धार्मिक

भगवान के चरणों में अनुराग के बिना परमात्मा की प्राप्ति नही होती : मुरलीधर जी महाराज

श्रीराम कथा के आयोजन में बरस रहा राम रस, दूसरे दिन जुटी श्रोताओ की भीड़
रायसेन। श्री राम कथा आयोजन समिति के तत्वाधान में दशहरा मैदान पर आयोजित हो रही श्री रामकथा के दूसरे दिवस गुरूवार को बड़ी संख्या में श्रोता कथा सुनने के लिए पहुंचे महाराज जी के श्रीमुख से तुलसीकृत रामायाण जी पर आधारित संगीतमय कथा के माध्यम से श्रोताओ को कथा का रसपान कराया गया । कथा को सुनकर अनेक भक्त रामरस में डूबकर उत्साहित दिखाई दिए महाराज श्री ने सती की कथा पर आधारित बाते बताई उन्होने कहा कि भगवान की कथा जहां भी हो अवश्य सुनना चाहिए भगवान के चरणो में अनुराग के बिना परमात्मा की प्राप्ति नही होती इसलिए मनुष्य को मन क्रम वचन के साथ परमात्मा का ध्यान करना चाहिए और ८४ लख योनियो के जाल से बचना चाहिए मानव शरीर को पाने के लिए देवता भी तरसते है ।इसीलिए संत तुलसीदास जी ने बड़े भाव के साथ लिखा है कि बड़े भाग्य मानस तन पावा अर्थात मनुष्य की योनी मिलना बड़े सौभाग्य की बात है सभी योनियो में मनुष्य योनी सर्वश्रेष्ठ मानी गई है जिसको पाने के लिए देवता भी तरसते है।उन्होने युवाओं का आवाह्रन करते हुए कहा कि युवा अपनी पढ़ाई लिखाई के साथ भगवान की पूजा अर्चना में भी मन लगाए युवा अवस्था में भगवान का भजन अच्छी तरीके से किया जा सकता है इसके अलावा साठ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर मनुष्य को संसार जगत से मन हटाकर परमात्मा की भक्ति में अपने मन को लगाना चाहिए ।आज के समय में लोग माया से प्रेरित होकर झूठ बोलने लगते है और माया के फेर में पड़ जाते है और जगत को ही सत्य मान बैठते है पंरतु सत्य तो हरिनाम का जप है जिससे मनुष्य का उद्धार हो सकता है इस प्रकार से रामायण जी पर आधारित अनेक चौपाईयो के माध्यम से महाराज जी विस्तार से व्याख्या करते हुए भक्तो को भक्ति का मार्ग बताया ।भगवान श्री राम और शंकर जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए मुरलीधर जी महाराज ने श्रोताओं को विस्तार के साथ बताया । प्रतिदिन अब श्रीराम कथा के आयोजन में श्रोताओ की संख्या बढ़ती जा रही है । श्रीराम कथा आयोजन समिति के सभी पदाधिकारियो ने धर्मप्रेमी बंधुओ से अधिक से अधिक संख्या में पंहुचकर रामकथा एवं धर्म का लाभ उठाने की अपील की है।

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