आज का पंचांग रविवार, 06 नवम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 06 नवम्बर 2022
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🔱 06 नवम्बर 2022 दिन रविवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। आज निशिथ प्रदोषयुक्त श्रीवैकुण्ठचतुर्दशी का पावन व्रत है। आज असंख्य कोटि ब्रह्माण्ड नायक भगवान श्रीमहाविष्णु की पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज भगवान नर्मदेश्वर की पूजा में उन्हें तुलसी समर्पण करना चाहिये। आज दक्षिण भारत में प्रदोषअन्नाभिषेक किया जाता है। आप सभी सनातनियों को निशिथ प्रदोषयुक्त श्री वैकुण्ठचतुर्दशी एवं भगवान श्रीमहाविष्णु की पूजा की हार्दिक शुभकामनायें।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- सप्तमी तिथि 03:03:00 तक तदोपरान्त अष्टमी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्यदेव जी हैं तथा अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिवजी हैं।
💫 नक्षत्रः- माघ नक्षत्र 16:46:00 तक तदोपरान्त पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- माघ नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं तथा पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं।
📣 योगः- हर्षण 20:32:00 तक तदोपरान्त वज्र
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 04:28 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 04:18 ए एम, नवम्बर 07 तक वणिज
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 02:03:00 से 03:48:00 तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 07:07:00 से 08:51:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:16:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:52 ए एम से 05:44 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:18 ए एम से 06:37 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:22 पी एम से 05:46 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:33 पी एम से 06:51 पी एम
💧 अमृत काल : 09:39 पी एम से 11:16 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 07
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 12:04 ए एम, नवम्बर 07 से 06:37 ए एम, नवम्बर 07
❄️ रवि योग : 06:37 ए एम से 08:41 पी एम 12:04 ए एम, नवम्बर 07 से 06:37 ए एम, नवम्बर 07
💥 व्रज योग – रात 11 बजकर 50 मिनट तक
☄️ रेवती नक्षत्र – रात 12 बजकर 4 मिनट तक
🏎️ यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी पवित्र नदी में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर दीपदान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रोटक व्रत समाप्त, अन्तरराष्ट्रीय दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस, बैकुंठ चतुर्दशी, पंचक समाप्त
✍🏽 विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
किस दिशा में बनावाएं बेडरूम-खुशहाल और हमेशा एक-दूसरे के साथ के लिए घर के उत्तर-पश्चिम दिशा में अपना बेडरूम बनाना चाहिए
दीवारों पर करें हल्के रंगों का प्रयोग- जीवन को खुशहाल और रिश्तों की कड़वाहट दूर करने के लिए आप अपने बेडरूम की दीवारों पर हल्के रंगों का प्रयोग करें. इसके अलावा कमरे में ताजे फूल भी रखें
किस तरफ किसको सोना चाहिए-वास्तु के मुताबिक पति को बेड के दाएं और पत्नी को बेड के बाईं तरफ सोना चाहिए. इससे रिश्तों में प्यार बढ़ता है
लगाएं सफेद बत्तख की तस्वीर-माहौल खुशनुमा बनाने के लिए बेडरूम में सफेद बत्तख के जोड़े की तस्वीर रखनी चाहिए. इससे नकारात्मक शक्तियों से बचाव होगा.
लकड़ी के बेड का करें उपयोग-समय में बदलाव के साथ बेड भी आधुनिक होते जा रहे हैं. लोग मेटल या अन्य के बेड का इस्तेमाल करने लगें हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के मुताबिक पति-पत्नी को लकड़ी के बेड पर ही सोना चाहिए
किस दिशा में रखें सिर और पैर- वास्तु एक्सपर्ट के मुताबिक कपल्स को अपने पैर उत्तर दिशा में और सिर दक्षिण दिशा में रखकर सोना चाहिये।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
फंगल इन्फेक्शन- अक्सर फंगल इंफेक्शन भी नाखून पर व्हाइट स्पॉट की समस्या का कारण बन जाते हैं। इसमें ओनिकोमाइकोसिस नामक फंगस के कारण नाखूनों पर सफेद धब्बे पड़ जाते हैं। ये इंफेक्शन आपकी उंगलियों को भी खराब कर सकता है।
आनुवांशिक- कई बार आनुवांशिक कारणों से भी नाखून पर व्हाइट स्पॉट की समस्या हो सकती है। डॉक्टर्स ल्यूकोनीशिया की समस्या को आनुवंशिक ही मानते हैं। इसलिए अगर कोई इंसान इससे प्रभावित है तो उसकी अगली पीढ़ी में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
मिनरल्स की कमी- न्यूट्रिशनिस्ट कहते हैं कि बॉडी में मिनरल्स की कमी से भी कई बार नाखून पर व्हाइट स्पॉट पड़ जाते हैं। शरीर में जिंक की कमी होने पर ये समस्या अक्सर देखने को मिलती है। इसलिए शरीर में ऐसे मिनरल्स की कभी कमी ना होने दें।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
ब्लैडर में गड़बड़ी- हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रात में बार-बार पेशाब आने का सबसे बड़ा कारण आपके ब्लैडर में गड़बड़ी हो सकती है। इस कंडीशन में मरीज व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने लगता है। यदि आपके साथ भी ऐसी समस्या है तो इसकी तुरंत जांच कराएं।
डायबिटीज- डायबिटीज को साइलेंट किलर के नाम से जाना जाता है, जो मरीज के शरीर को धीरे-धीरे खोखला कर देती है। डायबिटीज में अक्सर ऐसे लक्षण देखे जाते हैं जहां मरीज को रात में बार-बार पेशाब आने की परेशानी होने लगती है। डॉक्टर्स कहते हैं कि जब मरीज के शरीर में ब्लड शुगर लेवल काफी बढ़ जाता है तो उसे रात में बार-बार पेशाब आने लगता है।
यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन- यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या होने पर भी लोगों को बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। इस कंडीशन में कई बार लोगों को यूरीन पास करते हुए जलन महसूस होती है। अक्सर पेशाब रोकने पर भी बहुत दर्द होता है।
किडनी डिसीज- किडनी हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को छानकर उन्हें बाहर निकालने का काम करती है। किडनी से जुड़ी समस्या होने पर भी इंसान को बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। किडनी का इंफेक्शन होने पर बार-बार पेशाब आने लगता है। अगर ये गंभीर दिक्कत आपके साथ भी है तो इसकी तुरंत जांच करा लें।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
क्या आप जानते हैं कि शालिग्राम क्या होता है, कहां मिलता है, क्यों पूजाघर में रखते हैं, क्यों करते हैं देव उठनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के साथ इसका विवाह, क्या है घर में शालिग्राम रखने के नियम। आओ जानते हैं इस संबंध में 10 रहस्यय बातें।
किसे कहते हैं शालिग्राम : जिस तरह शिवजी का विग्रह या निराकार रूप शिवलिंग है उसी तरह श्री हरि विष्णुजी का विग्रह रूप शालिग्राम है। यह शिवलिंग से थोड़ा भिन्न होता है। मुख्य शालिग्राम इस तरह का होता है जैसे इस पर ऐसी धारियां बनी होती हैं जैसे जनेऊ पहनी हो। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है।
क्यों करते हैं शालिग्राम की तुलसी के साथ पूजा : शालिग्राम श्री हरि विष्णु का ही रूप है इसलिए देव उठनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के साथ इनकी पूजा और विवाह कराया जाता है। तुलसी माता पूर्व जन्म में वृंदा थीं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम के साथ तुलसी का विवाह कराने वाले व्यक्ति के जीवन से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं और उस पर भगवान हरि की विशेष कृपा बनी रहती है।
क्यों जरूरी है शालिग्राम को पूजा घर में रखना : मान्यता है कि घर में भगवान शालिग्राम हो, वह तीर्थ के समान माना जाता है। स्कंदपुराण के कार्तिक महात्म्य में शिवजी ने भी शालिग्राम की स्तुति की है। विष्णु की मूर्ति से कहीं ज्यादा उत्तम है शालिग्राम की पूजा करना।
कितने प्रकार के होते हैं शालिग्राम : 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है। माना जाता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं।
किस अवतार का कैसे शालिग्राम : यदि गोल शालिग्राम है तो वह विष्णु का रूप गोपाल है। यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो यह श्री विष्णु के मत्स्य अवतार का प्रतीक है। यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो यह भगवान के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक है। इसके अलावा शालिग्राम पर उभरने वाले चक्र और रेखाएं भी विष्णु के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण के कुल के लोगों को इंगित करती हैं।
दुर्लभ शालिग्राम : पूर्ण, काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है।
पूर्ण शालिग्राम : पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है। यह शालिग्राम घर में रखकर इसकी नित्य पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जन्मों का पाप कट जाता है।
लक्ष्मी नारायण शालिग्राम : लक्ष्मी नारायण नाम के शालिग्राम का का पूजन जिस घर में होता है उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है। शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
शालिग्राम रखने का नियम : घर में सिर्फ एक ही असली शालिग्राम रखना चाहिए। कई घरों में कई शालिग्राम होते हैं जो उचित नहीं है। इसके साथ ही जिस घर में शालिग्राम रखा होता है उस घर के सदस्यों को कभी भी मांस, मटन, चिकन, अंडा आदि नहीं खाना चाहिए और किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए अन्यथा इसके बुरे परिणाम देखने को मिलेते हैं। इससे बेहतर है कि आप शालिग्राम रखे ही नहीं।
शालिग्राम की पूजा के नियम : नित्य शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है। चंदन भी असली होना चाहिए। जैसे चंदन की एक लकड़ी को लाकर उसे शिला पर घिसे और फिर शालिग्रामजी को चंदन लगाएं। शालिग्राम को प्रतिदिन पंचामृत से स्नान भी कराया जाता है। कहते हैं कि कुछ समय को छोड़कर शालिग्राम की प्रतिदिन पूजा करना जरूरी है। ऐसे समय है रोग, यात्रा या रजोदर्शन आदि।
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⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।

