Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 04 जनवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 04 जनवरी 2024
04 जनवरी 2023 दिन गुरुवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज अष्टका श्राद्ध, रुक्मिणी अष्टमी भी है। आज रुक्मिणी अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के साथ माता रुक्मिणी और प्रद्युम्न जी की स्वर्ण प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा अलंकार-शृंगार करके करनी चाहिए। साथ ही आज कम-से-कम 08 सौभाग्यवती स्त्रियॉं को वस्त्रादि से सम्मानित करना चाहिए। शास्त्र कहता है, कि रुक्मिणी अष्टमी को ऐसा करने से जीवन पर्यंत कभी धन कि कमी नहीं होती एवं सौभाग्य नित्य-प्रति बढ़ते ही रहता है। आप सभी सनातनियों को “रुक्मिणी अष्टमी” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार पौष माह कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 10:05 PM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 05:33 PM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी : हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। तथा नक्षत्र मंडल का स्वामी देवता है सवितृ अर्थात् सूर्य देवता, जो सभी ग्रहों के राजा हैं। हस्त का प्रतीक है
🔕 योग – अतिगण्ड योग 06:48 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 08:59 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 10:04 पी एम तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:46:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:14:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:25 ए एम से 06:20 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:53 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:05 पी एम से 12:47 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:10 पी एम से 02:51 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:35 पी एम से 06:02 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:37 पी एम से 06:59 पी एम
💧 अमृत काल : 10:52 ए एम से 12:39 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:53 ए एम, जनवरी 05
🚕 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पीली ध्वजा चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : कालाष्टमी व्रत/ रुक्मिणी अष्टमी/ विश्व ब्रेल दिवस, लुई ब्रेल दिवस, म्यांमार स्वतंत्रता दिवस, एम. पतंजलि शास्त्री जन्म दिवस, अभिनेता प्रदीप कुमार जन्मोत्सव, लेखक सरोजिनी साहू जन्म दिवस, अभिनेता आदित्य पंचोली जन्म दिवस, मुख्य न्यायाधीश जयंतीलाल छोटेलाल शाह पुण्य तिथि, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली स्मृति दिवस, पंजाबी गायक गुरदास मान जन्म दिवस
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
आप अपने घर में मोर पंख का गुच्छा लाकर रख सकते हैं। इसे घर में रखने से भगवान श्री कृष्ण के साथ ही साथ मां लक्ष्मी की भी कृपा आपको मिलेगी। माना जाता है की भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख अति प्रिय था। नए साल में यदि आप सुख-समृद्धि चाहते हैं तो घर में मौर पंख लाकर रख सकते हैं। इसी के साथ बच्चों के पढ़ाई वाले कमरे में इसे रखने से उन पर मां सरस्वती की कृपा बनी रहेगी। क्योंकि मोर को शास्त्रों में विद्या की देवी का वाहन बताया गया है। इसी के साथ यह धनिष्ठा नक्षत्र को भी संबोधित करता है। ज्योतिष शास्त्र में धनिष्ठा नक्षत्र को अपार धन-दौलत का नक्षत्र बताया गया है। ऐसे में मौर पंख रखना धन के लिहाज से बहुत लाभदायक रहेगा।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
धन को भी आकर्षित करता है मिट्टी वाला पानी का घड़ा वास्तु के अनुसार पानी का घड़ा या सुराही को धन के लिहाज से बहुत शुभ माना जाता है। यदि आप इसे घर लाकर इसमें पानी भर के उत्तर दिशा की ओर रखते हैं तो यह आपकी सभी आर्थिक परेशानियों को धीरे-धीरे समाप्त कर देगा। क्योंकि उत्तर दिशा देवताओं की मानी जाती है और जिस घर से देवता प्रसन्न होते हैं वहां मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सदैव के लिए बरकरार रहती है।
धातु का बना हुआ कछुआ पौराणिक कथा के अनुसार कछुआ एक प्रकार से भगवान विष्णु का प्रतिनिधित्व करता है और जहां श्री हरि की कृपा रहती है वहां लक्ष्मी जी स्वयं निवास करती हैं। ऐसे में धन प्राप्ति के लिए साल 2024 में आप अपने घर में स्फटिक, चांदी या तांबे की धातु से बना कछुआ अपने घर लाकर रख सकते हैं। वास्तु के अनुसार जिस घर में इन धातुओं से बना कछुआ रखा होता है वहां कभी भी धन की हानी नहीं होती है और रुपयों-पैसों की वर्षा दिन रात होती रहती है। माना जाता है यह कछुआ धन को चुंबक की तरह से खेंचता है और इसे रखने की सही दिशा उत्तर है।
🩺 आरोग्य संजीवनी 🩸
कब्ज को खत्म करने के घरेलू उपचार क्या है? कब्ज़ सब रोगों का मूल कारण है। कब्ज़ से ही दुनिया भर की बीमारियां होती हैं। रात को देर से कुछ न खाएं तथा भोजन के बाद दो घंटे तक न सोयें। बिना छने आटे का सेवन करें। खूब पक्के हुए पपीते का सेवन करें, भोजन के बाद छाछ का सेवन करने से कब्ज़ मिट जाती है।
कब्ज को खत्म करने के घरेलू उपचार इस प्रकार है।
भोजन के बाद एक काली हरड़ मुख में डालकर चूसते रहे। दो घंटे में घुलकर समाप्त हो जाएगी और पेट के रोगों को मिटायेगी।
7-8 मुनक्को को रात्रि में ठण्डे पानी में भिगोकर सुबह उन्हें मसलकर, थोड़े दिन पीने से कब्ज़ मिट जाती है।
रात का रखा हुआ एक लीटर पानी हर रोज सुबह सूर्योदय से पूर्व बासी मुंह पीने से कभी कब्ज़ियत नहीं होगी तथा अन्य रोगों से भी सुरक्षा होगी।
एक ग्लास सादे पानी में एक नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से कब्ज़ मिट जाती है।
एक चम्मच आंवले का चूर्ण रात को पानी के साथ लेने से कब्ज़ दूर हो जाती है।
लीची का रोजाना सेवन करने से कब्ज़ दूर हो जाती है।
कच्ची मटर खाने से कब्ज़ दूर हो जाती है।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
महादेव की कृपा के बिना जीवन अधूरा है ऐसे में उनके भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके निमित्त कुछ न कुछ पूजा अनुष्ठान करते ही रहते हैं। वहीं शिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सोमवार का दिन ये सब शिव कृपा पाने के लिए हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख दिन बताए गए हैं। माना जाता है कि इन दिनों में यदि आप भोलेबाबा की सच्चे मन से आराधना कर लें तो वह शीघ्र अपनी कृपा बरसा देते हैं।
अधिकतर शिव भक्त उनके मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं। वहीं कुछ ऐसे भक्त भी हैं जो अपने घर में शिवलिंग की स्थापना करते हैं और नित्य शिव पूजन भी करते हैं। अगर आप भी अपने घर में शिवलिंग की स्थापना करना चाहते हैं तो आज हम आपको इससे जुड़े कुछ जरूरी नियमों के बारे में आचार्य श्री गोपी राम बताने जा रहे हैं। शिवलिंग की स्थापना घर में करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता। यह नियम आज आप भी जान लीजिए।
घर में शिवलिंग रखने के नियम अगर आप अपने घर में शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं तो नर्मदेश्वर तट पर पाए जाने वाले शिवलिंग पूजा घर में स्थापित करें। ऐसा करने से महादेव तुरंत प्रसन्न होते हैं और जीवन में सफलता का वरदान देते हैं।
यदि नर्मदेश्वर शिवलिंग आपको नहीं मिल पाता है तो आप पारद का शिवलिंग घर में स्थापित कर सकते हैं। यह दो प्रकार के शिवलिंग को घर में रखने का विधान शास्त्रों में बताया गया है इसी के साथ इनकी पूर्ण विधि विधान से स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
घर में शिवलिंग स्थापित करने जा रहे हैं तो इसकी दिशा ईशान कोण (उत्तर पूर्व) सनिश्चित करें। इसके अलावा अन्य किसी दिशा में शिवलिंग को न स्थापित करें। इसी के साध जहां शिवलिंग का अर्धचंद्र होता है उसका मुख हमेशा उत्तर की ओर हाना चाहिए।
मान्यता है कि शिवलिंग की ओर हमेशा एक नंदि को भी स्थापित करें। शिवलिंग के समाने हमेशा भोलेबाबा की सवारी नंदि जी का मुख होता है। घर में शिवलिंग की स्थापना कर रहे हैं तो इस बात का भी ध्यान रखें।
घर में रखे शिवलिंग के ऊपर निरंतर जल का प्रवाह होना चाहिए इस के लिए आप शिवलिंग के ऊपर पानी से भरा एक कलश रखें और नीचे से उसमें जल के प्रवाह के लिए छोटा सा छेद कर दे जिससे निरंतर जलाभिषेक होता रहे।
शास्त्रों के अनुसार पूजा विधि में शिवलिंग पर कभी भी तुलसी, लांल रंगोली और केतकी के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए।
घर में यदि शिवलिंग स्थापित किया है तो नित्य पूजा करें और इसी के साथ रोज जल चढ़ाएं। यदि आप शिवलिंग को घर में स्थापित करने के बाद उस पर नित्य जलाभिषेक नहीं करते हैं तो इसका दिष्परिणाम आपको भोगना पड़ सकता है।
जहां आपने भोलेबाबा का शिवलिंग स्थापित किया है उसके आस पास साफ-सफाई का अवश्य ध्यान रखें।
शिवलिंग को घर में रखने से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण नियम ये भी जान लीजिए की घर में ज्याद बड़े आकार का शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। आप लगभग 4-6 इंज तक का शिवलिंग ही घर में स्थापित करें।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

