कब है काल भैरव जयंती? प्रीति योग में होगी पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 कब है काल भैरव जयंती? प्रीति योग में होगी पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
🥏 HEADLINES
🔸 मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को शिव जी के रौद्र स्वरूप काल भैरव की उत्पत्ति हुई थी.
🔹 04 दिसंबर को रात 09 बजकर 59 मिनट से मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है.
मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को शिव जी के रौद्र स्वरूप काल भैरव की उत्पत्ति हुई थी. ये भगवान भोलेनाथ के रौद्र रूप हैं. इनका केवल बटुक भैरव अवतार ही सौम्य माना जाता है. हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है, उस दिन काल भैरव की पूजा की जाती है. जो लोग काल भैरव जयंती के दिन व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक पूजा करते हैं, उनको रोग, दोष, अकाल मृत्यु के भय, तंत्र-मंत्र की बाधा से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं कि कब है काल भैरव जयंती? काल भैरव की पूजा का मुहूर्त क्या है?
👉🏽 कब है काल भैरव जयंती 2023
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस साल 04 दिसंबर सोमवार को रात 09 बजकर 59 मिनट से मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है. इस तिथि का समापन 05 दिसंबर की देर रात 12 बजकर 37 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि और निशिता पूजा मुहूर्त के आधार पर काल भैरव जयंती 5 दिसंबर मंगलवार को मनाई जाएगी.
🤷🏻♀️ काल भैरव जयंती 2023 पूजा मुहूर्त
काल भैरव जयंती के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 45 मिनट से देर रात 12 बजकर 39 मिनट तक है. काल भैरव की पूजा निशिता मुहूर्त में करते हैं. काल भैरव जयंती के दिन का शुभ मुहूर्त या अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक है.
☪️ प्रीति योग में काल भैरव जयंती 2023_
काल भैरव जयंती को प्रीति योग रात 10 बजकर 42 मिनट से अगले दिन रात 11 बजकर 30 मिनट तक है. काल भैरव की निशिता पूजा के समय प्रीति योग बना है. उससे पूर्व सुबह से विष्कंभ योग रहेगा. काल भैरव जयंती पर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा.
💁🏻♀️ काल भैरव जयंती का महत्व
तंत्र और मंत्र की सिद्धि के लिए काल भैरव की पूजा करते हैं. जिन लोगों को नकारात्मक शक्तियों या अकाल मुत्यु का डर रहता है, वे काल भैरव की पूजा करते हैं. काल भैरव भगवान शिव के रौद्र रूप हैं. जब ब्रह्म देव ने शिव जी का अपमान किया और क्रोध से उनका चौथा सिर जलने लगा तो शिव जी ने काल भैरव को उत्पन्न किया. उन्होंने ब्रह्मा जी का चौथा सिर काट दिया. स्कंदपुराण में यह कथा विस्तार से दी गई है. काल भैरव की एक कथा माता सती के पिता प्रजापति राजा दक्ष को दंडित करने से जुड़ी है.
काल भैरव से स्वयं काल भी डरता है, यमराज भी भय से कांपते हैं. इस वजह से वह महाकाल कहलाते हैं. उनकी कृपा से नकारात्मकता और बुरी शक्तियों का अंत हो जाता है.
👺 कैसे हुए काल भैरव प्रकट?
कालभैरव जयंती का दिन काल भैरव के साथ भगवान शिव की आराधना करने का विशेष महत्व है। हिंदू कथाओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश में इस बात में बहस छिड़ गई थी कि सबसे श्रेष्ठ कौन है, तो ऐसे में ब्रह्मा जी ने भगवान शिव को कुछ अपशब्द कह दिए थे, जिससे वह अधिक क्रोधित हो गए है। इके बाद भगवान शिव के माथे से भैरव प्रकट हुए। उनका रौद्र रूप देखकर हर कोई डर गया और इसी समय उन्होंने भगवान ब्रह्मा का एक सिर काट दिया, जिससे उनके चार सिर हो गए। इसके बाद सभी देवी-देवताओं ने उन्हें शांत किया और वह पुन: शिव जी के स्वरूप में वापस आ गए। लेकिन उन्होंने ब्रह्म हत्या कर दी थी। ऐसे में उन्होंने इस पाप से मुक्ति पाने के लिए काशी की शरण ली और वहीं पर रहकर पापों से मुक्ति पाई।
भगवान भैरव को पापियों को दंड देने के लिए एक छड़ी पकड़े हुए और कुत्ते पर सवारी करते हुए देखा जाता है। इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य और सफलता मिलती है। इसके साथ ही कुंडली से शनि और राहु दोष भी समाप्त हो जाता है।

