धार्मिक

श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा सदैव कल्याणकारी है : ब्रह्मचारी जी महाराज

रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी । तहसील के ग्राम नीगरी में उत्तम सिंह जी शिक्षक के द्वारा श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन, दिनांक 29 जनवरी से किया जा रहा है। जिसमें दूसरे दिवस की कथा में व्यासपीठ पर विराजमान कथा सम्राट ब्रह्मचारी जी महाराज बापौली धाम ने, श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा व्यक्ति के जीवन में सर्वथा कल्याणकारी है। यह संसार हमें बाहरी आंखों से दिखाई देता है, लेकिन परमात्मा को जानने के लिए हमें तीसरे नेत्र की आवश्यकता होती है । वह तीसरा नेत्र ज्ञान का और प्रभु कृपा का प्रसाद स्वरूप है, जिसका जागरण कर लेने से हमें, सूक्ष्म संसार दिखाई देने लगता है, और परमात्मा का दिव्य साम्राज्य हमें ज्ञात होने लगता है । व्यक्ति के जीवन में जागृत अवस्था में जो भी कर्म किए जाते हैं, वह सब अच्छे और बुरे फल को प्रदान करते हैं। यदि मनुष्य श्रेष्ठ कर्म करेगा, तो उसे अच्छा फल प्राप्त होगा और जब कि विपरीत कर्मों का फल उसे पतन की ओर ले जाता है। इसलिए श्रीमद्भागवत की कथा में भगवान नारायण की कृपा प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम कलयुग में प्राप्त हो गया है । इससे बड़ा कोई माध्यम सहज रूप से मनुष्य को प्राप्त नहीं है। मनुष्य चाहे तो जो सूक्ष्म दृष्टि है ,जो भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद् भगवत गीता के ज्ञान उपदेश के समय ,अर्जुन को प्रदान की थी , उस शक्ति का अनुसरण करके, उस सूक्ष्म दृष्टि को प्राप्त करके, अपने मानव जीवन को सफल कर सकता है। इस संसार में सभी कुछ नष्ट होने वाला है , जब हम लोग जागृत अवस्था में होते हैं, तब भी हमें संसार दिखाई देता है, लेकिन जब सुसुप्त अवस्था में जाते हैं, तब भी हमें स्वप्न के माध्यम से इस संसार की अनुभूति होती रहती है। पूज्य ब्रह्मचारी महाराज ने आगे कहा संसार में सर्वथा भगवान की माया व्याप्त है, जिससे हमें आभास तो होता है , लेकिन यह संसार मिथ्या है। जबकि पूर्ण सत्य परमपिता परमेश्वर है। हम व्यावहारिक लोक में अपना जीवन निर्वाह करते हैं, जबकि उस पारलौकिक सत्ता के ज्ञान का प्रयास विरले ही लोगों के द्वारा किया जाता है, और वह इसके माध्यम से उस दिव्य ज्योति को प्राप्त कर लेते हैं ।आवश्यकता है समय देने की, और दिव्य ज्योति को प्राप्त करने का प्रयास सततरूप से करते रहने की आवश्यकता है। प्रतिदिन कथा का समय दोपहर 2 से 5 बजे तक रहेगा ।कथा के आयोजक उत्तम सिंह जी शिक्षक ने समस्त धर्म अनुरागी सज्जनों से, माताओं बहिनों से कथा श्रवण करने का आग्रह किया है।

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