आर्यिका वैराग्यमति माताजी को ससंघ भेंट की मयूर पंख से बनी पिच्छिका
सिलवानी । आर्यिकाओं, मुनियों द्वारा वर्ष भर उपयोग की गई पुरानी पिच्छिकाओं को ग्रहण करने वाले श्रावक भाग्यशाली हैं। ऐसे श्रावकों को जीवन में हमेशा ही संयम व्रत का पालन करना होगा। संयम का पालन न करने वाले श्रावक पिच्छी ग्रहण करने के अधिकारी नहीं हो सकते हैं। यह बात पिच्छिका परिवर्तन समारोह के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्थिका वैराग्यमती माताजी ने कही। अखण्ड दिगंबर जैन समाज व चातुर्मास धर्म प्रभावना समिति द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
एक वर्ष तक अपने पास रखने के बाद मुनियों-आर्थिकाओं द्वारा पिच्छिकाओं को बदला जाता है। मोर पंख से बनी इन पिच्छिकाओं से अति सूक्ष्म जीवों की भी हिंसा नहीं होती है। इसी कारण मुनियों आर्यिकाओं के द्वारा पिच्छी को धारण किया जाता है। उल्लेखनीय है कि आर्यिका माताजी को भेंट करने के लिए नवीन पिच्छी आकर्षक रूप में सजाए गए गोरथ पर सवार कर पिच्छी को मंच पर लाया गया। कार्यक्रम में समाज के बच्चों, युवाओं, बालिका मंडल, महिला मंडल द्वारा लघु नाटिका की प्रस्तुति मंच से दी गई।
कार्यक्रम में चातुर्मास का पुण्यवान कलश पारस जैन सियरमऊ वालों को बोली के माध्यम से मिला। वहीं पिच्छिका रथ के सारथी बनने का सौभाग्य ओजस भाईजी और सवाई सिंघई मौत जैन को मिला।


