बाहर से आने वाले लोगों की होगी जांच, सिवनी में डेंगू, मलेरिया सहित अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ा,
डॉक्टर दे रहे बचाव की सलाह
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन । रायसेन शहर में प्रवेश करने पर जिला स्वास्थ्य विभाग मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी की जांच कर सकते है। दरअसल जिला मुख्यालय रायसेन व इसके लगे क्षेत्रों में मलेरिया बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया अमले ने ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं व स्थानीय स्वास्थ्य अमले को बाहर से आने वाले लोगों पर नजर बनाए रखने के लिए कहा है।
बीमारियों का बढ़ा खतरा….
जिला मलेरिया अधिकारी के मुताबिक बाहर से आने वाले लोग यदि मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया बीमारी से ग्रसित होंगे तो जिले में भी यह बीमारी का खतरा बढ़ने की संभावना है।
स्वास्थ्य विभाग ने की तैयारी…
रक्षाबंधन पर्व के बाद मलेरिया और डेंगू के अलावा चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियां बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए विभाग ने तैयारियां कर ली हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छर नाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में तैनात अमले को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।
सांची क्षेत्र में विशेष सतर्कता
सीएमचओ डॉ दिनेश खत्री ने बताया कि साँची ब्लॉक क्षेत्र के गांवों सहित रायसेन जिले की सीमा से लगे गांवों में अमले को सतर्क कर दिया गया है। यहां बाहर से आने वाले ग्रामीणों की जानकारी एकत्रित की जा रही है। साथ ही डेंगू-मलेरिया की जांच की जा रही है।
संक्रमित व्यक्ति से फैल सकती है बीमारी….
स्वास्थ्य विभागीय अधिकारियों ने बताया है कि रायसेन में पड़ोसी जिलों व महानगरों से यदि कोई डेंगू व मलेरिया से संक्रमित मरीज आता है। तो अन्य लोगों को भी बीमारी का खतरा है। ऐसे व्यक्तियों को यदि सामान्य मच्छर काटता है और वहीं मच्छर दूसरे व्यक्तियों को काट लेता है तो स्वस्थ व्यक्ति भी संक्रमण का शिकार हो सकता है।
रुके हुए पानी के कारण डेंगू मलेरिया के संक्रमण की संभावना अधिक….,
रायसेन में कई जगह 8 से 10 दिनों का पानी भरा हुआ है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में घरों की बाड़ी के पीछे व कच्ची सड़कों में 1 सप्ताह से ज्यादा पानी भरे होने के कारण मच्छरों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
लार्वा विनष्टीकरण का किया जा रहा दावा…
मलेरिया विभाग का अमला ग्रामीण क्षेत्रों में लार्वा विनष्टीकरण के दावे तो कर रहा है, लेकिन अब भी कई गांवों में कीटनाशक व पाउडर का छिड़काव नहीं किया गया है। ऐसे में इन गांवों में मलेरिया-डेंगू फैलने का खतरा बढ़ गया है।
डॉक्टर दे रहे सलाह….
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया है कि मादा एनोफिलीज नामक मच्छर के काटने से मलेरिया बीमारी होता है। समय रहते जांच और निर्धारित डोज लेने पर मलेरिया से निजात मिल जाती है। आसपास का क्षेत्र साफ सुथरा रखें, लंबे समय तक पानी जमा नहीं रहने दें, घर में टूटे गमले, टायर कूलर आदि में यदि पानी भरा निकाल दें। लेवेंडर तेल को साइट्रोनला और नीलगिरी के तेलों के साथ मिलाकर स्प्रे करना चाहिए। नीम की पत्तियों का धुआं करने से मच्छर भाग जाते है। लहसुन की गंध मच्छर सहन करने में सक्षम नहीं होते हैं। साथ ही सोने समय मच्छरदानी का उपयोग करें।



