ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग बुधवार, 07 फरवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 07 फरवरी 2024

07 फरवरी 2024 : आज पावन प्रदोष का व्रत भी है। इस द्वादशी को तिल द्वादशी भी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है, कि तिल कि उत्पत्ति आज ही के दिन हुई थी। आज बुधवार कि भद्रा होने से सिद्धयोग निर्मित हो रहा है। आप सभी सनातनियों को “तिल द्वादशी एवं प्रदोष व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार माघ माह के कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि 02:02 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी तिथि के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 04:37 AM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक है। तथा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का अधिपति ग्रह शुक्र को माना गया है।
🔊 योग – वज्र योग 02:52 AM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : तैतिल – 02:02 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 12:43 ए एम, फरवरी 08 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:31:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:29:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:22 ए एम से 06:14 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:48 ए एम से 07:06 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:25 पी एम से 03:09 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:02 पी एम से 06:28 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:05 पी एम से 07:23 पी एम
💧 अमृत काल : 12:11 ए एम, फरवरी 08 से 01:40 ए एम, फरवरी 08
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 08 से 01:01 ए एम, फरवरी 08
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिव मंदिर में हरे फल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/मूल समाप्त, वैलेंटाइन वीक, रोज़ डे, भीमराव आम्बेडकर की पत्नी रमाबाई आम्बेडकर जयन्ती, क्रान्तिकारी मन्मथनाथ गुप्त जयन्ती, ग्रेनेडा स्वतंत्रता दिवस, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🛕 Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे फ्लैट में किचन की दिशा के बारे में। वास्तु शास्त्र के सामान्य नियमों की तरह ही फ्लैट में भी दक्षिण-पूर्व या दक्षिण दिशा मे किचन होना सबसे अच्छा माना गया है। मजबूरी में पूर्व या पश्चिम दिशा की किचन कुछ उपायों के साथ ग्राह्य है, लेकिन दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा की किचन किसी भी दशा में ग्राह्य नहीं है। दक्षिण-पश्चिम दिशा की किचन दाम्पत्य रिश्ते को नुकसान पहुंचाती है।
उत्तर-पश्चिम दिशा में बनी हुई रसोई कभी पूरी नहीं पड़ती। उत्तर दिशा में बनाए गए भोजन को ग्रहण करने से मन में बहुत तरह के भय बैठ जाते हैं। पुत्र पिता की अवज्ञा करता है, दोनों के रिश्ते खराब होने की नौबत आ जाती है। उत्तर-पूर्व दिशा में बनाई गई रसोई से अवसर नष्ट हो जाते हैं, बाधाएं आती है, घर में भावना और प्रेम का बहाव नष्ट हो जाता है। अगर आप पहले से फ्लैट ले चुके हैं और आपका किचन इन दिशाओं में है तो उसके लिए आपको अलग से विशेष उपाय करने चाहिए।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मेमोरी कमजोर होना- बच्चों की मेमोरी बहुत शार्प होती है, लेकिन अगर आपको बच्चे की मेमोरी कमजोर लग रही है। उसे बहुत ज्यादा याद नहीं रहता है तो ऐसा जिंक की कमी के कारण भी हो सकता है। कुछ बच्चों को ये तक याद नहीं रहता कि उन्होंने दिन में क्या खाया था। पढाई में याद किया हुआ सब भूल जाते हैं। ऐसा जिंक की कमी होने पर भी हो सकता है।
चोट या घाव देरी से भरना- बच्चे अक्सर कुछ न कुछ चोट लगाते रहते हैं। हालांकि किड्स की हीलिंग पावर भी बहुत ज्यादा होती है। ऐसे में कोई भी चोट आसानी से भर जाती है। अगर चोट या घाव भरने में देरी हो रही है तो बच्चे के शरीर में जिंक की कमी हो सकती है। इसे मामूली समझकर अनदेखा न करें।
जल्दी बालों का झड़ना- बढ़ती उम्र के साथ बालों का झड़ना भी शुरू हो जाता है। अगर छोटी उम्र में ही बच्चों के बाल तेजी से झड़ने लगे हैं तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। खासतौर से जिंक की कमी होने पर बाल तेजी से झड़ने लगते हैं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
शिलाजीत ही एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसका प्रयोग आप कभी भी कर सकते हैं। इसका प्रयोग करके आप न केवल अपने अंदर की थकावट को दूर कर सकते हैं, साथ ही अपने शरीर को अंदर से मजबूत और ऊर्जावान बना सकते हैं। ये पूरी तरह से आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका ना तो कोई साइड इफेक्ट है ना ही कोई नुक्सान। ये आपकी मसल पावर को भी बढ़ाता है। अगर आप शादीशुदा हैं तो आपकी शादीशुदा जिंदगी के लिए भी बहुत कुछ साबित होगा। मैं खुद इसका प्रयोग नियमित आधार पर कर रहा हूं। सुबह मैं दौड़ने और व्यायाम करने के बाद जब मैं इसको गुनगुने पानी के साथ लेता हूं तो यकीन मानिये मेरे शरीर से सारी थकन पल भर में गायब हो जाती है। बाजार में अनेको तरह की नकली वाली शिलाजीत कम कीमत पर उपलब्ध है जो कहीं ना कहीं शरीर को नुक्सान ही देती है। सबसे ज्यादा ये जरूरी है कि आप शिलाजीत का चयन करें और सर्वोत्तम गुणवत्ता का उपयोग करें। जिसे आपके शरीर और पैसे को नुक्सान होने से बचाया जा सके। जिसके प्रयोग के बाद आपको खुद अंदर से बेहतर महसूस होगा। ये सच है मैं असली शिलाजीत है.
📘 गुरु भक्ति योग 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम : मौन साधना कोई विशिष्ट साधना नहीं होती, साधना ही मौन साधना है। मन बातूनी है, बक-बक, वाचाल। मन की ही बातचीत जीवन में निरर्थक कर्मों के रूप में परिलक्षित होती है। जो कुछ भी तुम कर रहे होते हो, पहले वो प्रकट होता है मन में विचार के रूप में, या वृत्ति के रूप में, एक लहर, एक संवेग के रूप में। वही है मन की बक-बक।
मौन साधना का अर्थ है ये समझना कि बातचीत करने के लिए दो चाहिए। दूसरा न मिले तो पहला बहुत देर तक नहीं बोल पाएगा। दीवारों से कितनी देर तक बात करोगे भाई? मन बक-बक करना चाहता है, तुम उसकी बक-बक में सहभागी न बनो, तुम उत्तर न दो तो मन की बक-बक बहुत दूर तक नहीं जाएगी। मन ने कुछ बोला और तुमनें कहा, ‘बात ठीक है’, तो भी तुम मन के सहयोगी हो गये। और मन ने कुछ बोला और तुमनें कहा, ‘बात ठीक नहीं है’, तो भी तुम बातचीत में प्रतिभागी हो गये।
मौन साधना का अर्थ होता है — मन को बोलने दो, तुम अपना काम करो, तुम्हारे पास बहुत काम हैं।
मन का काम है स्वयं बोलते रहना। मन इन्द्रियों का ग़ुलाम है, प्रकृति का ग़ुलाम है, शरीर की वृत्तियों का ग़ुलाम है। तुम्हारा काम है किसी और को बोलने देना, जान लगा देना उसको ढूँढने में जिसका बोल तुम्हें खींचें ले रहा है, जिसकी आवाज़ से तुम्हें प्यार है।
तुम्हारा काम अति कठिन है, तुम गपशप में कैसे तल्लीन हो गये? कि जैसे तुम्हें प्यार हो गया हो और एक तुम्हारा दोस्त है जिसको प्यार का ‘प’ नहीं पता। जिससे तुम्हें प्यार है वो कहीं गुम है, उसकी छवि भर दिखाई देती है, हल्की-हल्की उसकी आवाज़ भर आती है। अब तुम्हारा यार चाय-पकोड़े लेकर के बैठा हुआ है, और दुनिया भर की बकवास, वाचा-रंभण। वो करे तो करे, तुम कैसे करने लग गये? उसकी ज़िन्दगी रूखी है, सूनी है। उसके लिए चाय-पकोड़े से ऊपर कुछ है ही नहीं। तुम्हारे पास प्रेम है, तुम चाय-पकोड़े के साथ क्या कर रहे हो?
और मन की सारी बातचीत चाय-पकोड़े के तल से ऊपर की होती है क्या? कहीं की चाय, कहीं की कॉफ़ी, किसी का पकोड़ा, किसी का हथोड़ा, यही तो चलता है मन में, और भी कुछ चलता है क्या? कहीं पकड़ा, कहीं जोड़ा, यही चलता है न? ये काम उसको करने दो जिसके पास इस काम से अलग, इस काम से बेहतर कुछ है ही नहीं।
(शेष कल)
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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