कृषिमध्य प्रदेश

खेतों में किसानों की बर्बादी का मंजर बारिश से खराब हो गई सोयाबीन फसल

सिलवानी। इस वर्ष वर्षा ने विगत कई वर्षों के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। दशहरा पर्व निकल जाने के बाद भी क्षेत्र में मानसूनी गतिविधि जारी है, जो किसानों पर काफी भारी पड़ रही है। खरीफ फसल की कटाई के समय जारी मानसूनी गतिविधियों के चलते क्षेत्र मेें करोड़ों रुपए का नुकसान किसानों को हो चुका है। पिछले लगभग तीन महीने से जिस फसल के लिए किसान ने लागत लगाई और मेहनत की वह फसल अब खेतों में भरे पानी में तैर रही है या खराब हो रही है। क्षेत्र के कई किसानों की बर्बादी का यह मंजर खेतों में दिखाई दे रहा है।
किसानों ने खरीफ फसल के रूप में जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में अधिकांश सोयाबीन की फसल खेतों में बोई थी, जिसकी परिपक्व होने की अवधि 75 से 90 दिन के बीच मानी जाती है लेकिन लगातार बारिश के कारण खेतों में ही सोयाबीन को 100 से 120 दिन तक हो चुके हैं। फसल में जो फलियां लगी हैं उन फलियों में लगातार नमी के कारण दाने अंकुरित होने लगे हैं तो पौधे सड़कर खेतों में गिर रहे हैं। इस वर्ष फसलों की स्थिति संतोषजनक थी लेकिन मानसून की बिदाई के समय जो बारिश हुई है उससे काफी नुकसान हुआ है। शासन एवं बीमा कंपनियों को सर्वे कर किसानों को मुआवजा व बीमा प्रदान करना चाहिए।

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