मध्य प्रदेश

जेसीबी से कराया जा रहा मनरेगा से काम और कागज पर मजदूर दिखाकर उठाया जा रहा लाभ

मनरेगा योजना घाेटाला का जरिया बन गई
रिपोर्टर : प्रशांत जोशी
देवरी । उदयपुरा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत आलीबाड़ा का मामला है। जहां पर ग्राम पंचायत अपनी मनमर्जी करते हुए गरीब परिवारों की रोजी-रोटी डकार कर अपनी जेब भरने में लगी हुई है। जबकि शासन द्वारा ग्राम पंचायत में जॉब कार्ड धारियों को मनरेगा के तहत रोजगार देने का मंचों से घोषणा कर रही है। और ग्राम पंचायत में रोजगार दे रही है। परंतु सरपंच सचिव जॉब कार्ड धारियों के रोजगार पर पलीता लगाने में नहीं चूक रहे हैं। बही मनरेगा का काम जेसीबी से कराते है और कागज पर मजदूरों का नाम दिखाकर पैसे का उठाव कर लिया जाता है।
ऐसा ही मामला रायसेन जिले के उदयपुरा विकासखंड के ग्राम पंचायत आलीबाड़ा में सामने आया है। जहां पर मनरेगा योजना का काम दिन दहाड़े जेसीबी से कराया जा रहा था। तालाब गहरीकरण कार्य के अब तक हुए भुगतान के वास्तविकता की गहन जांच की गई तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। बता दे कि मनरेगा भारत में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है। यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराती है।
मनरेगा के मजदूर मिले गायब जेसीबी से चल रहा था काम पकड़े गए
आलीबाड़ा ग्राम पंचायत के तालाब में चल रहे मनरेगा कार्य में अनियमितता की जानकारी मिलने पर मीडिया की टीम ग्राउंड रिपोर्ट करने के लिए पहुंची। इस दौरान कई अनियमितता सामने आई। जिसमें मेट ने मस्टरोल में जितने श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज कर रखी थी। उतने मजदूर मौके पर नही मिले। वहीं मौके पर जिस तालाब का कार्य किया जा रहा था उस पर पहले से जेसीबी द्वारा कार्य कर रखा था। गौरतलब हो कि मनरेगा के स्वीकृत कार्यों को श्रमिकों से ही करवाए जाने के आदेश व एक्ट में प्रावधान हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नियम के विपरीत उदयपुरा विकासखंड के ग्राम आलीबाड़ा में जेसीबी मशीन से कार्य करवाए जाने की पुनरावृत्ति पर कार्रवाई होगी। फर्जी मस्टर रोल मिलने पर धन की रिकवरी करने को कहा जाएगा।

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