एक हफ्ते तक नर्मदा में बहते रहे दंपती के शव : धुआंधार वाटरफॉल से कूदे थे
सुसाइड नोट में लिखा- कर्ज उतार सकता हूं, कुछ और बात है।
रिपोर्टर : मनीष श्रीवास
जबलपुर । जबलपुर में पति-पत्नी ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और नर्मदा नदी में धुआंधार वाटरफॉल से छलांग लगा दी। घटना 28 जून की सुबह 9 बजे की है। 1 हफ्ते तक दोनों के शव नर्मदा में बहते रहे। 7 दिन बाद मंगलवार को पति का शव शहपुरा के माल कछार तट पर मिला। पत्नी का शव 8वें दिन बुधवार को सरस्वती घाट के पास पत्थरों में फंसा मिला। दंपती ने सुसाइड नोट भी छोड़ा था। इसमें लिखा है- कर्ज उतार सकता हूं, कुछ और भी बात है…। दोनों की 2006 में शादी हुई थी।
जवान बेटे और बहू की मौत के बाद से बूढ़े पिता के आंसू नहीं थम रहे। 14 और 16 साल के बेटों को भी मां-पिता के इस कदम से गहरा आघात पहुंचा है। पिता का कहना है- घटना वाले दिन बेटा बारिश में बाइक से जा रहा था। मैंने उसे टोका। कहा- कहां बारिश में जा रहे हो, जाना जरूरी है तो कार ले जाओ। यह पहली बार था, जब बेटे ने मेरी बात को अनसुना किया। इतने में बहू भी बाहर निकल आई और दोनों हमेशा के लिए चले गए।
पिता के लिए लिखा- दोनों बेटों को अच्छे से पढ़ाना
आदरणीय पिता जी,
हम बहुत दुखी मन से अपनी मौत को गले लगा रहे हैं। हमारी मौत से आप बिल्कुल भी व्याकुल मत होना। बस इतना करना कि दोनों बेटे को अच्छे से पढ़ाना। अगर वे आपको परेशान करें तो सजा देने से भी पीछे नहीं हटना। मेरे ऊपर बहुत सारा कर्ज है। मैं चाहूं तो इस कर्ज को चुका सकता हूं, पर कुछ मजबूरी है। मेरे ऊपर यूनियन बैंक का भी कर्ज है। इसके अलावा कुछ और भी बात है। हमारी आत्महत्या के बाद कोई किसी पर ये आरोप न लगाए कि इसके-उसके खातिर इन्होंने आत्महत्या कर ली। हमारी मौत पर न ही मेरे घरवाले और न ही संध्या के घरवालों को परेशान किया जाए। पिता जी दोनों बेटों को अच्छे से पढ़ाना
आपका बेटा धर्मेंद्र और बहू संध्या
धर्मेंद्र पटेल (40) और संध्या पटेल (35) भेड़ाघाट थाना इलाके के बम्हौरा-हिनौता गांव में रहते थे। परिवार में दंपती के 16 और 14 साल के बेटे हैं। छोटे भाई महेंद्र पटेल और 70 साल के बुजुर्ग पिता गंगाराम पटेल हैं। हमने उनके पिता से बात की, उन्हीं के शब्दों में.
मेरा बेटा सपूत था, मैंने अपना दोस्त खो दिया…
मेरे चार भाइयों का परिवार अलग रहता है। अपने दो बेटे धर्मेंद्र और महेंद्र के साथ रहता हूं। बड़ा बेटा धर्मेंद्र किसानी करता था। छोटे बेटे महेंद्र की दुकान है। बात 28 जून की सुबह की है। मैं घर के बाहर दालान में बैठा हुआ था। सुबह के 6.30 बज रहे थे। हल्की बारिश भी हो रही थी। धर्मेंद्र कमरे से बाहर आया और बाइक उठाकर स्टार्ट करने लगा। मैंने देखा तो उससे कहा कि बेटा बारिश हो रही है, कहां जा रहा है? कार से जा, भीग जाएगा। पहली बार मेरी बातों को उसने अनसुना सा कर दिया। इतने में बहू संध्या घर से बाहर आई तो मैं चुप हो गया। दोनों बाइक पर बैठे और चले गए।
धर्मेंद्र और संध्या दोनों हर एक-दो दिन में सुबह पूजा करने के लिए त्रिपुर सुंदरी मंदिर जाया करते थे। 28 तारीख की सुबह जब दोनों बाइक से जा रहे थे तो मुझे ऐसा लगा कि मंदिर ही जा रहे होंगे। कुछ देर बाद दोनों बच्चे भी स्कूल चले गए। खेत में काम लगा हुआ था तो मैं भी चला गया। दोपहर को दोनों बच्चे स्कूल से आए। मैं बेटा-बहू के कमरे में जाता नहीं था तो बाहर ही बैठा रहा। बड़े नाती ने पूछा कि दादा जी मम्मी-पापा कहां हैं? मैंने कहा कि यहीं होंगे, तब नाती ने बताया कि घर पर नहीं हैं।
रिश्तेदारी में एक शादी भी थी। मुझे लगा कि शायद वहां गए होंगे, रात तक आ जाएंगे। रात के 9 बज चुके थे। जब घर नहीं आए तो छोटे बेटे ने फोन लगाया, पर दोनों ही मोबाइल घर पर थे। बेटा-बहू का देर रात तक घर न आना और मोबाइल घर पर ही छोड़कर चले जाना, थोड़ा चिंतित करने का विषय था। हमने तलाश शुरू कर दी।
तलाश करते-करते हम भेड़ाघाट पहुंचे। यहां बेटे की बाइक खड़ी थी। धुआंधार वाटरफॉल पर बाइक को खड़ा देख अंदेशा हुआ कि कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं हो गई। भेड़ाघाट थाने पहुंचकर जानकारी दी। रात को ही भेड़ाघाट थाना पुलिस का अमला मौके पर पहुंचा। वहां एक बाबा मिले। उनका नाम रामेश्वर है। उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे एक महिला और पुरुष एक-दूसरे का हाथ पकड़कर धुंआधार में कूद रहे थे।
मेरा बेटा सपूत बेटा था। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब वह रात को मेरे पैर न दबाया हो। मैं उसे मना करता था कि बेटा तू काम करते-करते थक गया है, लेकिन वह कहता था कि मुझे अपने पिता की सेवा करने में बहुत अच्छा लगता है। चाहे गर्मी हो, बरसात हो या फिर ठंड, ऐसा कोई दिन नहीं गया, जब वह अपनी पत्नी संध्या के साथ माता त्रिपुरी के दर्शन करने नहीं गया हो। आज ऐसा लग रहा है कि मैंने अपने बेटे को नहीं, बल्कि अपने एक दोस्त को खो दिया है।
धुआंधार में तेज रहता है पानी का बहाव
रामेश्वर बाबा के यह बात बताने पर पुलिस ने जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग चौराहे से लेकर धुंआधार वाटरफॉल तक लगे आठ से दस सीसीटीवी कैमरे के फुटेज चेक किए। दोनों बाइक से जाते हुए दिखाई दिए। NDRF ने नर्मदा नदी के धुंआधार में धर्मेंद्र और संध्या को तलाश करना शुरू किया।
धुआंधार में बारिश के समय इतना पानी आ जाता है कि वहां पर अच्छे से अच्छा गोताखोर भी डूब जाता है। ऐसे में थोड़ा इंतजार किया गया। इस बीच धर्मेंद्र के परिवार ने धुआंधार से लेकर नरसिंहपुर के पास जितने घाट थे, वहां तलाशा। NDRF की टीम भी लगातार दोनों को तलाश करती रही।
पुलिस का मानना – कर्ज के अलावा कुछ और भी वजह हो सकती है
धर्मेंद्र की भेड़ाघाट हाईवे के पास दो दुकान हैं। एक प्लॉट भी है। इनकी कीमत करोड़ में है। चार – चार एकड़ जमीन दोनों भाइयों के नाम पर भी है। गांव में संपन्न परिवार में गिने जाते हैं। अभी तक की पुलिस की जांच में सामने आया है कि यूनियन बैंक से उन्होंने 20 लाख रुपए का लोन लिया था। 27 जून को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से धर्मेंद्र को फोन आया था। बैंक के कुछ अधिकारी घर भी पहुंचे थे। 28 जून की दोपहर भी बैंक अधिकारी घर पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में कर्ज से परेशान होने की बात सामने आ रही है, लेकिन कुछ और भी वजह हो सकती है। जांच की जा रही है।



