ग्रामीण क्षेत्र की सहकारी समिति पर पर्याप्त खाद नहीं, कई दिनों तक करना पड़ रहा इंतजार
खाद के लिए हाहाकार…रायसेन में खाद भरपूर स्टॉक फिर भी अन्नदाता परेशान
फसलों की बुवाई का सही समय
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
जिले में वितरण केंद्र की स्थिति…..
सोसायटी : जिले में 113 सोसायटियां
डीएमओ के गोदाम : 02
सहकारी केंद्र : 02
प्राइवेट डीलर : 200 से ज्यादा
खाद का सरकारी रेट
डीएपी : 1350 रु.
यूरिया : 266.50 रु.
कारण : खाद वितरण व्यवस्था में खामी, प्रशासन कागजों में बना देता है सेंटर
रायसेन। जिले का अन्नदाता रबी सीजन की तैयारी में जुट गया है। खेतों की हकाई कर उसे बोवनी के लिए तैयार किया जा रहा है।लेकिन रबी सीजन की सभी फसल की बोवनी से पहले डीएपी की जरूरत पड़ती है। जिसे लेने किसान गांव की सोसायटी से लेकर तहसील और जिला मुख्यालय पर बने वितरण सेंटरों पर जा रहा है। लेकिन कहीं खाद उपलब्ध नहीं है तो कहीं लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में है जब दिवाली का त्योहार की तैयारियों में भी किसान का परिवार जुटा हुआ है। किसान के लिए जितना जरूरी त्योहार मनाना है उतना ही बोवनी की तैयारी करना। लेकिन समस्या समय पर जल्द खाद न मिलने से आ रही है।
हम आपको यह बता दें कि रायसेन मप्र के उन जिलों में से एक है जहां खाद का कोटा भरपूर है।जो पूरे जिले भर में खाद की सप्लाई करता है। लेकिन विडंबना यह है कि इस जिले का अन्नदाता हर साल खाद के लिए इतना परेशान होता है कि इसे बयां करना भी काफी मुश्किल है। रात 3 और 4 बजे गोदाम के बाहर लाइन में खड़ा और सोते हुए के दृश्य हर साल देखने को मिलते हैं।
इस स्थिति के बीच जिला प्रशासन जिला विपणन विभाग का एक ही दावा होता है कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। अब तक इतनी टन खाद बांटी जा चुकी है और इतनी टन आने वाली है। इस तरह के बयान हर बार सुनने को मितते हैं। लेकिन व्यवस्था में सुधार आज तक नहीं आ पाया है। इसकी वजह जानने के लिए पत्रिका ने ग्राउंड स्तर पर जाकर किसान और दुकानदाराें से बातचीत की। जिसमें सामने आया कि प्रशासन यदि समय से पहले सभी वितरण केंद्रों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध करा दे तो ऐसी समस्या नहीं आएगी। क्योंकि जब भी किसान के पास पैसे होंगे वह उस समय खाद खरीदकर रख लेगा। किसानों को उस समय तक के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा जब बुवाई में बहुत कम समय बचा होता है। उसी किसान को खरीफ फसल बेचने जाना है। उसी को आगामी रबीसीजन की फसल के लिए खेत तैयार करना है। उसी को खाद, बीज खरीदना है। इन सब कामों के लिए समय चाहिए लेकिन सही समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पाती। यहीं से मांग और आपूर्ति का गणित बिगड़ जाता है। इसके फलस्वरूप वितरण केंद्रों पर लंबी लंबी लाइन लगना शुरू हो जाती हैं।



