजा करें. इस दिन नाखून-बाल ना काटें. उपवास करें. पूजा में तुलसी दल जरूर अर्पित करें. अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें.
🤷🏻 एकादशी व्रत में किन बातों का खास ध्यान रखें_
योगिनी एकादशी व्रत के दिन व्यक्ति को किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन ब्रहम्चार्य का पालन भी करना चाहिए. इस दिन शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. वहीं व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत के दौरान दाढ़ी-मूंछ और बाल नाखून नहीं काटने चाहिए. एकादशी व्रत करने वालों को पूजा के दौरान बेल्ट, चप्पल-जूते या फिर चमड़े की बनी चीजें नहीं पहननी चाहिए. वहीं इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए. व्रत वाले दिन किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए. इस दिन यह सबसे बड़ी हिंसा मानी जाती है. वहीं गलत काम करने से आपके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम होते हैं.
🧘🏻‍♀️ योगिनी एकादशी व्रत पूजा विधि
👉🏽 इस व्रत के नियम एक दिन पूर्व शुरू हो जाते है। दशमी तिथि की रात्रि में ही व्यक्ति को जौं, गेहूं और मूंग की दाल से बना भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए।
👉🏽 वहीं व्रत वाले दिन नमक युक्त भोजन नहीं करना चाहिए, इसलिए दशमी तिथि की रात्रि में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
👉🏽 एकादशी तिथि के दिन प्रात: स्नान आदि कार्यो के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
👉🏽 इसके बाद कलश स्थापना की जाती है, कलश के ऊपर भगवान विष्णु की प्रतिमा रख कर पूजा की जाती है। व्रत की रात्रि में जागरण करना चाहिए।
👉🏽 यह व्रत दशमी तिथि की रात्रि से शुरू होकर द्वादशी तिथि के प्रात:काल में दान कार्यो के बाद समाप्त होता है।
🗣️ योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्ग लोक में कुबेर नामक राजा निवास करता था, जो शिव भक्त था और नियमित रूप से महादेव की पूजा करता था. उसका एक माली था, जिसका नाम हेम था, जो प्रतिदिन पूजा के लिए फूल लाता था. हेम की पत्नी का नाम विशालाक्षी था, जो अत्यंत सुंदर थी. एक दिन जब हेम मानसरोवर से फूल लाकर लौटा, तो वह अपनी पत्नी के साथ समय बिताने लगा और राजा की पूजा के लिए फूल समय पर नहीं पहुंचे.
इससे राजा कुबेर अत्यंत क्रोधित हो गया और हेम को श्राप दिया कि उसने ईश्वर की भक्ति की तुलना में कामासक्ति को प्राथमिकता दी है, जिसके कारण उसका स्वर्ग से पतन होगा. राजा ने हेम को धरती पर स्त्री वियोग और कुष्ठ रोग का सामना करने का श्राप दिया. हेम धरती पर आ गया, और उसे कुष्ठ रोग हो गया और उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई. कई वर्षों तक उसने धरती पर कष्ट झेले.
एक दिन हेम को मार्कण्डेय ऋषि के दर्शन हुए, और उसने अपने सभी कष्टों की कहानी सुनाई. ऋषि ने उसकी बातें सुनकर उसे योगिनी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इस व्रत को करने से उसके सभी पाप समाप्त हो जाएंगे और वह पुनः भगवान की कृपा से स्वर्ग प्राप्त करेगा. हेम ने ऋषि के कहे अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत किया. भगवान विष्णु ने उसके सभी पाप क्षमा कर उसे पुनः स्वर्ग लोक में स्थान दिया.

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