कलकल बहती नदी में सजा माता का दरबार बना आकर्षण का केंद्र
●चुहरा ग्राम की कैथ नदी में जलविहार कर रही जगदम्बा
● छोटे से ग्राम नवरात्रि का होता है बड़ा आयोजन
● बुंदेली परम्परा और वाद्य यंत्रों के साथ हो रही माता की महाआरती
रिपोर्टर : हरिकांत विश्वकर्मा
रहली । रहली के समीपस्थ ग्राम चुहरा में नवरात्रि का पर्व बुंदेली परंपरा के साथ अनूठे और आकर्षक तरीके से मनाया मनाया जा रहा है। ग्राम से कलकल बहती कैथ नदी के बीचोंबीच मझधार में जगत जननी का मनमोहक दरबार सजाया गया है। बुंदेली वाद्ययंत्रों के साथ हजारों टिमटिमाते दीपकों से होने वाली रात्रिकालीन संगीतमय आरती का मनमोहक नजर देखते ही बन रहा है।
कलकल बहती नदी के बीच कमल के फूल के आकार की नाव में झोपड़ी की आकृति का मंडप सजाकर मातारानी का नयनाभिराम दरबार सजाया गया है। आकर्षक विद्युत सजावट के साथ नदी की कलकल बहती धारा के बीच जलविहार करती माता की चलित झांकी को देखने दूर दूर से लोग पहुँच रहे है। बुंदेली वाद्य यंत्रों के साथ होने वाली संध्याकालीन महाआरती में आस पास के कई ग्रामो के सैकड़ो श्रद्धालु शामिल होकर धर्मलाभ ले रहे है।
कार्यक्रम के सूत्रधार एवं संयोजक डॉ उमेश वैद्य ने बताया कि धर्मजागरण के मकसद से 30 वर्ष पूर्व गाँव मे ही नवरात्रि अनूठा आयोजन करने की प्रेरणा मिली माता से मिली थी और तभी से यह परंपरा सतत चली आ रही है।




