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कब है श्री लक्ष्मी पंचमी व्रत? जानिए पूजा विधि-महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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💎 कब है श्री लक्ष्मी पंचमी व्रत? जानिए पूजा विधि-महत्व
चैत्र मास में कई व्रत एवं त्योहार रखे जाते हैं। आज लक्ष्मी की उपासना के लिए समर्पित लक्ष्मी पंचमी व्रत रखा जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास में यह व्रत आज यानि 25 मार्च 2023, शनिवार के दिन रखा जा रहा है।पंचमी तिथि शुरू : 16:25 – 25 मार्च 2023
पंचमी तिथि ख़त्म : 16:30 – 26 मार्च 2023 इस दिन को ‘श्री पंचमी; या ‘श्री व्रत’ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ‘श्री’ मां लक्ष्मी के अनन्य नामों में से प्रमुख नाम है।
📚 शास्त्रों में बताया गया है कि लक्ष्मी पंचमी के दिन माता लक्ष्मी की विधिवत उपासना करने से और उपवास रखने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और साधक के जीवन में धन एवं ऐश्वर्य का आगमन होता है। जीवन में आर्थिक समस्याओं को दूर करने के लिए लक्ष्मी पंचमी का दिन बहुत ही उपयोगी माना जाता है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से लक्ष्मी पंचमी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र।
⚛️ लक्ष्मी पंचमी 2023 पूजा मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का शुभारंभ 25 मार्च 2023 को दोपहर 02 बजकर 53 मिनट पर होगा और इसका समापन 26 मार्च को दोपहर 03 बजकर 02 मिनट पर हो जाएगा। इस दिन रवि योग सुबह 06 बजकर 15 मिनट से सुबह 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इया अवधि में भगवान की उपासना करने से व्यक्ति को विशेष लाभ मिलता है।
🙏🏻 कैसे की जाती श्री पंचमी की पूजा
श्री पंचमी या लक्ष्मी पंचमी के दिन प्रात: सूर्योदय पूर्व जागकर, स्नानादि से निवृत्त होकर साफ-स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपने घर के पूजा-स्थान को साफ कर व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, उस पर मां लक्ष्मी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। मां लक्ष्मी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान करवाकर षोडशोपचार पूजन करें। माता को चंदन, केले के पत्ते, सुगंधित फूलों की माला, चावल, दूर्वा, लाल धागा, सुपारी, नारियल आदि चढ़ाएं। भोग में चावल या मखाने की खीर का नैवेद्य लगाएं। आरती करें। पूरे दिन व्रत रखें। अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है, फलाहार ले सकते हैं। सायंकाल देवी लक्ष्मी की मूर्ति के सामने घी का दीप प्रज्जवलित करें। सायंकाल के समय सामान्य पूजन कर ललिता सहस्रनाम, श्री सूक्त, कनकधारा स्तोत्र या लक्ष्मी स्तोत्र मा पाठ करें।
🗣️ कथा
पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार मां लक्ष्मी देवताओं से नाराज होकर क्षीर सागर चली गयी थीं। मां लक्ष्मी के इस तरह से जाने से अन्य देवी-देवता श्री विहीन हो गए। यह देख देवराज इंद्र ने मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया और व्रत रखा। देवराज इंद्र को ऐसा करता देख अन्य देवताओं ने भी मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए व्रत रखा और सच्चे मन से उनकी पूजा-आराधना की। देवताओं को व्रत और तप करते देख मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर सबके सामने प्रकट हो गई थीं। मान्यता के अनुसार, इसके बाद ही भगवान श्रीहरि विष्णु और लक्ष्मी का विवाह हुआ। इस दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। तब से इस दिन को लक्ष्मी पंचमी के रूप में मनाया जाने लगा।
💮 श्री लक्ष्मी उपासना विधि
श्री लक्ष्मी पंचमी व्रत को विधि को आरंभ करने से पूर्व सर्वप्रथम प्रात:काल में स्नान आदि कार्यो से निवृत होकर, व्रत का संकल्प लिया जाता है. व्रत का संकल्प लेते समय मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
पूजा के दौरान माता का विग्रह सजाकर उसमें माता की प्रतिमा की स्थापना की जाती है. श्री लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराया जाता है तत्पश्चात उनका विभिन्न प्रकार से पूजन किया जाता है।
पूजन सामग्री में चन्दन, ताल, पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल तथा नाना प्रकार के भोग रखे जाते है. इसके बाद व्रत करने वाले उपवासक को ब्रह्माणों को भोजन कराया जाता है और दान- दक्षिणा दी जाती है व इस प्रकार यह व्रत पूरा होता है. जो इस व्रत को करता है, उसे अष्ट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. इस व्रत को लगातार करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होते है. इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. केवल फल, दूध, मिठाई का सेवन किया जा सकता है।
समस्त धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी कोमलता की प्रतीक हैं, लक्ष्मी परमात्मा की एक शक्ति हैं वह सत, रज और तम रूपा तीन शक्तियों में से एक हैं. महालक्ष्मी प्रवर्तक शक्ति हैं जीवों में लोभ, आकर्षण, आसक्ति उत्पन्न करती हैं धन, सम्पत्ति लक्ष्मी का भौतिक रूप है. लक्ष्मी जी का नित्य पूजन, आरती कष्टों से मुक्ति प्रदान करती है।

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