मां जानकी की नचनारियां करती हैं पूजा, रंगपंचमी पर लगता है मेला
मिनी करीला धाम में लगता है भक्तों का जमावड़ा, नृत्यसंगनाओ (बेड़नीयो) से चौवाते हैं ध्वज (अनोखी जमावड़ा )
गैरतगंज, रायसेन।जिस समाज की महिलाएं अपने लोगों का मनोरंजन करती हैं और अय्यासी की बातें समझती हैं। जिसे नृत्यंगना, नचनारी (बेड़नी) शव्दों से पहचानते है लेकिन माँ जानकी ने इन्हें एक अलग स्थान दिया है। और मां जानकी हाथों से झंडी और प्रसादी, बधाइयां के रूप में स्वीकार करती है। मप्र में दो स्थान है एक अशोकनगर का करीला धाम। इसी रायसेन जिले के गैरतगंज के भानपुरगंज में जहां हजारों की संख्या में भक्त आते हैं और बेड़निया नचाते है यह मिनी करीला है। रायसेन से रंगपंचमी की स्पेशल रिपोर्ट……
म प्र के अशोक नगर में मां जानकी का प्रसिद्द धाम हैं मां करीला धाम, जहा रंगपंचमी के दिन लगता है अपार मेला / लेकिन जो भक्त करीला नहीं जा सकते, वह रायसेन जिले के मिनी करीला धाम भानपुरगंज में अपनी मुराद पूरी कर सकते हैं। भक्तो की आस्था के कारण माँ ने गैरतगंज के भानपुरगंज में पहाड़ी पर प्रकट होने वाले स्वरूप मिनी करीला धाम में भक्तो की मनोकामनाए पूर्ण कर रही हैं। 20 साल से जो भक्त करीला धाम नहीं पहुच मैदान वह भानपुर के मिनी करीला धाम में माँ जानकी से मन चाही मुराद पाने के बाद माँ के दरवार में राही नृत्य घुमा रहे हैं / यह मेला रंगपंचमी के एक दिन पहले से नीचे उतर रंगपंचमी की पूरी रात चलती है हैं यहां 50 हजार से ज्यादा भक्तों का आना जाना लगा रहे हैं / वही सेकड़ो बेड़नियां नाचती हैं। यहां जानकी मैया को प्रसाद के रूप में पान, बटेशा, और नारियल का प्रसाद चढाते है। और अपनी मनोकामना पर पूरा होने पर झंडी अनुपम है
मां जानकी का पावन धाम करीला के बाद रायसेन जिले के गैरतगंज के भानपुर में मां ने पंडित के सपने में कहा कि जो भक्त यहां नहीं आ सकते हैं बही उनकी मुराद पूर्ण करूगी और विस वर्षो से लगातार यहां पुत्र धन सम्पती यश सभी की प्राप्ति के लिए वाद भक्त माँ के दरवार में बेड़नी से नृत्य करके माँ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिस बेरूखी को समाज के लोग जीते हैं माँ जानकी को उसी के हाथ से मन्नत पूर्ण होने पर बधाई दी जाती हैं और झंडा चढ़ाया जाता हैं।
करीला धाम में प्रति वर्ष रंगपंचमी को मेला लगता है और भक्त यहां पर मां जानकी और लव कुश की मूर्ति है और यह मिनी करीला धाम के नाम से प्रसिद्ध है। जो भक्त जान की मां से मनोकामना मांगते हैं और वह बड़ा करीला धाम अशोकनगर नहीं जा सकता वह मिनी करीला धाम भानपुरगंज (गैरतगंज) बधाइवाते है। लेकिन मां जानकी के मंदिर में एक प्रकार का सांकेतिक मनोकामना पूर्ण होता है जैसे पुत्र, धन, यश, नोटरी आदि बह बेड़नी (नृत्यंगना) को नचाते है। बही लोग जिस गुस्से को मानते हैं माँ जानकी के मंदिर में उसी के हाथ से मनोकामना पूर्ण होने पर झंडा और बधाई स्वरुप नृत्य के बाद ही मन्नत पूर्ण रूप से पहचाने जाते हैं आज इन्हें गौरवशाली हैं जो जगत जननी जानकी ने इनहे दिया हैं।
करीला धाम में सुवह से ही भक्तो का ताँता लग जाता है और लगभग 50 हजार से लाखों भक्त यहाँ दर्शनो के लिए आते हैं /बदनी नाचाने की पोषक समाज की इस नारी जो जोड़े रखते हैं। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी मुस्तैद हैं / बही न्यायव्यवस्था व्यवस्थाओं की जगह नचनारियो का और आनंद ले रहे थे।




