ज्योतिष

आज का पंचाग सोमवार 24 अक्टूबर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 24 अक्टूबर 2022

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
🪔 24 अक्टूबर 2022 दिन सोमवार को कहने को तो चतुर्दशी तिथि है। परन्तु आज प्रदोष दीपावली का महान पर्व है। आज माता लक्ष्मी, इन्द्र एवं कुबेर आदि देवताओं के पूजन से जीवन आर्थिक स्थिरता सदैव बनी रहती है। शास्त्रानुसार आज प्रातःकाल हनुमान जी के दर्शन, यम तर्पण, प्रदोष काल में लक्ष्मी, इन्द्र एवं कुबेर आदि देवताओं का पूजन करना चाहिये। तदुपरान्त सायं कल में घर में तथा देवालयों में दीप दान अवश्य करना चाहिये। अर्द्धरात्रि में निशिथकाल में महाकाली पूजा अथवा लक्ष्मी साधना कर सकते हैं। कहीं-कहीं दरिद्रनि:स्सारण एक दिन पहले ही कर दिया जाता है। क्योंकि उनकी मान्यता होती है, कि लक्ष्मी के घर में आने के बाद हम किसी का नि:स्सारण कैसे कर सकते है? परन्तु शास्त्रानुसार (पञ्चांग-अनुसार) आज ही प्रातःकाल में दरिद्रनि:स्सारण करना चाहिये। आज हाथ में उल्का लेकर अपने पितरों के मार्गदर्शन करने का भी नियम है। आज से भगवान सूर्य स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर जायेंगे। स्वाति में हल्का वायु के साथ बूंदा-बांदी के योग हैं। आप सभी सनातनियों को लक्ष्मी साधना के इस महान पर्व “दीपावली” की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः-चतुर्दशी तिथि 17:28:10तक तदोपरान्त अमावस्या तिथि
✏️ तिथि स्वामीः-चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी हैं तथा अमावस्या तिथि के स्वामी पित्रदेव जी हैं।
💫 नक्षत्रः- हस्त 18:42:00 तक तदोपरान्त चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामीः-हस्त के स्वामी चन्द्र जी हैं तथा चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल जी हैं।
🔔 योगः-वैधृति 14:31:00 तक तदोपरान्त विषकुंभ
प्रथम करण : शकुनि – 05:27 पी एम तक
द्वितीय करण : चतुष्पाद – 04:56 ए एम, अक्टूबर 25 तक नाग
🔥 गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:29:00P.M से 02:54:00P.M तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- राहुकाल 07:51:00 A.M से 09:16:00A.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:21:00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 05:38:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:46 ए एम से 05:36 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:11 ए एम से 06:27 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:58 पी एम से 02:43 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:32 पी एम से 05:56 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:43 पी एम से 06:59 पी एम
💧 अमृत काल : 08:40 ए एम से 10:16 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 25
💥 वैधृति योग – आज दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक
☄️ हस्त नक्षत्र – आज दोपहर 2 बजकर 42 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-श्रीमहालक्ष्मी का पूजन कर दीपमालिका प्रज्ज्वलन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्री महालक्ष्मी पूजन/दीपमालिका प्रज्ज्वलन/दीपावली/कुबेर पूजन, विश्व विकास सूचना दिवस, विश्व पोलियो दिवस, अनुराग ठाकुर जयन्ती
✍🏽 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
👉🏼 जानें दिवाली का इतिहास-महत्व और पूजन का मुहूर्त, पूजा का समय
इस साल दिवाली 24 अक्टूबर 2022 को मनाई जाएगी। दृक पंचांग के मुताबिक लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – शाम 07:26 बजे से रात 08:39 बजे तक है। वहीं प्रदोष काल – शाम 06:10 बजे से रात 08:39 बजे तक है। वृषभ काल – 07:26 अपराह्न से 09:26 बजे तक है। इसके साथ ही अमावस्या तिथि का शुभारंभ 24 अक्टूबर 2022 को शाम 05:27 से है और इसका समापन 04:18 बजे 25 अक्टूबर, 2022 को है। दिवाली महत्व व इतिहास
🏘️ Vastu tips 🏚️
आपके घर की उत्तर दिशा – वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा कुबेर देवता का वास होता है। माना जाता हैं कि इस दिशा को वास्तु दोष से मुक्त रखना बेहद जरूरी होता है। इस दिशा को आर्थिक कामों के लिए शुभ माना जाता है। यदि आपके घर की उत्तर दिशा में गंदगी रहती है तो आपके घर से कुबेर देवता रुठ जाएंगे। जिसके चलते घर में कंगाली छाने लगती है।
पानी की टंकी – घरों में इस्तेमाल की जाने वाली पानी की टंकी को रखने के लिए भी वास्तु में एक दिशा चुनी गई है। यदि आपके घर की टंकी दक्षिण पूर्व दिशा की ओर है तो वास्तु शास्त्र में इसे अच्छा नहीं माना गया है। इस दिशा को अग्नि दिशा माना जाता है और अग्नि और पानी का मेल वास्तु दोष पैदा करता है।
टॉयलेट – आजकल के टॉयलेट एक से बढ़कर एक होते हैं। लेकिन इनकी बनावट वास्तु के हिसाब से न की जाए तो काफी नुकसान उठाने पड़ते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण और पश्चिम दिशा को टॉयलेट के लिए बेहतर माना गया है। अगर घर में टॉयलेट उत्तर-पूर्व दिशा में बना हो तो इंसान को पैसों तंगी होने लगती है और में रखा धन खत्म होने लगता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अशुभ संकेत – पैसे और बिजनेस में नुकसान: माना जाता है कि अगर किसी के बाएं पैर के तलवे पर छिपकली गिरे तो इसका मतलब है कि आपको अपने बिजनेस में नुकसान झेलना पड़ सकता है। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, किसी की भौंह पर छिपकली का गिरना पैसों की हानि की तरफ इशारा करता है। इसके अलावा बाएं हाथ पर छिपकली गिरने से संपत्ति की हानि हो सकती है।
घर में होता है झगड़ा: पुरुष की दाढ़ी पर छिपकली गिरना अशुभ संकेत माना जाता है। कहा जाता है कि पुरुष की दाढ़ी पर छिपकली गिरने से उसका सामना किसी भयावह घटना से हो सकता है। किसी के भौंह पर छिपकली का गिरना बेहद अशुभ माना जाता है। इससे उस व्यक्ति को भारी धन संकट का सामना करना पड़ सकता है। बाएं आंख पर छिपकली गिरने का संकेत भी किसी बड़ी हानि से होता है। अगर पीठ के मध्य पर छिपकली गिरती है तो घर पर कलह-क्लेश की स्थिति बन सकती है। वहीं बाएं पैर पर छिपकली के गिरने से बीमारी और कलह की संभावना बढ़ती है।
🧉 आरोग्य संजीवनी 🍶
🤷🏻‍♀️ कफ होने पर क्या करें?
अगर आपका भी गला खराब हो और आपको सर्दी जैसा लग रहा हो तो आप दालचीनी का उपयोग कर सकते हैं। बस आप एक चौथाई चम्मच(1/4) दालचीनी पाउडर लें। साथ ही आप इसमें थोड़ा शहद मिला लें।
👉🏼 दालचीनी के फायदे
दालचीनी का सेवन करने से डायजेशन की दिक्कत ठीक होती है।
इससे कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी ठीक होती है।
ब्लड प्रेशर संबंधी समस्या में आराम मिलता है।
दालचीनी का सेवन से डायबिटीज की समस्या कम होती है।
पीरियड्स के समय इसका सेवन करने से आराम मिलता है।
सर्दी में दालचीनी खाने से कफ,कोल्ड,फीवर ठीक होता है।
दालचीनी वायरल इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन भी ठीक करती है।
🪔 गुरु भक्ति योग 🪔
🔮 दिवाली के दिन क्या करें
दीपावली के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व ही घर के सभी सदस्यों को जाग कर स्नान आदि से निवृत हो जाना चाहिए ।
💷 दीपावली के दिन प्रातः घर की पूजा के समय पीतल या तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें थोड़ी हल्दी घोल कर उसे पूजा में रखे , पूजा के उपरांत इस जल को पीले फूल से पूरे घर में थोड़ा थोड़ा छिड़क दें और बचा हुआ जल तुलसी या केले के पौधे में चड़ा दें अब इस क्रिया को नित्य पूजा के बाद किया करें घर पर माँ लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहेगी ।
🕉️ दीपावली के दिन घर की पूजा के बाद प्रात: अपने पितरों का तर्पण अवश्य ही करना चाहिए। तर्पण करते समय एक चाँदी / ताम्बे अथवा पीतल के बर्तन में जल में गंगाजल , कच्चा दूध, तिल, जौ, तुलसी के पत्ते, दूब, शहद और सफेद फूल आदि डाल कर पितरों का तर्पण करना चाहिए।
💧 तर्पण, में तिल और कुशा सहित जल हाथ में लेकर दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके तीन बार तपरान्तयामि, तपरान्तयामि, तपरान्तयामि कहकर पितृ तीर्थ यानी अंगूठे की ओर जलांजलि देते हुए जल को धरती में किसी बर्तन में छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है। ध्यान रहे तर्पण का जल तर्पण के बाद किसी वृक्ष की जड़ में चड़ा देना चाहिए वह जल इधर उधर बहाना नहीं चाहिए।
दीपावली के दिन पति-पत्नी सुबह किसी भी विष्णु मंदिर में एक साथ जाकर वहां माता लक्ष्मी को वस्त्र चढ़ाएं, इससे उस घर में कभी भी धन की कमी नहीं रहती है ।
मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पीले फूलो की माला अवश्य ही पहनाये अथवा पीले फूल चढ़ाएं इससे माँ लक्ष्मी की आसानी से कृपा प्राप्त होती है धन लाभ के योग बनते है ।
🤷🏻‍♀️ जानिए कैसे करें दीपावली की पूजा की माँ लक्ष्मी की मिले असीम कृपा
🌳 दीपावली वाले दिन पीपल के पेड़ की छाया में खड़े होकर चीनी, दूध और घी मिलाकर उसे पीपल की जड़ में डालें, इससे घर हमेशा धन धान्य से भरा रहेगा।
जीवन में आर्थिक संकट निकट भी नहीं आये, माँ लक्ष्मी की स्थाई कृपा के लिए दीवाली के दिन एक मिट्टी के बर्तन में शहद भर कर उसे ढँककर किसी सुनसान स्थान में गाड़ दें इससे धन धान्य की कोई भी कमी नहीं रहती है।
दीपावली के दिन किसी भी विष्णु मंदिर में ऊंचाई पर पीली त्रिकोण आकृति कि पताका / पीला झण्डा इस प्रकार लगा दे कि वह लगातार लहराती रहे तो उसका भाग्य शीघ्र चमक जाता है ।
👉🏼 यह ध्यान रहे कि झंडा हमेशा लगा रहे अगर वह कट फट जाये या उसका रंग ख़राब हो जाये तो उसको तुरंत बदलवा दें। यह झण्डा आप पीला कपड़ा लेकर बनवा सकते है या पूजा की दुकान से रेडीमेट भी खरीद सकते है ।
दीपावली अमावस्या के दिन पड़ती है इस दिन गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है। इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा। यह बहुत ही आसान सा उपाय है इसे अवश्य ही करे ।
🛕 दीपावली को सुबह के समय मंदिर जाने के बाद बाजार से गन्ने की जड़ को नमस्कार करके अपने घर में लाये और रात्रि में लक्ष्मी पूजन के समय उसकी भी पूजा करें , ऐसा करने से घर में अटूट लक्ष्मी का वास होता है।
दीपावली के दिन दोपहर में अपने घर में एक ब्राह्मण को भोजन अवश्य ही कराएं और उसके पश्चात उसे दान दक्षिणा भी अवश्य ही दें । इससे आपके पितर सदैव प्रसन्न रहेंगे, कार्यों में अड़चने नहीं आएँगी, घर में धन की कोई भी कमी नहीं रहेंगी और आपका घर – परिवार को किसी भी तरह की ऊपरी हवा , टोने-टोटको के अशुभ प्रभाव से भी बचा रहेगा।
🍛 दीपावली के दिन खीर बनायें । उसमें से रात की पूजा के लिए खीर निकल कर पहले ही अलग रख दें, फिर उस खीर को ब्राह्मण को भोजन के साथ अवश्य ही खिलाएं इससे महान पुण्य की प्राप्ति होती है, जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है।
🕯️ दीपावली के दिन अपने घर एवं व्यापारिक प्रतिष्टान के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीवार पर शुभ – लाभ , स्वास्तिक , ॐ , आदि सौभाग्य चिन्हों को सिंदूर से अंकित करें तत्पश्चात उस पर पुष्प रोली चढ़ाकर ईश्वर से घर में सुख समृद्धि और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करनी चाहिए ।
जीवन में हर प्रकार से उन्नति करने के लिए व्यक्ति को चाँदी में निर्मित एवं प्राण प्रतिष्ठित नवरत्न लाकेट दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी कि पूजा के बाद धारण करना चाहिए । इससे जातक को माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश कि कृपा से सभी दिशाओं से सुख समृद्धि और सफलता कि प्राप्ति होती है। यह लाकेट आप धनतेरस से दीवाली किसी भी दिन खरीद सकते है ।
🪔 दीवाली पर लक्ष्मी पूजन में देवी लक्ष्मी की आरती कपूर से करें और माँ के सामने नौ बत्ती के दीपक भी अवश्य ही जलाएं इससे माता लक्ष्मी अवश्य ही कृपा करती है । ( आप नौ मुँह वाला बना बनाया दीपक भी बाजार से लेकर उसमे बत्ती लगाकर आरती कर सकते है )।
☞✺═══✺🪔🌹🪔✺═══✺☜
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

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